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Hisar News: अश्व इन्फ्लूएंजा के लिए जल्द आएगी वैक्सीन
Thu, 03 Jul 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Thu, 03 Jul 2025 01:08 AM IST
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अमित भारद्वाज
हिसार। बाजार में जल्द ही अश्व इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन उपलब्ध होगी। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान (एनआरसीई) ने एक निजी कंपनी को वैक्सीन बनाने की तकनीक सौंपी है। खास बात यह है कि अब नए स्ट्रेन के अनुसार यह वैक्सीन तैयार होगी।
अश्व इन्फ्लूएंजा एक विषाणु जनित बीमारी है, जो घोड़ों और खच्चरों में तेजी से फैलती है। हालांकि यह इंसानों में नहीं फैलती। मगर संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने वाले अन्य घोड़े-खच्चर इससे प्रभावित हो सकते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और कमजोरी शामिल है। समय पर उचित इलाज न मिले तो बीमारी घोड़ों की मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में मिले थे काफी केस
इस साल अप्रैल से जून के बीच उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में घोड़ों व खच्चरों में इस बीमारी से काफी केस मिले थे। यही नहीं इस बीमारी से पीड़ित काफी घोड़ों व खच्चरों की मौत भी हो गई थी। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इन राज्यों में जाकर सैंपलिंग का कार्य किया था।
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8 साल बाद मिले इन्फ्लूएंजा के केस
अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की मानें तो 8 साल बाद इन्फ्लूएंजा के केस मिले थे। चूंकि काफी समय से कोई घोड़ा-खच्चर इस बीमारी से पीड़ित नहीं हुआ तो इस बीमारी की वैक्सीन की डिमांड भी कम हो गई थी। इस कारण से कंपनी ने इसकी वैक्सीन ही बनानी बंद कर थी जबकि उनके पास वैक्सीन की तकनीक उपलब्ध थी।
हर बार अपना स्वरूप बदलता है यह वायरस
वैज्ञानिकों की मानें तो अश्व इन्फ्लूएंजा का वायरस हर बार अपना स्वरूप बदलता है। इस बार भी जो घोड़े व खच्चर इस बीमारी से पीड़ित मिले, उनमें कुछ अलग लक्षण मिले थे। इस समस्या को देखते हुए संस्थान ने वायरस के नए स्वरूप के हिसाब से वैक्सीन तैयार की है और इसकी तकनीक एक निजी फार्मा कंपनी को सौंप दी है। संस्थान ने कंपनी को वैक्सीन तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया है।
हरियाणा के लिए भी जारी किया अलर्ट
अश्व अनुसंधान की ओर से इस बीमारी को लेकर हरियाणा के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। संस्थान का कहना है कि अगर कहीं भी घोड़ों व खच्चरों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए तो तुरंत संस्थान को सूचित करें। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में अभी तक इस बाीमारी का एक भी केस नहीं मिला है।
संस्थान ने नए स्ट्रेन के हिसाब से वैक्सीन तैयार कर उसकी तकनीक कंपनी को सौंप दी है। अब कंपनी जल्द ही वैक्सीन तैयार बाजार में उपलब्ध करवाएगी। - डॉ. तरुण भट्टाचार्य, निदेशक, केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, हिसार।
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हिसार। बाजार में जल्द ही अश्व इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन उपलब्ध होगी। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान (एनआरसीई) ने एक निजी कंपनी को वैक्सीन बनाने की तकनीक सौंपी है। खास बात यह है कि अब नए स्ट्रेन के अनुसार यह वैक्सीन तैयार होगी।
अश्व इन्फ्लूएंजा एक विषाणु जनित बीमारी है, जो घोड़ों और खच्चरों में तेजी से फैलती है। हालांकि यह इंसानों में नहीं फैलती। मगर संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने वाले अन्य घोड़े-खच्चर इससे प्रभावित हो सकते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और कमजोरी शामिल है। समय पर उचित इलाज न मिले तो बीमारी घोड़ों की मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
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उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में मिले थे काफी केस
इस साल अप्रैल से जून के बीच उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में घोड़ों व खच्चरों में इस बीमारी से काफी केस मिले थे। यही नहीं इस बीमारी से पीड़ित काफी घोड़ों व खच्चरों की मौत भी हो गई थी। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इन राज्यों में जाकर सैंपलिंग का कार्य किया था।
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8 साल बाद मिले इन्फ्लूएंजा के केस
अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की मानें तो 8 साल बाद इन्फ्लूएंजा के केस मिले थे। चूंकि काफी समय से कोई घोड़ा-खच्चर इस बीमारी से पीड़ित नहीं हुआ तो इस बीमारी की वैक्सीन की डिमांड भी कम हो गई थी। इस कारण से कंपनी ने इसकी वैक्सीन ही बनानी बंद कर थी जबकि उनके पास वैक्सीन की तकनीक उपलब्ध थी।
हर बार अपना स्वरूप बदलता है यह वायरस
वैज्ञानिकों की मानें तो अश्व इन्फ्लूएंजा का वायरस हर बार अपना स्वरूप बदलता है। इस बार भी जो घोड़े व खच्चर इस बीमारी से पीड़ित मिले, उनमें कुछ अलग लक्षण मिले थे। इस समस्या को देखते हुए संस्थान ने वायरस के नए स्वरूप के हिसाब से वैक्सीन तैयार की है और इसकी तकनीक एक निजी फार्मा कंपनी को सौंप दी है। संस्थान ने कंपनी को वैक्सीन तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया है।
हरियाणा के लिए भी जारी किया अलर्ट
अश्व अनुसंधान की ओर से इस बीमारी को लेकर हरियाणा के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। संस्थान का कहना है कि अगर कहीं भी घोड़ों व खच्चरों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए तो तुरंत संस्थान को सूचित करें। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में अभी तक इस बाीमारी का एक भी केस नहीं मिला है।
संस्थान ने नए स्ट्रेन के हिसाब से वैक्सीन तैयार कर उसकी तकनीक कंपनी को सौंप दी है। अब कंपनी जल्द ही वैक्सीन तैयार बाजार में उपलब्ध करवाएगी। - डॉ. तरुण भट्टाचार्य, निदेशक, केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, हिसार।