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सिविल सर्विस ः बेटियों ने बढ़ाया शहर का मान
ब्यूरो / अमर उजाला , हिसार
Updated Wed, 11 May 2016 12:40 AM IST
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सिविल सर्विस में रैंक
- फोटो : bureau
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अंकुर लाठर को सिविल सर्विस में मिली 77 वीं रैंक
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बेटियां परिवार की पहचान होती हैं। अगर बेटियों को मौका मिले तो हर मुकाम हासिल कर सकती हैं। डॉ. कर्ण सिंह लाठर के आवास पर पहुंचने वाले हर किसी की जुबान पर बेटियों का गुणगान हो रहा था। डॉ. केएस लाठर की बेटी अंकुर लाठर ने सिविल सर्विस में 77 वीं रैंक हासिल की है। जब पड़ोसियों को पता लगा कि अंकुर लाठर की सिविल सर्विस में 77 वीं रैंक आई है तो हर कोई उनके घर पहुंचा। अंकुर फिलहाल दिल्ली में ड्यूटी पर होने के चलते उनकी मां सरोज को ही बधाइयां दी। पड़ोस से आई सुनीता, जबिता, सुमन ने अंकुर की तारीफ करते हुए परिवार को बधाई दी। सरोज को मिठाइयां खिलाते हुए अपनी खुुुशी जाहिर की। अंकुर के चचेरे भाई विनय ने बताया कि हमें अपनी बहनों की सफलता पर बेहद नाज है।
ऑल इंडिया पीएमटी की परीक्षा में सेकेंड रैंक
वर्ष 2008 ऑल इंडिया पीएमटी की परीक्षा में सेकेंड रैंक मिला था। दरअसल अंकुर जितने ही अंक एक दूसरे अभ्यर्थी को मिले। जिसमें दूसरे अभ्यर्थी की आयु अंकुर से कुछ कम होने पर उसे टॉपर घोषित कर दिया गया था। अंकुर ने दसवीं में 96 प्रतिशत, बारहवीं में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
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दो बहनें दोनो एमबीबीएस डॉक्टर
मूल रूप जींद के गांव राजगढ़ निवासी डॉ. कर्ण सिंह लाठर वेटरनरी सर्जन है। उनके पास दो बेटियां ही हैं। उनकी बेटी अंकुर फिलहाल एम्स में न्यूरोलॉजिस्ट हैं। उनकी दूसरी बेटी अदिति लाठर भी लेडी हार्डिंग्स दिल्ली में एमबीबीएस डॉक्टर हैं।
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गांव की सरपंच थी मम्मी सरोज
अंकुर लाठर व अदिति लाठर की मम्मी सरोज देवी गांव राजगढ़ की सरपंच रह चुकी हैं। फिलहाल वह अपने सेक्टर 9-11 आवास में कुशल गृहणी की भूमिका निभा रही हैं। सरोज ने कहा कि उन्हें अपनी बेटियों पर शुरू से पूरा भरोसा था। उनकी दोनों बेटियां बेटों से बढ़कर हैं।
ड्यूटी के बाद दस घंटे पढ़ती थी
अमर उजाला से फोन पर बातचीत करते हुए अंकुर लाठर ने कहा कि वह समाज के लिए व्यापक स्तर पर काम करना चाहती थी। इसी कारण उसने एम्स में न्यूरोलाजिस्ट बनने के बाद आईएएस की तैयारी की। अपनी ड्यूटी के बाद दस दस घंटे पढ़ाई की। तीसरी बार के प्रयास में यह मुकाम हासिल किया। अंकुर लाठर ने कहा कि हरियाणा की लड़कियों को मौका मिले तो वह बहुत कुछ कर सकती हैं। उन्हें मौका मिलेगा तो वह हरियाणा में लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहेंगी। एक सवाल के जवाब में अंकुर ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या, महिला शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम करने की जरूरत है। इसके लिए समाज को शिक्षित करना जरूरी है। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पहले अपना कॅरिअर तय करें। उसके बाद उस लक्ष्य को हासिल होने तक लगातार मेहनत करें।
पूनम ने पहले ही प्रयास में पाई 317 वीं रैंक
हिसार शहर की बेटी पूनम ने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सर्विस में 317 वीं रैंक हासिल की है। सेक्टर 14 निवासी पूनम के पिता होशियार सिंह बरवाला में मार्केट कमेटी के मंडी सुपरवाइजर हैं। मां बिमला देवी गृहणी है। पूनम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम करना चाहती है। मूलरूप से बरवाला के बधावड़ गांव की रहने वाली पूनम बूरा ने इंडियन रेवेन्यू सर्विस की परीक्षा में 317 वीं रैंक हासिल की है। तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर की पूनम ने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई शहर के अमर ज्योति स्कूल से 91 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ चली गई। सेक्टर 35 स्थित राजकीय कॉलेज से 89 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं की परीक्षा पास की। 2015 में पंजाब विश्वविद्यालय से बीडीएस की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने दिल्ली जाकर सिविल सर्विस की कोचिंग लेनी शुरू कर दी। वह अपने पहले ही अटेंप्ट में कामयाब हो गई। 24 वर्षीय पूनम ने कहा कि मेरा मकसद समाज सेवा है। डेंटिस्ट बनकर कम लोगों की सेवा कर पाती। अब ज्यादा लोगों की सेवा कर पाऊंगी। पूनम की मां ने बताया कि वह अनपढ़ है। उसकी मां बिमला चाहती थी कि उनकी बेटी पढ़कर कुछ बेहतर करे। पूनम के पिता होशियार सिंह ने कहा कि बेटी पढ़ती है तो ज्यादा खुशी होती है। आज बेटी के कारण उनका नाम ऊंचा हो गया है। उन्हें बेटे से ज्यादा अपनी बेटी पर नाज है।
हरियाणा में लड़कियों को घरों में कैद रखा जाता है। मुझे मेरे परिवार ने पूरा सपोर्ट किया। इसीलिए मैं कामयाब हो पाई। मैं चाहती हूं कि लोग भी अपनी बेटियों को कैद से बाहर निकालें और उन्हें मौका दें। बेटियों को अगर परिवार का हौसला मिले तो तो वे कुछ भी कर सकती हैं।
- पूनम बूरा
अंशु यादव को 346 वीं रैंक
हिसार शहर के पीएलए की रहने वाली डॉ. अंशु यादव ने यूपीएससी में 346 वीं रैंक प्राप्त की है। इससे पहले उन्होंने 2015 में भी यूपीएससी की परीक्षा देकर 947वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में वे लखनऊ में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस में ट्रेनिंग कर रही हैं। अब उन्हें और अधिक अच्छा रैंक मिला है। डॉ. अंशु ने रोहतक से एमबीबीएस किया हुआ है। अंशु के पिता अतर सिंह यादव एचएयू से रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। जबकि राजकीय कॉलेज में प्रोफेसर रही उनकी मां का 2014 में कैंसर के कारण देहांत हो गया था। अंशु के भाई चंडीगढ़ में नेशनल प्रोडक्टीविटी काउंसिल में असिस्टेंट डायरेक्टर हैं।