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कर्फ्यू तो हटा, चेहरों से खौफ नहीं
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:10 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हिसार व हांसी में जिला प्रशासन ने कर्फ्यू हटा दिया है। केवल हांसी के तीन गांव सिसास, ढाणी पाल व सैनीपुरा में अभी भी कर्फ्यू लगा है।
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शहरों में कर्फ्यू हटाए जाने के बाद आमजन की दिनचर्या एक बार फिर पटरी पर लौटने लगी है मगर इस बीच लोगों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा रहा था।
सामान्य दिनों की बजाए 30 से 35 प्रतिशत लोग ही घरों से निकले हैं वो भी मजबूरी में। खौफजदा लोगों के रोहतक, हांसी व प्रदेश के अन्य जिलों में हुए जातीय दंगे देखने के बाद घर से निकलते समय पांव वापस खींच रहे थे।
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दिन भर घूमती रही प्रशासन की गाड़ियां
दिन भर शहर व गलियों में प्रशासन की गाड़ियां घूमती रही। खौफजदा लोग प्रशासन की एनाउंसमेंट के चलते भी डर के साये में रहे। बार बार एनाउंस किया जा रहा था कि कर्फ्यू जरूर हट गया है मगर अभी भी धारा 144 शहर में लागू है। कहीं भी पांच से ज्यादा लोग एकत्रित नहीं हो सकते। अगर किसी ने धारा 144 का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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102 पर रहा दबाव
जाम व आरक्षण के दौरान सरकारी एंबुलेंस सेवा पर दबाव रहा। जाम के दौरान जरूरतमंद लोगों तक गाड़ियां तक नहीं पहुंच पाई। रूटीन में जहां नागरिक अस्पताल की एंबुलेंस सेवा के लिए 50 के लगभग कॉल आती थी इस दौरान 100 से ज्यादा बार एंबुलेंस आवश्यकता के लिए कॉल आई। हां यह बात अलग है कि मरीज या जरूरतमंद तक एंबुलेंस सेवा पहुंची या नहीं वह रास्ता खुला होने पर निर्भर रहा। कर्फ्यू के कारण निजी एंबुलेंस संचालक भी मरीज ले जाने से परहेज करते रहे। उसका दबाव भी सरकारी एंबुलेंस सेवा पर बढ़ गया। बुधवार को भी देर रात तक 90 के आसपास कॉलिंग हुई।
घनघनाते रहे फोन, अफवाहें भी चलती रहीं
लोग एक दूसरे व अपने परिचितों के पास पूरा दिन फोन घनघनाते रहे। फोन करने वाले पहली बात यही पूछते कि आखिर शहर में क्या स्थिति है कर्फ्यू हट गया क्या? आज शहर में कहां दंगा हुआ? बार बार हांसी में कभी घर में आग लगाने की तो भी दुकान में तोड़फोड़ करने की अफवाहें चलती रही।
लिंक रोड की बजाए मुख्य रोड से जा रहे वाहन चालक
निजी वाहनों से सफर करने वाले लोगों ने डर के मारे लिंक रोड नहीं यूज किए। आखिर कहीं कोई जाम न कर दे या फिर कोई दंगाई गाड़ी को तोड़फोड़ न दे या आग न लगा दे इस तरह के सवालों लोगों की जुबां पर साफ थे। इसके चलते मजबूरन कहीं आने जाने वाले लिंक रोड की बजाए मुख्य रोड से ही होकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे थे। हालांकि चाहे उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़े बावजूद लिंक रोड के वे मुख्य रोड से ही होकर जा रहे थे।
अधिकारियों के मोबाइल पर 500 से 550 कॉल
हिसार को जातीय मामले में प्रदेश का सबसे संवेदनशील जिला माना जाता है। जातीय तनाव को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। आरक्षण आंदोलन खत्म होने के बाद अब तनाव को समाप्त कर सामान्य की ओर बढ़ने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हिसार जिले में आईजी अनिल यादव, मंडल आयुक्त राजबीर सिंह, डीसी चंद्रशेखर खरे, पुलिस अधीक्षक अश्विनी शैणवी सहित अन्य अधिकारी रोजाना मीटिंग कर रहे हैं। इन अधिकारियों के मोबाइल पर रोजाना 300 से 350 कॉल हो रही है। अधिकारियों की ओर से भी 200 से 250 कॉल की जा रही हैं।
डीसी ने गले मिलवाया
प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से हर गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच, विभिन्न संगठनों के प्रधान, गणमान्य लोगों के साथ लगातार संपर्क में हैं। खासतौर पर तनाव वाले गांव की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। डीसी चंद्रशेखर खरे ने बुधवार को भी सैनी, जाट, गुर्जर सहित अन्य जातियों के लोगों को गले मिलवाया। एक दूसरे के प्रति नाराजगी दूर कराते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया।