फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   The work of improving the breed of cows is in progress through reformative thinking and efforts: Prof. humor

सुधारशील सोच और प्रयत्नों से गायों की नस्ल सुधार का कार्य प्रगति पर : प्रो. विनोद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:29 PM IST
विज्ञापन
The work of improving the breed of cows is in progress through reformative thinking and efforts: Prof. humor

विज्ञापन

हिसार। लाला लाजपतराय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के कुलपति प्राे. विनोद वर्मा ने बताया कि गायों की नस्ल में सुधार के लिए सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए लुवास विश्वविद्यालय में भ्रूण प्रत्यारोपण की एक उत्तम, पूरी तरह से इस कार्य को समर्पित आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा चुकी है। इस प्रयोगशाला में लुवास के वैज्ञानिकों की एक टीम, प्रदेश के पशुओं में नस्ल सुधार के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
मंगलवार को पंचकूला के पीब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हरियाणा गोसेवा आयोग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा एवं हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के संयुक्त रूप से भ्रूण स्थानांतरण प्रौद्योगिकी व इन विट्रो निषेचन की वर्तमान स्थिति, हालिया प्रगति और भविष्य का परिप्रेक्ष्य पर राष्ट्रीय कार्यशाला एवं विचार मंथन पर सेमिनार आयोजित किया गया। लुवास कुलपति डॉ. वर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवन गर्ग, धर्मबीर मिर्जापुर (चैयरमैन, हरियाणा पशुधन विकास आयोग), पूर्ण मल यादव (उप-चैयरमैन गो सेवा आयोग)व गोसेवा आयोग के सदस्यों सहित पशुपालकों, गोशाला संचालक का स्वागत करते हुए कही।
विज्ञापन


हरियाणा गोसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण गर्ग ने कहा कि गोसेवा आयोग का लक्ष्य गोमाता की उन्नति एवं नस्ल सुधार के लिए हर संभव प्रयास करना है। इस कार्य में आयोग द्वारा समय-समय पर वैज्ञानिक कार्यक्रम एवं गोशालों के लिए हर संभव मदद दी जाती है। आज के समय में वैज्ञानिक सोच की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

भ्रूण प्रत्यारोपण विधि के विशेषज्ञ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड गुजरात से डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि यदि इस तकनीक को पशुपालक के स्तर पर अपनाना है तो वह लागत प्रभावी होनी चाहिए, इसे लागू करने के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति और उपभोग्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। डॉ. अजय पाल सिंह असवाल, कलसी, उत्तराखंड डेयरी विकास बोर्ड ने ईईटी-आईवीएफ तकनीक की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एक छोटे तरल नाइट्रोजन सिलेंडर में हजारों भ्रूण आयात किए जा सकते हैं और इसे सही प्राप्तकर्ता को हस्तांतरित किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. एसपी सिंह, डॉ. नरेश जिंदल समेत करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed