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Hisar News: छात्र महा पंचायत में गूंजी एकता की आवाज, छात्र-किसान नेताओं ने मिलकर दी आंदोलन की चेतावनी
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हिसार में यादव धर्मशाला में आयोजित छात्र महापंचायत में उपस्थित विद्यार्थी। स्रोत आयोजक
हिसार। यादव धर्मशाला में वीरवार को मांगों के लिए छात्र महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेशभर के विभिन्न छात्र संगठनों, किसान नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर भाग लिया। यह महा पंचायत प्रदेश में छात्र अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संघर्ष का प्रतीक बनी। कार्यक्रम में प्रमुख छात्र संगठन आईएसओ, एसएफआई, पीएसएफ, इनसो सहित अनेक स्वतंत्र छात्र नेताओं ने सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। बड़ी संख्या में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पहुंचे छात्रों ने शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और छात्र एकता के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की।
महा पंचायत में कई किसान नेताओं ने भी छात्रों के समर्थन में पहुंचकर एकजुटता दिखाई। इनमें किसान नेता रवि आजाद, अमरजीत कुंडू (किसान यूनियन), हर्षदीस गिल किसान यूनियन, अक्षित नरवाल (केयू), गोविंद सैनी (सीआरएसयू विश्वविद्यालय, जींद), मंजीत कोड़ा (कैथल), लाल बहादुर खोलवाल (वकील, हिसार कोर्ट) और अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के भवानी सिंह शामिल रहे। सिवाच खाप यूथ अध्यक्ष अमित सिवाच ने भी छात्रों की मांगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया। पंचायत के समापन पर छात्र नेताओं ने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़ी प्रमुख समस्याओं और छात्र निलंबन आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की गई। छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आने वाले 10 दिनों में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को हरियाणा के हर कॉलेज और विश्वविद्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। छात्र नेताओं ने कहा कि अगली बार इससे भी बड़ी प्रदेशव्यापी पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें छात्र और किसान मिलकर सड़कों पर उतरेंगे।
छात्रों की मुख्य मांगें
-टीचिंग व नॉन-टीचिंग स्टाफ को सैलरी ट्रेजरी खाते से दी जाए।
-जीजेयू का वार्षिक बजट कम से कम दस गुना बढ़ाया जाए।
-बजट की कमी के नाम पर फीस बढ़ोतरी बंद की जाए।
-छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल किए जाएं।
-सभी संकायों की फीस अन्य विश्वविद्यालयों के अनुरूप 90% तक घटाई जाए।
-पीएचडी फीस को 2020 के ऑर्डिनेंस के अनुसार लागू किया।
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महा पंचायत में कई किसान नेताओं ने भी छात्रों के समर्थन में पहुंचकर एकजुटता दिखाई। इनमें किसान नेता रवि आजाद, अमरजीत कुंडू (किसान यूनियन), हर्षदीस गिल किसान यूनियन, अक्षित नरवाल (केयू), गोविंद सैनी (सीआरएसयू विश्वविद्यालय, जींद), मंजीत कोड़ा (कैथल), लाल बहादुर खोलवाल (वकील, हिसार कोर्ट) और अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के भवानी सिंह शामिल रहे। सिवाच खाप यूथ अध्यक्ष अमित सिवाच ने भी छात्रों की मांगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया। पंचायत के समापन पर छात्र नेताओं ने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़ी प्रमुख समस्याओं और छात्र निलंबन आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की गई। छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आने वाले 10 दिनों में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को हरियाणा के हर कॉलेज और विश्वविद्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। छात्र नेताओं ने कहा कि अगली बार इससे भी बड़ी प्रदेशव्यापी पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें छात्र और किसान मिलकर सड़कों पर उतरेंगे।
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छात्रों की मुख्य मांगें
-टीचिंग व नॉन-टीचिंग स्टाफ को सैलरी ट्रेजरी खाते से दी जाए।
-जीजेयू का वार्षिक बजट कम से कम दस गुना बढ़ाया जाए।
-बजट की कमी के नाम पर फीस बढ़ोतरी बंद की जाए।
-छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल किए जाएं।
-सभी संकायों की फीस अन्य विश्वविद्यालयों के अनुरूप 90% तक घटाई जाए।
-पीएचडी फीस को 2020 के ऑर्डिनेंस के अनुसार लागू किया।