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Hisar News: शिक्षक की तपस्या...ज्ञान की लौ से चमका न्याय का सूर्य
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हिसार। जब कोई गुरु अपने पढ़ाए हुए शिष्य को देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन देखता है, तो वह क्षण केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन भर की तपस्या, साधना और विश्वास का प्रतिफल होता है। गांव कैमरी निवासी रिटायर्ड शिक्षक गूगनराम गोदारा के लिए यह पल इसी अनुभूति से भरा है, जब उनके शिष्य सूर्यकांत आज भारत के मुख्य न्यायाधीश बने हैं। गूगनराम गोदारा ने बताया कि उन्होंने गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और बाद में इसी महाविद्यालय में 25 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। रिटायरमेंट को 31 वर्ष बीत जाने के बावजूद उनका कॉलेज से जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा है। वर्तमान में वे कॉलेज एलुमनी के प्रधान हैं। हर तीन-चार वर्ष में एलुमनी मीट का आयोजन किया जाता है और होनहार लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को सहायता देने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सीजेआई सूर्यकांत उनके ही विद्यार्थी रहे हैं। यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे महाविद्यालय, हिसार और हरियाणा के लिए गर्व की बात है। खास यह है कि सूर्यकांत ग्रामीण क्षेत्र और साधारण परिवार से निकलकर न्यायपालिका के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं। यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
उन्होंने कहा कि सीजेआई सूर्यकांत उनके ही विद्यार्थी रहे हैं। यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे महाविद्यालय, हिसार और हरियाणा के लिए गर्व की बात है। खास यह है कि सूर्यकांत ग्रामीण क्षेत्र और साधारण परिवार से निकलकर न्यायपालिका के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं। यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
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