हरियाणा दिवस पर विशेष: किसी ने घर के हालात से लड़कर तो किसी ने परिवार से छुपकर दिलाई प्रदेश को पहचान
हरियाणा दिवस पर हम आपकों हिसार की कुछ उन प्रतिभाओं से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से जिले का ही नहीं प्रदेश का भी नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
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जीवन में आगे बढ़ने के लिए हर व्यक्ति को संघर्ष के रास्ते पर चलना ही पड़ता है। बिना संघर्ष के कहां कोई सफल हो पाता है। सफलता का वास्तविक आनंद तो संघर्ष से सफलता प्राप्त करने पर ही आता है। कहने को तो देश की आधी आबादी महिलाओं की है, मगर जब बात समान अधिकारों की आती है तो अपने अधिकारों व सपनों को पूरा करने के लिए इस आधी आबादी को जद्दोजहद करनी पड़ती है। बावजूद इसके जब भी इन्हें मौका मिलता है तो यह खुद को साबित करने से चूकती नहीं हैं। अपनी पहचान बनाने के लिए इन्हें समाज ही नहीं, बल्कि अपने ही परिवार से लड़ना पड़ता है। हरियाणा के हिसार में काफी ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिन्होंने प्रदेश को देश के नक्शे पर एक पहचान दिलाई। आज हरियाणा दिवस पर हम ऐसी ही कुछ प्रतिभाओं से आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं।
पापा से छुपकर कराटे खेलना शुरू किया
शुरू से ही खेलो में मेरी रुचि रही है। सात साल की उम्र में मैंने कबड्डी, खो-खो, हॉकी इन गेम्स में खेलना शुरू किया था। उसके बाद 2003 में मैंने कराटे खेलना शुरू किया। पापा नहीं चाहते थे कि मैं कराटे खिलाड़ी बनूं लेकिन मां ने मेरा पूरा साथ दिया। मैैंने पापा से छुपकर कराटे खेलना शुरू किया था। पापा से यह बात मैंने और मां ने डेढ़ साल तक छुपाई। जब स्टेट के लिए खेलने में मेरा चयन होने के बाद मैंने पापा से यह बात बताई। गोल्ड मेडल जीत कर हरियाणा को पहचान दिलाई। - विजेता मुदलिया, कराटे प्लेयर
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उपलब्धियां
- स्टेट में गोल्ड मेडल हासिल किया।
- 2013 में नेशनल में गोल्ड मेडल देश के नाम किया।
रिश्तेदारों ने किया मना, अभिभावकों ने दिया साथ
घिराय गांव की रहने वाली बॉक्सर सीवी बूरा ने अपने सपनों की उड़ान भर कर मिसाल बनी थी। मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरा साथ दिया। रिश्तेदारों के मना करने पर भी माता-पिता ने हमेशा साथ दिया। इसलिए मैंने बड़ी बहन स्वीटी को देख कर बॉक्सिग की शुरुआत की। उनकी सफलता और खेल से प्रभावित होकर मैंने होकर मैंने बॉक्सिंग को चुना। उन्हीं से सीखकर कर मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग में पहचान बना पाई। देश के नाम गोल्ड मेडल किया। - सीवी बूरा, बॉक्सर
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उपलब्धियां
- 2020 में खेलों यूनिर्वसिटी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल
- 2019 में खेलों इंडिया यूथ गेम्स में गोल्ड मेडल
चोटियां फतह कर खुद को शिखर पर पहुंचाया
हिसार के श्यामलाल बाग गली नंबर 2 निवासी पर्वतारोही रीना भाटी ने विश्व की सात सबसे ऊंची चोटियों में शामिल किलिमंजारो को फतह करके हरियाणा का नाम रोशन किया। मेरा उद्देश्य विपरित स्थितियों में खुद को संभाले रखना है। रीना ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने कई चोटियों को फतह किया है। मैंने जनवरी 2019 में 11123 फीट ऊंचे चादर ट्रैक को फतह किया। उन्होंने यह सफर माइनस 20 से 30 डिग्री में तय किया था। 5289 मीटर ऊंची फ्रेंडशिप पीक को समिट किया। - रीना भाटी, पर्वतारोही
उपलब्धि
- दक्षिण अफ्रीका में स्थित किलीमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर फतह किया
- किलीमंजारो को फतेह किया
छोटी सी उम्र में बनाया विश्व रिकॉर्ड
पर्वतारोही शिवांगी पाठक ने 16 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट को फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। रायपुर फाटक समीप ग्लोबल स्पेस सोसाइटी की रहने वाली शिवांगी पाठक ने इतनी छोटी से उम्र में पहाड़ों की कई चोटिया फतह करके माउंट एवरेस्ट का विश्व रिकॉर्ड बनाकर हरियाणा को एक नई पहचान दिलवाई है।
उपलब्धि
- 2018 में 16 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतेह करके विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- विश्व की किलिमंजारो जो साउथ अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी है उसको फतह किया।
- यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रूस उस पर तिरंगा फहराया ।
- विश्व के चौथे सबसे उंचे पर्वत, पर्वत ल्होत्से पर तिरंगा फहराया।
- विश्व की चौथी सबसे ऊंची पर्वत लहोत्से पर तिरंगा फहराया।
अन्नू ने 12 साल की उम्र्र में बनाया विश्व रिकॉर्ड
हिसार के विद्युत नगर में रहने वाली अन्नू यादव नेे 12 साल की उम्र में नया इतिहास रचा। अन्नू ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई की 3740 मीटर की ऊंचाई को फतह किया। माउंट किलिमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर है जहां माइनस 20 डिग्री तापमान रहता है। जिस पर अन्नू यादव 24 घंटे शिखर पर रुककर भारत देश का तिरंगा लहराएंगे और विश्व रिकॉर्ड बनाया और हरियाणा के साथ पूरे देश का नाम रोशन किया।
उपलब्धियां
- माउंट किलिमंजारो की ऊंचाई 5895 मीटर को किया फतेह