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Hisar News: 29 तक रहेगा आषाढ़ मास, देवशयनी एकादशी के बाद शुरू होगा चातुर्मास

Fri, 03 Jul 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Fri, 03 Jul 2026 01:24 AM IST
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The month of Ashadha will continue till 29th, Chaturmas will start after Devshayani Ekadashi.

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हिसार। सनातन धर्म में आषाढ़ मास को आध्यात्मिक साधना, भक्ति और सेवा का विशेष महीना माना गया है। इस वर्ष आषाढ़ मास 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव, भगवान विष्णु और गुरु की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में जप, तप, दान, पूजा-पाठ और प्रकृति सेवा से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस दौरान जल संरक्षण, वृक्षारोपण, पशु-पक्षियों को भोजन व पानी उपलब्ध कराने और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य श्रद्धाभाव से करते हैं।
आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा पर्व का विशेष महत्व होता है। इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर उनके ज्ञान के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। धार्मिक संस्थानों, आश्रमों और मंदिरों में गुरु पूजन, सत्संग और भजन-कीर्तन के आयोजन किए जाते हैं।
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इस माह में भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल बताया गया है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप और व्रत से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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शिव मंदिर के पंडित श्याम ने बताया कि आषाढ़ मास की सबसे महत्वपूर्ण तिथि देवशयनी एकादशी होगी। इसी दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का प्रारंभ होता है। चातुर्मास शुरू होते ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। ये शुभ कार्य देवउठनी एकादशी के बाद पुनः आरंभ होंगे।

उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह सेवा और प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। इस दौरान जल स्रोतों की रक्षा, पौधारोपण, गाय सहित पशु-पक्षियों की सेवा, उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
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