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Hisar News: अंधेरी कोठरी में किताबी ज्ञान से उजाले की ख्वाहिश

Sun, 01 Sep 2024 04:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sun, 01 Sep 2024 04:48 AM IST
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The desire to find light from bookish knowledge in a dark room
सुरेश सहारण
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हिसार। जाने-अंजाने में अपराध की राह पकड़ चुके बंदी अब पढ़-लिखकर सुनहरे भविष्य का सपना देख रहे हैं। अंधेरी कोठरी में किताबी ज्ञान हासिल कर बदनामी के दाग को धोने की इच्छा इतनी प्रबल है कि हिसार के केंद्रीय कारागार-1 में 44 बंदी और कैदी 10वीं, 12वीं और बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। इस साल 8 बंदियों ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की है।
हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, दुष्कर्म जैसे जघन्य गुनाह करने वाले बंदियाें और कैदियों को जेल में बंद शिक्षित कैदी या बंदी ही पढ़ाते हैं। सुबह- शाम ठीक उसी तरह कक्षाएं लगती हैं, जैसी किसी स्कूल में चलती हैं। सप्ताह में दो बार बाहर से एक शिक्षक बुलाकर बंदियों को पढ़ाया जाता है। टाउन पार्क के पास स्थित कारागार-1में फिलहाल 1750 बंदी और कैदी बंद हैं।
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इस साल राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के तहत 3 बंदी दसवीं और 4 बंदी 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। वहीं इग्नू के माध्यम से बीए प्रथम वर्ष में 17, बीए द्वितीय वर्ष में 12 और बीए फाइनल में 8 बंदी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए जेल प्रशासन की तरफ से शिक्षित बंदियों की ड्यूटी लगाई गई है। परीक्षा के लिए जेल में ही केंद्र बनाया जाता है।
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जेल प्रशासन उपलब्ध कराता है किताबें
जेल के अंदर पढ़ाई करने वाले बंदियों को जेल प्रशासन की तरफ से किताबें दी जाती हैं। परीक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। पढ़ाई करने वालों में सभी युवा है। इनकी तैयारी की परख के लिए जेल प्रशासन की तरफ से टेस्ट भी लिए जाते हैं। साक्षरता मिशन के तहत जो पढ़े-लिखे नहीं हैं, उनको भी आखर ज्ञान करवाया जा रहा है। ऐसे 121 बंदी और सजायाफ्ता कैदी हैं, जो अपना नाम लिखना और अक्षरों की पहचान करना सीख रहे हैं। हर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
सलाखों के पीछे फैला रहे शिक्षा का उजियारा
सलाखों के पीछे कुछ ऐसे बंदी भी हैं जो शिक्षा का उजियारा फैलाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे। ये कैदी अशिक्षित बंदियों को शिक्षा दे रहे हैं। केंद्रीय कारागार में बंद दो बंदियों ने जेल में रहते हुए बीए की परीक्षा पास की। परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर वे अब सुबह और शाम की पाली में 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले बंदियों को पढ़ा रहे हैं।
समाज की मुख्यधारा में लाना उद्देश्य
जेल अधीक्षक दीपक शर्मा बताते हैं कि जेल प्रशासन का प्रयास रहता है, बंदियों को और कैदियों की काउंसलिंग कर उन्हें किसी तरह अपराध की राह से दूर कर समाज की मुख्य धारा में ला सकें। पढ़ाई के साथ ही इनके लिए योग और मेडिटेशन की वर्कशॉप भी लगाते हैं। रुचि के अनुरूप कामकाज सिखाकर हुनरमंद बनाते हैं, ताकि यहां से निकलने के बाद गुजर-बसर कर परिवार का सहारा बन सकें।


जेल में फिलहाल 165 बंदी व कैदी पढ़ रहे हैं। जेल प्रशासन की तरफ से इन्हें किताबें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। हमारा प्रयास है कि यहां से रिहा होने के बाद बंदी और कैदी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आगे का जीवन सम्मानपूर्वक बीता सकें। पढ़ने के लिए है, हर सुविधा उपलब्ध करवाने की कोशिश रहती है। - दीपक शर्मा, जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार -1, हिसार।
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