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Hisar: बेटी के कहने पर बुक करवाई थी कार, बेटे की ख्वाहिश भी पूरी की, तकरार से बिखरा गया परिवार

Sun, 17 Jul 2022 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 17 Jul 2022 10:42 PM IST
सार

हिसार में सस्ता लैपटॉप लाने से खफा पत्नी ने 2 बच्चों संग ट्रेन के आगे कूदकर जान दी। डेढ़ साल पहले भाई-बहन ने एक साथ शुरू एथलेटिक्स की प्रेक्टिस की थी। अनुष्का जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप की तैयारी कर रही थी।

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The car was booked at the behest of the daughter, the son's wish was also fulfilled, the family was scattered by the dispute
हिसार में ट्रेन के नीचे आने से तीन की मौत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार के नहला गांव के रहने वाले और पशु चिकित्सक सोमवीर ने कुछ दिन पहले ही बेटी अनुष्का की पंसद की कार बुक करवाई थी। बेटा हार्दिक जो भी डिमांड करता उसे भी पूरा कर रहा था। मगर छोटी सी तकरार से पूरा परिवार बिखर गया।

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सस्ता लैपटॉप लाने से खफा पत्नी ने 2 बच्चों संग ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। दर्दनाक हादसे से सोमवीर सदमे में हैं। सोमवीर की बेटी और बेटा पढ़ाई में होनहार के साथ साथ खेल में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे। अनुष्का जूनियर नेशनल एथलेटिक की तैयारी कर रही थी।
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शॉटपुट में दो बार पदक जीत चुकी थी अनुष्का
डेढ़ साल पहले दोनों ने एक साथ प्रैक्टिस शुरू की। अनुष्का दो बार जिला स्तरीय एथलेटिक प्रतियोगिता के शॉटपुट इवेंट में स्वर्ण पदक जीत चुकी थी। अनुष्का का वर्ष 2021 में इंटर डिस्ट्रिक नेशनल चैंपियनशिप के लिए चयन भी हुआ था। मगर कोरोना के कारण चैंपियनशिप रद्द हो गई थी। अब वह नवंबर में होने वाली जूनियर नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी कर रही थी। इससे पहले अगस्त में वह स्टेट चैंपियनशिप के लिए ट्रायल देती। किसी को क्या पता था कि अब बहन-भाई खेल मैदान से सदा के लिए दूर हो जाएंगे।
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हार्दिक 400 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो की करता था प्रैक्टिस
अनुष्का शॉटपुट खेलती थी वहीं भाई हार्दिक 400 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो की तैयारी कर रहा था। हालांकि उसने अभी तक दोनों में से किसी एक इवेंट को फाइनल नहीं किया था। हार्दिक ने अभी तक एक भी चैंपियनशिप नहीं खेली थी। हार्दिक की पढ़ाई में रुचि होने के साथ-साथ उसे काफी नॉलेज थी। वह ग्राउंड में बच्चों के साथ काफी हंसमुख रहता था।

दोनों रोजाना चार से पांच घंटे करते थे प्रैक्टिस
दोनों रोजाना सुबह-शाम चार से पांच घंटे मैदान में अभ्यास करते थे। दोनों अलग-अलग साइकिल पर आते थे। शनिवार को दोनों बहन-भाई ने वालीबाल मैच भी खेला। मैच खेलकर रात को 9 बजे ग्राउंड से वह घर चले गए। मगर रात को मां, बेटा और बेटी ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। खास बात यह है कि दोनों बहन-भाई का खेल नर्सरी में भी चयन हो गया था।

डी फ्रिज न होने से शवों को किया अग्रोहा रेफर
सूर्य नगर रेलवे फाटक के नजदीक देर रात 12.50 पर ममता ने अपने दो बच्चों के साथ जयपुर जाने वाली रेलगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना का पता चलने पर करीब पौने दो बजे राजकीय रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। रात भर शव रेलवे पटरी किनारे पड़े रहे। सुबह एंबुलेंस के जरिए शवों को नागरिक अस्पताल लाया गया। उस समय तक शवों की शिनाख्त नहीं हुई थी। चिकित्सक ने शवों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा रेफर कर दिया क्योंकि शवों को रखने के लिए डी फ्रिज की व्यवस्था नहीं थी।

हर बार कर देते है रेफर
मामले की जांच कर रहे एसआई राधेश्याम ने बताया कि नागरिक अस्पताल में मौजूदा चिकित्सक सुरेश को शाम तक शवों को शवगृह में रखने की बात कहीं थी, लेकिन उन्होंने शवों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा रेफर कर दिया। शवों को अग्रोहा लेकर गए। वहां पर पहुंचे तो पता चला कि शवों की शिनाख्त हो चुकी है। वहां के चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि यहां पर शवों को डी फ्रिज में रखने के लिए भेजा गया था। मना करने के बाद वापस नागरिक अस्पताल पहुंचे। इसी दौरान मृतकों के परिजन भी वहां पर पहुंच गए। चिकित्सक से बात की तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज चिकित्सकों सेे वहीं पर पोस्टमार्टम करने की हामी भरी। उसके बाद दोबारा से मेडिकल कॉलेज अग्रोहा जाना पड़ा।

35 मिनट तक रुकी रही ट्रेन
घटना के बाद करीब 35 मिनट तक जयपुर जाने वाली रेलगाड़ी रुकी रही। जब घटना का पता चला तो यात्री ट्रेन से नीचे उतरे। उस समय तक ये पता नहीं चल पाया था कि ट्रेन के नीचे आने से किसकी मौत हुई है। शव ट्रेन के पहियों के बीच फंसे हुए थे। बीस मिनट के बाद ट्रेन को धीरे-धीरे चलाया गया। बाद में शवों को पटरी से उठा कर बाहर रखा गया।


रेलवे दुर्घटना के तीन शवों को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल लाया गया। उस समय तक शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। शवगृह में एक डी फ्रिज है और उसमें दो शव रखे जा सकते हैं। ऐसे में शवों को मेडिकल कॉलेज अग्रोहा रेफर किया था। -चिकित्सक सुरेश

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