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Hisar News: रिश्तों की डोर में उलझी हिंसा की पीड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 12:45 AM IST
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The anguish of violence entangled in the bonds of relationships.
हिसार। रिश्तों की डोर में उलझी घरेलू हिंसा के मामले जिले में लगातार सामने आ रहे हैं। जिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय में पिछले पांच माह में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की काउंसिलिंग के लिए 316 मामले पहुंचे हैं। यानी औसतन हर दिन दो मामले सामने आ रहे हैं।
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जिला संरक्षण अधिकारी के अनुसार शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र से अधिक मामले आते हैं। नौकरीपेशा महिलाओं की तुलना में गृहिणियों के घरेलू हिंसा का शिकार होने के मामले भी ज्यादा हैं।
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जिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय में पीड़ित महिलाओं की मदद की जाती है। सबसे पहले दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग की जाती है और आपसी सहमति से समाधान का प्रयास किया जाता है।
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काउंसिलिंग से मामला नहीं सुलझने पर महिला को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए मामला संबंधित थाने में कार्रवाई के लिए भेजा जाता है या महिला को वकील मुहैया कराया जाता है।

ये होती है घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा का अर्थ घर या परिवार के भीतर किसी सदस्य, विशेषकर महिला, के साथ किया जाने वाला शारीरिक, मानसिक, मौखिक, यौन या आर्थिक दुर्व्यवहार है। शारीरिक हिंसा में मारपीट, थप्पड़ मारना, लात-घूंसे चलाना, धक्का देना या किसी भी तरह की शारीरिक क्षति पहुंचाना शामिल है। मानसिक या भावनात्मक हिंसा में लगातार अपमानित करना, गाली देना, चरित्र पर संदेह करना, डराना-धमकाना या बच्चा न होने पर ताने मारना शामिल है। मौखिक दुर्व्यवहार में अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना, सबके सामने नीचा दिखाना या अभद्र बातें कहना शामिल है।यौन हिंसा में सहमति के बिना किसी भी प्रकार का यौन संबंध बनाना या यौन प्रकृति का जबरन आचरण करना शामिल है। आर्थिक या वित्तीय शोषण में महिला या उसके बच्चों के भरण-पोषण के लिए पैसे न देना, उसकी निजी संपत्ति छीन लेना या उसे आर्थिक रूप से पूरी तरह निर्भर रखना शामिल है।

वर्षवार मामले और समाधान

वर्ष
कुल मामले
समाधान

2023-24
850
391

2024-25
1325
624

2025-26
456
80

2026-27 (अगस्त तक)
316
110

घरेलू हिंसा के 80 प्रतिशत मामले ग्रामीण क्षेत्र से

अधिकारी के अनुसार घरेलू हिंसा के 80 प्रतिशत मामले ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि 20 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्र से आते हैं। उनका कहना है कि शहरी क्षेत्र में लोग बदनामी के डर से शिकायत करने से बचते हैं, जिससे कई मामले दबे रह जाते हैं। कम पढ़ी-लिखी महिलाओं और गृहिणियों के साथ नौकरीपेशा महिलाओं की अपेक्षा घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा सामने आते हैं। नौकरीपेशा महिला आर्थिक रूप से स्वावलंबी होने के कारण किसी पर निर्भर नहीं होती।

केस नंबर एक

शहर निवासी एक महिला पर औपरी पराई आने पर उसका पति उसे चर्च ले जाने लगा। बाद में महिला खुद चर्च जाना चाहती थी और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा चर्च को देना चाहती थी, लेकिन पति ने उसे मना कर दिया। इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा होने लगा और मामला तलाक तक पहुंच गया। यह मामला काउंसिलिंग के लिए जिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय पहुंचा। काउंसिलिंग के बाद मामले का समाधान हो गया।

केस नंबर दो

जिले की एक महिला का पति सेना में है और बाहर रहता है। महिला अपने ससुराल में रहती थी। उसने ससुराल वालों पर परेशान करने और घर से निकालने का आरोप लगाया। पति के घर नहीं आ पाने के कारण पति-पत्नी के बीच भी मनमुटाव बढ़ गया था। दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग की गई जिसके बाद मामले का समाधान हो गया।




हमारे पास महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा के मामले आते हैं। सबसे पहले हम उनकी काउंसिलिंग कर मामले का समाधान करवाने का प्रयास करते हैं। अगर काउंसिलिंग से मामला नहीं सुलझता है तो कानूनी कार्रवाई के लिए थाने या कोर्ट भेज दिया जाता है।

- बबीता चौधरी, जिला संरक्षण अधिकारी, हिसार।
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