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यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों को सता रही पढ़ाई की चिंता, बोले अंक तालिका विश्वविद्यालय में जमा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 11:50 PM IST
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Students who returned from Ukraine are worried about their studies, said the marks table deposited in the university
हिसार। रूस-यूक्रेन जंग से बचकर वतन लौटे भारतीय विद्यार्थियों को अब अपनी पढ़ाई की चिंता सताते लगी है। विद्यार्थियों का कहना है कि वे किसी तरफ अपनी जान बचाकर तो आ गए, लेकिन अभी तक जंग जारी है। हमारे पास यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई कॉल नहीं आई है कि आगे क्या रहेगा। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की जाए।
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सिविल अस्पताल परिसर में रहने वाली और यूक्रेन के कीव शहर से लौटी खुशी ने बताया कि वह कीव की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही है। तीन माह पहले वहां पर दाखिला लिया था। जिस समय दाखिला लिया था उस समय यूनिवर्सिटी में अंक तालिका और अन्य कागजात जमा करवाए थे। अब रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। वहां पर काफी नुकसान हो रहा है। हम जैसे-तैसे कर वहां से जान बचाकर तो आ गए, लेकिन अब पढ़ाई की चिंता सता रही है। हमले के कारण हम हमारी किताबें भी नहीं लेकर आए क्योंकि उस समय यहीं था कि यहां से कैसे निकला जाए क्योंकि हॉस्टल के चारों तरफ बमबारी हो रही थी। अब अंक तालिका भी वहीं जमा है तो ऐसे में यहां पर भी किसी कॉलेज में एडमिशन नहीं ले सकते।
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यूक्रेन से लौटी अक्षिता, अंशुमन, सागर का कहना है कि उनकी पढ़ाई बीच में छूट गई है। अब हालात भी नहीं लग रहे कि यूक्रेन में जल्द पढ़ाई शुरू हो जाएगी। अगर, ऐसे ही हमले होते रहे तो यूनिवर्सिटी भी तबाह हो जाएगी। ऐसे में कई महीने लग जाएंगे। जिस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार को यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों की पढ़ाई के बारे में व्यवस्था करनी चाहिए।
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हिसार के विद्यार्थियों ने किया दूसरे बच्चों को मोटीवेट
यूक्रेन-रूस युद्घ के कारण खारकीव, कीव व ओडेसा शहर में फंसे हिसार के सभी छात्र अब खतरे से बाहर आ चुके हैं। हिसार के सीनियर छात्रों ने पोलैंड, रोमानिया व हंगरी बॉर्डर पर फंसे देश के जूनियर छात्रों को मोटीवेट किया। बॉर्डर पार करने की गाइडलाइन के बारे में जागरूक किया। बॉर्डर पार करने के लिए जूनियर छात्र एक-दूसरे के साथ बॉर्डर पर नाकों पर काफी जद्दोजहद कर रहे थे। इस कारण वहां की पुलिस व सैन्य कर्मियों को व्यवस्था बनाने में समस्या आ रही थी। तभी हिसार के सीनियर छात्र पहुंचे तो उन्होंने अपने देश के जूनियर छात्रों को समझाया। खारकीव से हिसार पहुंचीं फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी शिवांसी ने अपनी सहेलियों के साथ मिलकर अपने जूनियर सहपाठियों की मदद की। शिवांसी खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पांचवें वर्ष की छात्रा है। वहीं खारकीव से लौटे हिसार के पाबड़ा गांव के छात्र अमन ने रोमानिया बॉर्डर पर भारत के अन्य छात्रों को खाने-पीने का सामान मुहैया करवाया। अमन ने बताया कि उनके पास जो कुछ खाने का सामान था। वे उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बांटा।

बमबारी के बीच दो दिन से ट्रेन में करते रहे सफर
हिसार। यू्क्रेन के सूमी शहर से एमबीबीएस कर रहे बरवाला निवासी हरदीप श्योकंद ने बताया कि वहां का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। यहां के हालात बिगड़ने के बाद हॉस्टल को खाली करने की एडवाइजरी जारी की। उसके बाद यहां पर फंसे हुए सभी छात्र सूमी रेलवे स्टेशन पहुंचे। कुछ दूर तक पैदल चले उसके बाद वाहन का इंतजाम करने के बाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। अधिकतर बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। फाइटर जेट से हमले हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद काफी इंतजार करने के बाद पोलैंड के लिए ट्रेन मिली। सोमवार सुबह पोलैंड जाने के लिए रेलगाड़ी में सवार हुए थे। बमबारी के बीच दो दिन सफर के बाद बुधवार सुबह बार्डर पर पहुंचे। 5 दिन हमने खौफ के साये में बिताए।
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