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Hisar News: हिसार के डियर पार्क के ट्रीटमेंट सेंटर में होगी छह जिलों के बंदरों की नसबंदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Dec 2022 11:51 PM IST
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Sterilization of monkeys of six districts will be done in the treatment center of Deer Park of Hisar
हिसार। बंदरों की बढ़ रही संख्या को कंट्रोल करने के लिए वन्य प्राणी विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब डियर पार्क के ट्रीटमेंट सेंटर में हिसार सहित भिवानी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, चरखी दादरी के घायल बंदरों के उपचार से लेकर उनकी नसबंदी की जाएगी। डियर पार्क को एक्सटेंशन कर 20 से 25 एकड़ में बंदरों के लिए स्पेशल बाड़ा तैयार किया जाएगा। नसबंदी करने के कुछ समय तक बंदरों को इस बाड़े में रखा जाएगा। उसके बाद उन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा। वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ वेदप्रकाश का कहना है कि बाड़ें पर पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। दो से तीन दिन में सरकार के पास प्रपोजल भेजा जाएगा। फिर सरकार से अनुमति मिलने के बाद सेंट्रल जू-अथॉरिटी ऑफ इंडिया दिल्ली जाएगा।
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बता दें, कि डियर पार्क में टेंपरेरी ट्रीटमेंट सेंटर बना हुआ है। इसे अब स्थायी बनाया जाएगा। इसमें एक चिकित्सक, एक वीएलडीए की नियुक्ति की जाएगी। इस ट्रीटमेंट सेंटर में छोटे वन्य जीव से लेकर बड़े वन्य जीवों का इलाज हो सकेगा। ट्रीटमेंट सेंटर पर दो करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
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छह जिलों में 35 हजार से ज्यादा बंदर
डीएफओ वेदप्रकाश के अनुसार हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, जींद और चरखीदादरी में 35 हजार से ज्यादा बंदर हैं। ऐसे में इन पर कंट्रोल करना जरूरी है। यदि बंदरों की संख्या पर कंट्रोल नहीं हुआ तो पांच साल में बंदरों की संख्या 10 गुना बढ़ जाएगी। हिसार की बात करें तो सबसे ज्यादा सेक्टरों, नई अनाजमंडी, आजाद नगर सहित अन्य कॉलोनियों में बंदर हैं।
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युद्ध स्तर पर चलेगा बंदरों को पकड़ने का अभियान
वन्य प्राणी विभाग के अनुसार बंदरों को पकड़ने के लिए हिसार सहित छह जिलों में युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। बंदरों को पकड़कर उन्हें बाड़ें में रखा जाएगा। बाड़े में बंदरों को उनके हिसाब से ही वातावरण दिया जाएगा, ताकि बंदर अपने आपको कैद महसूस न करे। नसबंदी करने के बाद फिर बंदरों को जंगलों में छोड़ दिया जाएगा।
बंदरों से बचने के लिए खुद घरों में कैद हो रहे लोग
हिसार में भी बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। हालात यह है कि सेक्टरों में तो लोग बंदरों से अपना बचाव करने के लिए खुद घरों में कैद हो रहे हैं। बंदर न केवल घरों में नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि हमला भी कर रहे हैं। सेक्टरों में तो बंदरों की टोली छत पर बैठी रहती हैं। बंदरों से बचने के लिए सेक्टरवासियों ने अपने घरों में लोहे के जाल तक लगवाए हुए हैं।
शहर में वेटरनरी यूनिवर्सिटी होने के कारण टेंपरेरी ट्रीटमेंट सेंटर को स्थायी बनाया जाएगा। इसमें ऑपरेशन थियेटर की सुविधा होगी और बंदरों की नसबंदी से लेकर उनका उपचार किया जाएगा। हिसार में पांच हजार से ज्यादा बंदर हैं। ऐसे में नसबंदी करके ही इनकी संख्या पर कंट्रोल किया जा सकता है।

- वेदप्रकाश, डीएफओ, वन्य प्राणी विभाग
कुत्तों की नसबंदी का आज खुलेगा टेंडर
उधर नगर निगम की तरफ से शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर लगाया गया है। मंगलवार को टेंडर खोला जाएगा। निगम ने तीसरा दफा यह टेंडर लगाया था। पहली दो बार में आवेदन करने वाली एजेंसियों टेंडर की शर्तों को पूरा नहीं कर सकी थीं। इस बार निगम ने एक शर्त में थोड़ी छूट दी है। इसके अनुसार अगर आवेदन करने वाली एजेंसी के पास एनीमल वेलफेयर बोर्ड की एनओसी नहीं है तो उक्त एजेंसी टेंडर अलॉट होने के बाद यह एनओसी ले सकती है। टेंडर की शर्त के अनुसार एजेंसी को 5 हजार कुत्तों की नसबंदी करनी होगी। बता दें कि शहर में दिन प्रतिदिन कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है और ये शहरवासियों के परेशानी का कारण बने हुए हैं।
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