जो एसएचओ लगना चाहता है मुझे बताएं, जो हटना चाहता है वो भी बताए
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एसपी राजेंद्र मीणा ने पहली क्राइम मीटिंग में सभी थाना अध्यक्षों को सीधे और साफ शब्दों में कहा कि मुझे काम चाहिए। निकम्मों और निष्क्रिय का यहां कोई काम नहीं। भरी मीटिंग में उन्होंने साफ कह दिया कि जो एसएचओ हटना चाहता है वो हाथ उठा दे। इतना ही नहीं जो एसएचओ लगना चाहता है वो स्टाफ सदस्य भी हाथ उठा सकता है। एसपी मीणा की यह बात सुनकर सभी अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में इकोनॉमिक सेल में लगे सब इंस्पेक्टर छतरपाल ने तुरंत हाथ उठा दिया। एसपी राजेंद्र मीणा ने उसके तुरंत ऑर्डर भी कर दिए और कहा कि ठीक है आप थाना बास एसएचओ लगा दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिनकी काम करने की इच्छा नहीं है उन्हें एसएचओ रहने का भी कोई हक नहीं है। हम सुधार चाहते हैं। और वह तब होगा जब रिजल्ट दिखेगा।
वर्क डिस्ट्रीब्यूशन से होगा बोझ कम
पहली क्राइम मीटिंग में एसपी ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि थानों में कुछ स्टाफ पर अधिक बोझ रहता है और कुछ फरलो पर रहते हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। जिन कर्मचारियों पर अधिक बोझ है उनका काम बांटा जाएगा। कर्मचारियों को बराबर काम मिलेगा।
इनकी केस पेंडिंग अधिक
एसपी ने हांसी सिटी, हांसी सदर थाना, हिसार सिविल लाइन थाना व सदर थाना की अधिक परसेंटेज पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि इन थानों की पेंडिंग केस प्रतिशत अधिक है। डीजी के साफ निर्देश हैं कि अगर किसी थाना की परसेंटेज 15 प्रतिशत से अधिक है तो उस थाने की वर्किंग ठीक नहीं। एसपी ने साफ कहा कि मुझे 15 दिन के अंदर अंदर इसमें सुधार चाहिए।
ये है थानों की स्थिति
सिटी हांसी 28 प्रतिशत
सिविल लाइन हिसार 24 प्रतिशत
सदर हांसी 24 प्रतिशत
सदर हिसार 22 प्रतिशत
आदमपुर 21 प्रतिशत
इन थानों की वर्किंग लगभग ठीक
बरवाला थाना 16 प्रतिशत
महिला थाना 16 प्रतिशत
सिटी हिसार 17 प्रतिशत
नारनौंद थाना 17 प्रतिशत
बेस्ट वर्किंग
अग्रोहा 12 प्रतिशत
उकलाना 14 प्रतिशत
ऐसे समझे पेंडिंग प्रतिशतता
उदाहरण के तौर पर अगर किसी थाने में 100 मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनमें से 60 का निटपान (जांच पूरी, चालान पेश, गिरफ्तारी हो चुकी हो) हो चुका हो और 40 केसों में कोई न कोई काम बाकी हो यानी अंडर इनवेस्टिगेशन हो उसकी प्रतिशतता आंकी जाती है। यानी उस थाने में 40 प्रतिशत मामले अंडर इनवेस्टिगेशन हैं।