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Hisar News: हौसले के बल पर कराटे में मुस्कान ने हासिल किया मुकाम
Fri, 18 Aug 2023 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 18 Aug 2023 12:26 AM IST
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हिसार। कांस्य पदक व सर्टिफिकेट के साथ कराटे खिलाड़ी मुस्कान।
हिसार। विकास नगर की मुस्कान ने एक साल पहले कराटे से अपने कॅरिअर की शुरुआत की तो माता-पिता को रास नहीं आई। बावजूद उसने हौसला नहीं तोड़ा। माता-पिता की बात को अनसुना करते हुए उसने प्रैक्टिस शुरू कर दी। आज मुस्कान खुद प्रैक्टिस करने के साथ-साथ अन्य लड़कियों को भी कराटे की ट्रेनिंग देकर सशक्त बना रही हैं। 12 अगस्त को मुस्कान ने दिल्ली में आयोजित हुई ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है। पिता रोहताश मजदूरी करते हैं। माता सुनीता गृहिणी हैं। मुस्कान चार बहन व एक भाई में सबसे बड़ी हैं।
मुस्कान बताती है कि आज के समय में लड़कियों के लिए कराटे सीखना बहुत जरूरी है। कराटे सीखकर वह आत्मरक्षा के गुर अपना सकती है। कराटे से जहां एक ओर आत्मविश्वास का निर्माण होता है, वहीं शारीरिक शक्ति बढ़ती है। कराटे लड़कियों में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान विकसित करने में काफी मदद करता है। चुनौतियों का सामना करने का साहस भी देता है। मुस्कान दसवीं कक्षा की छात्रा है।
शाम को खुद प्रैक्टिस तो सुबह स्कूल में सीखा रही आत्मरक्षा के गुर
मुस्कान शाम को खुद प्रैक्टिस करती है तो सुबह निजी स्कूल में लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाती है। इससे मिलने वाली राशि अपनी पढ़ाई पर खर्च करती है। वह सूरज कराटे प्लेनेट में कोच हरीश सिराधना के पास अभ्यास कर रही है। वह बताती है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मेरी पढ़ाई का खर्च भी मैं ही उठाती हूं, ताकि घर पर बोझ न पड़े। मुस्कान तीन बार जिलास्तरीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
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स्कूल में जीता था कांस्य पदक, यहीं से हुई शुरुआत
मुस्कान बताती है कि एक साल पहले जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जिलास्तर पर कराटे प्रतियोगिता करवाई गई। इस प्रतियोगिता में भी उसने कांस्य पदक जीता था। फिर यहीं से कराटे में कॅरिअर बनाने की शुरूआत हुई। हालांकि परिवार के सदस्यों ने कहा कि लड़कियां कराटे नहीं खेलती है। सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस कर आगे बढ़ो। मगर, मुस्कान का सपना था कि वह कराटे में अपना नाम चमकाए। इसके बाद मुस्कान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब परिवार के सदस्य ही मुस्कान को कराटे में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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मुस्कान बताती है कि आज के समय में लड़कियों के लिए कराटे सीखना बहुत जरूरी है। कराटे सीखकर वह आत्मरक्षा के गुर अपना सकती है। कराटे से जहां एक ओर आत्मविश्वास का निर्माण होता है, वहीं शारीरिक शक्ति बढ़ती है। कराटे लड़कियों में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान विकसित करने में काफी मदद करता है। चुनौतियों का सामना करने का साहस भी देता है। मुस्कान दसवीं कक्षा की छात्रा है।
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शाम को खुद प्रैक्टिस तो सुबह स्कूल में सीखा रही आत्मरक्षा के गुर
मुस्कान शाम को खुद प्रैक्टिस करती है तो सुबह निजी स्कूल में लड़कियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाती है। इससे मिलने वाली राशि अपनी पढ़ाई पर खर्च करती है। वह सूरज कराटे प्लेनेट में कोच हरीश सिराधना के पास अभ्यास कर रही है। वह बताती है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मेरी पढ़ाई का खर्च भी मैं ही उठाती हूं, ताकि घर पर बोझ न पड़े। मुस्कान तीन बार जिलास्तरीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
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स्कूल में जीता था कांस्य पदक, यहीं से हुई शुरुआत
मुस्कान बताती है कि एक साल पहले जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जिलास्तर पर कराटे प्रतियोगिता करवाई गई। इस प्रतियोगिता में भी उसने कांस्य पदक जीता था। फिर यहीं से कराटे में कॅरिअर बनाने की शुरूआत हुई। हालांकि परिवार के सदस्यों ने कहा कि लड़कियां कराटे नहीं खेलती है। सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस कर आगे बढ़ो। मगर, मुस्कान का सपना था कि वह कराटे में अपना नाम चमकाए। इसके बाद मुस्कान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब परिवार के सदस्य ही मुस्कान को कराटे में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।