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गर्मी दिखा रही तेवर : चिकित्सकों की सलाह, दोपहर 12 से 3 बजे तक घर से न निकलें
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हिसार। जिले में गर्मी अपने तेवर दिखा रही है। शहर का तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच घूम रहा है। ऐसे में जब आप घर से बाहर निकलें तो सोच समझ कर निकलें। वहीं, गर्मी में लगातार काम करने से आप हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं। नागरिक अस्पताल के फिजिशियन ने आमजन से अपील की है कि वे दोपहर 12 से 3 बजे तक घर से बाहर न निकलें, जरूरी काम हो तो ही घर से बाहर आए। बढ़ते तापमान में छोटे बच्चों का विशेषकर ध्यान रखें। दिन में 6 लीटर पानी जरूर पीएं।
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ये होता है हीट स्ट्रोक -
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन चिकित्सक अजय ने बताया कि जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक चला जाता है तो लू चलने लगती है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक अत्यधिक तापमान में लंबे समय तक रहने के कारण होता है और इसे तत्काल इलाज की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर के अंदर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। शरीर का तापमान जब 104 फार्नेहाइट से अधिक होता है तो इसे हीट स्ट्रोक का लक्षण माना जाता है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक आमतौर पर तब होता है जब शरीर में पानी और नमक की मात्रा कम हो जाती है और पसीना आना भी बंद हो जाता है। सामान्य लक्षणों में घबराहट, बेचैनी, दौरे, बेहोशी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। कभी-कभी इंसान कोमा में भी चला जाता है।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण -
- चक्कर आना और सिर घूमना।
- गर्मी के बावजूद पसीना न आना।
- शरीर की त्वचा लाल और गर्म होना।
- मांसपेशियों में कमजोरी आना।
- धड़कन का तेज होना और उल्टी आना।
- सांस लेने में तकलीफ होना, घबराहट और बेचैनी।
- बेहोशी की हालत।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें -
चिकित्सक अजय ने बताया कि हीट स्ट्रोक से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाएं। जब तक चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, उसे वहां पर बैठाए रखें जहां पर ठंड हो। उसे लगातार पानी पिलाते रहें। इनके अलावा सिर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखते रहें।
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गर्मी से बचने के उपाय -
फिजिशियन के अनुसार गर्मी से बचने के लिए दिन में 6 लीटर तक पानी पीना चाहिए। दिन में शिकंजी का इस्तेमाल करें। शरीर में नमक और पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। जब भी खेत में काम करें तो सिर पर कपड़ा जरूर बांधे। घर से बाहर निकलते समय छाते का इस्तेमाल करें। अगर, कोई बेहोश होता है तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं।
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ये होता है हीट स्ट्रोक -
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन चिकित्सक अजय ने बताया कि जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक चला जाता है तो लू चलने लगती है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक अत्यधिक तापमान में लंबे समय तक रहने के कारण होता है और इसे तत्काल इलाज की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर के अंदर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। शरीर का तापमान जब 104 फार्नेहाइट से अधिक होता है तो इसे हीट स्ट्रोक का लक्षण माना जाता है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक आमतौर पर तब होता है जब शरीर में पानी और नमक की मात्रा कम हो जाती है और पसीना आना भी बंद हो जाता है। सामान्य लक्षणों में घबराहट, बेचैनी, दौरे, बेहोशी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। कभी-कभी इंसान कोमा में भी चला जाता है।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण -
- चक्कर आना और सिर घूमना।
- गर्मी के बावजूद पसीना न आना।
- शरीर की त्वचा लाल और गर्म होना।
- मांसपेशियों में कमजोरी आना।
- धड़कन का तेज होना और उल्टी आना।
- सांस लेने में तकलीफ होना, घबराहट और बेचैनी।
- बेहोशी की हालत।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें -
चिकित्सक अजय ने बताया कि हीट स्ट्रोक से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाएं। जब तक चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, उसे वहां पर बैठाए रखें जहां पर ठंड हो। उसे लगातार पानी पिलाते रहें। इनके अलावा सिर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखते रहें।
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गर्मी से बचने के उपाय -
फिजिशियन के अनुसार गर्मी से बचने के लिए दिन में 6 लीटर तक पानी पीना चाहिए। दिन में शिकंजी का इस्तेमाल करें। शरीर में नमक और पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। जब भी खेत में काम करें तो सिर पर कपड़ा जरूर बांधे। घर से बाहर निकलते समय छाते का इस्तेमाल करें। अगर, कोई बेहोश होता है तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं।
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