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हिसार: प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी आपत्ति दर्ज करवाने के लिए अब सात कैटेगरी बनाईं
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हिसार। शहर स्थानीय निकाय विभाग (यूएलबी) का बंद पड़ा पोर्टल सोमवार को फिर शुरू हो गया। विभाग ने शहरवासियों व कर्मचारियों की सुविधा को देखते हुए पोर्टल में कई बदलाव किए हैं। पोर्टल पर प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी आपत्ति दर्ज करवाने के लिए सात कैटेगरी बनाई हैं। इनमें प्रॉपर्टी मालिक की जानकारी, मोबाइल नंबर, प्रॉपर्टी की जानकारी, प्रॉपर्टी टैक्स एवं अग्नि शुल्क, कचरा एकत्रित करने का शुल्क, प्रॉपर्टी अधिकृत स्थिति व विकास शुल्क और पानी व सीवर शुल्क शामिल है। इन्हीं कैटेगरी के तहत शहरवासी पोर्टल के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे।
अब जिस लिपिक के पास जिन कॉलोनियों का चार्ज है, उक्त लिपिक को अपने लॉगइन में उन कॉलोनियों से संबंधित फाइलें ही नजर आएंगी। इससे पहले तक किसी भी लिपिक को अपने लॉगइन में सभी कॉलोनियों की फाइलें मिलती थीं और उसे उनमें से अपनी कॉलोनियों की फाइलें ढूंढनी पड़ती थी, जिसमें काफी वक्त बर्बाद होता था। वहीं निगम अधिकारियों ने शहर की 219 कॉलोनियों को 20 लिपिकों में बांट दिया है। किसी लिपिक को कम तो किसी को ज्यादा कॉलोनियों का चार्ज दिया गया है।
वैध-अवैध क्षेत्र का फैसला मुख्यालय करेगा
अब वैध व अवैध क्षेत्र का फैसला मुख्यालय ही करेगा। यहां से इस कैटेगरी की फाइल मुख्यालय में ही जाएगी। इससे पहले निगमायुक्त के पास इस कैटेगरी की फाइल जाती थी। निगम अधिकारियों की मानें तो मुख्यालय को भी राइट टू सर्विस के तहत तय समय सीमा में फाइल का निपटान करना होगा। इसके अलावा अब उच्च अधिकारी अपने अधीन कर्मचारी को फाइल रिवर्ट कर सकेंगे। अभी तक फाइल रिवर्ट करने पर सीधे आवेदन करवाने वाले के पास ही जाती थी।
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अब जिस लिपिक के पास जिन कॉलोनियों का चार्ज है, उक्त लिपिक को अपने लॉगइन में उन कॉलोनियों से संबंधित फाइलें ही नजर आएंगी। इससे पहले तक किसी भी लिपिक को अपने लॉगइन में सभी कॉलोनियों की फाइलें मिलती थीं और उसे उनमें से अपनी कॉलोनियों की फाइलें ढूंढनी पड़ती थी, जिसमें काफी वक्त बर्बाद होता था। वहीं निगम अधिकारियों ने शहर की 219 कॉलोनियों को 20 लिपिकों में बांट दिया है। किसी लिपिक को कम तो किसी को ज्यादा कॉलोनियों का चार्ज दिया गया है।
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वैध-अवैध क्षेत्र का फैसला मुख्यालय करेगा
अब वैध व अवैध क्षेत्र का फैसला मुख्यालय ही करेगा। यहां से इस कैटेगरी की फाइल मुख्यालय में ही जाएगी। इससे पहले निगमायुक्त के पास इस कैटेगरी की फाइल जाती थी। निगम अधिकारियों की मानें तो मुख्यालय को भी राइट टू सर्विस के तहत तय समय सीमा में फाइल का निपटान करना होगा। इसके अलावा अब उच्च अधिकारी अपने अधीन कर्मचारी को फाइल रिवर्ट कर सकेंगे। अभी तक फाइल रिवर्ट करने पर सीधे आवेदन करवाने वाले के पास ही जाती थी।
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