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मां को धुएं से परेशान होते देख 9वीं के छात्र कार्निक ने बनाया धुआं रहित चूल्हा
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जीजेयू में आयोजित विज्ञान सर्वत्र पूज्यते कार्यक्रम में अपना मॉडल दिखाते छात्र कार्निक व हृदय।
- फोटो : Hisar
हिसार। द आर्यन स्कूल के 9वीं कक्षा के छात्र कार्निक सिंह ने अपनी मां को चूल्हे पर रोटी पकाते हुए धुएं से परेशान देखा तो धुआं रहित चूल्हा बनाने का आइडिया आया। इसके बाद उसने इसका मॉडल बनाया, जिसे बुधवार को जीजेयू में आयोजित प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर आयोजित विज्ञान सर्वत्र पूज्यते कार्यक्रम के दूसरे दिन कैंपस, स्कूल व कॉलेजों के 470 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने जीवन में विज्ञान की भूमिका पर मॉडल प्रदर्शित किए। छात्राओं ने आकर्षक रंगोली बनाई।
कार्निक ने अपने इस मॉडल पर सिर्फ 200 रुपये खर्च किए व अपनी मां को धुएं की परेशानी से बचा लिया।
कार्निक सिंह ने बताया कि घर की वेस्ट चीजों से उसने यह मॉडल बनाया है। मॉडल का यूज भी घर में ही किया है। अगर बड़े स्तर पर इस मॉडल को विकसित किया जाएगा तो ये मॉडल ईंट भट्ठों, कच्चा कोयला बनाने वाले छोटे उद्योगों में कारगर साबित हो सकता है। अब मेरी मां रोटी पकाते समय धुएं से परेशान नहीं होती। जीजेयू के कुलपति ने प्रो. बीआर कांबोज ने कार्निक के इस मॉडल की सराहना भी की। मॉडल बनाने में दी आर्यन स्कूल के ही चौथी कक्षा के छात्र हृदय ने कार्निक सिंह की मदद की है। कार्निक व हृदय दोनों दोस्त हैं।
प्रदर्शनी में राजकीय महाविद्यालय आदमपुर के विद्यार्थियों ने फोटोट्रोपिक, फोटोफोबिक एवं ऑब्सट्रक्शन फोबिक रोबोट प्रस्तुत किए। ओपीजेएमएस की टीम ने स्वास्थ्य निगरानी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और इसके उपयोग को प्रस्तुत किया। सीआरएम जाट कॉलेज के विद्यार्थियों ने बायोएथेनॉल उत्पादन, पूर्व-प्रबंधन पर कार्य मॉडल प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने बायो एंड नेनो टेक्नोलॉजी विभाग की विज्ञान प्रयोगशालाओं का दौरा किया। प्रतिभागियों के लिए सभागार में ‘रामायण की कहानी विज्ञान की जुबानी’ नामक फिल्म चलाई गई।
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आधुनिक खोज, आविष्कार वैदिक ज्ञान साहित्य पर आधारित : प्रो. कांबोज
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज व कुलसचिव प्रो. अवनीश वर्मा ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।इंस्टीट्यूट ऑफ साईंटिफिक रिसर्च ऑन वेदाज, नई दिल्ली की पूर्व निदेशक सरोज बाला ने वेद और आधुनिक विज्ञान के संबंध पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे भारतीयों ने प्रारंभिक भारतीय शास्त्रों, विशेष रूप से वेदों में पाए जाने वाले प्राचीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण की खोज की है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक वैदिक विज्ञान कहते हैं। कुलपति ने कहा कि यह प्रामाणिक है कि आधुनिक खोज, आविष्कार, सिद्धांत, अवधारणाएं व्यापक रूप से वैदिक ज्ञान साहित्य पर आधारित हैं। कुलसचिव प्रो. अवनीश वर्मा ने बताया कि प्रतिभागियों ने विज्ञान के विचारों, घटनाओं और प्रक्रियाओं की कल्पना शानदार ढंग से की है।
कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक प्रो. विनोद छोकर ने बताया कि स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग, रंगोली मेकिंग और मॉडल और प्रोजेक्ट प्रस्तुति की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें विभिन्न संस्थानों की 73 टीमों ने भाग लिया। स्लोगन राइटिंग में 24 विद्यार्थियों, पोस्टर मेकिंग में 31 विद्यार्थियों व रंगोली बनाओ प्रतियोगिता में 18 टीमों ने भाग लिया। सभी प्रतियोगिताओं का परिणाम 28 फरवरी को समापन समारोह घोषित किया जाएगा।
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कार्निक ने अपने इस मॉडल पर सिर्फ 200 रुपये खर्च किए व अपनी मां को धुएं की परेशानी से बचा लिया।
कार्निक सिंह ने बताया कि घर की वेस्ट चीजों से उसने यह मॉडल बनाया है। मॉडल का यूज भी घर में ही किया है। अगर बड़े स्तर पर इस मॉडल को विकसित किया जाएगा तो ये मॉडल ईंट भट्ठों, कच्चा कोयला बनाने वाले छोटे उद्योगों में कारगर साबित हो सकता है। अब मेरी मां रोटी पकाते समय धुएं से परेशान नहीं होती। जीजेयू के कुलपति ने प्रो. बीआर कांबोज ने कार्निक के इस मॉडल की सराहना भी की। मॉडल बनाने में दी आर्यन स्कूल के ही चौथी कक्षा के छात्र हृदय ने कार्निक सिंह की मदद की है। कार्निक व हृदय दोनों दोस्त हैं।
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प्रदर्शनी में राजकीय महाविद्यालय आदमपुर के विद्यार्थियों ने फोटोट्रोपिक, फोटोफोबिक एवं ऑब्सट्रक्शन फोबिक रोबोट प्रस्तुत किए। ओपीजेएमएस की टीम ने स्वास्थ्य निगरानी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और इसके उपयोग को प्रस्तुत किया। सीआरएम जाट कॉलेज के विद्यार्थियों ने बायोएथेनॉल उत्पादन, पूर्व-प्रबंधन पर कार्य मॉडल प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने बायो एंड नेनो टेक्नोलॉजी विभाग की विज्ञान प्रयोगशालाओं का दौरा किया। प्रतिभागियों के लिए सभागार में ‘रामायण की कहानी विज्ञान की जुबानी’ नामक फिल्म चलाई गई।
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आधुनिक खोज, आविष्कार वैदिक ज्ञान साहित्य पर आधारित : प्रो. कांबोज
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज व कुलसचिव प्रो. अवनीश वर्मा ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।इंस्टीट्यूट ऑफ साईंटिफिक रिसर्च ऑन वेदाज, नई दिल्ली की पूर्व निदेशक सरोज बाला ने वेद और आधुनिक विज्ञान के संबंध पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे भारतीयों ने प्रारंभिक भारतीय शास्त्रों, विशेष रूप से वेदों में पाए जाने वाले प्राचीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण की खोज की है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक वैदिक विज्ञान कहते हैं। कुलपति ने कहा कि यह प्रामाणिक है कि आधुनिक खोज, आविष्कार, सिद्धांत, अवधारणाएं व्यापक रूप से वैदिक ज्ञान साहित्य पर आधारित हैं। कुलसचिव प्रो. अवनीश वर्मा ने बताया कि प्रतिभागियों ने विज्ञान के विचारों, घटनाओं और प्रक्रियाओं की कल्पना शानदार ढंग से की है।
कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक प्रो. विनोद छोकर ने बताया कि स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग, रंगोली मेकिंग और मॉडल और प्रोजेक्ट प्रस्तुति की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें विभिन्न संस्थानों की 73 टीमों ने भाग लिया। स्लोगन राइटिंग में 24 विद्यार्थियों, पोस्टर मेकिंग में 31 विद्यार्थियों व रंगोली बनाओ प्रतियोगिता में 18 टीमों ने भाग लिया। सभी प्रतियोगिताओं का परिणाम 28 फरवरी को समापन समारोह घोषित किया जाएगा।