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दलित की बेटी के फेरे करने से इनकार
amarujala/Hisar
Updated Thu, 27 Apr 2017 11:55 PM IST
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बिडमड़ा गांव में पंडितों ने दलित परिवार की बेटी के फेरे कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दलित परिवार ने बौद्ध धर्म के तरीके से लड़की की शादी कराई। गांव की रविदास सभा ने फैसला लिया कि आगे भी बौद्ध धर्म के तरीके से शादी कराएंगे।
गांव बिडमड़ा में 24 अप्रैल को दलित परिवार के मूर्ताराम की बेटी की शादी थी। परिवार ने पंडितों से संपर्क किया तो एक पंडित ने शादी कराने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि मैं थका होने के कारण शादी नहीं करा सकता। दूसरे पंडित ने कहा कि मेरे पास काफी काम हैं। तीसरे ने कहा कि मैंने शादी कराई तो समाज के लोग मुझे जीने नहीं देंगे। लड़की की शादी को लेकर परिवार के लोगों के सामने संकट आ गया, जिसके बाद परिवार के लोगों ने फैसला लिया कि बौद्ध धर्म के तरीके से शादी कराएंगे। भीमराव अंबेडकर और गौतम बुद्ध की प्रतिमा रखकर कैंडल जलाई। इसके सामने दूल्हा-दुल्हन को बैठाया गया। दोनों ने एक-दूसरे के प्रति वचन लेकर शादी की रस्म को पूरा किया। गुरु रविवाद सभा के प्रधान जयभगवान चौहान ने बताया कि 400 के करीब परिवार हैं। इनमें चार सेलवाल, सोड, दहिया, चौहान गौत्र के परिवार हैं। गांव के दलित परिवारों ने फैसला लिया कि जहां तक होंगे, बौद्ध धर्म तरीके से कराएंगे शादी। जयभगवान चौहान ने अपने फेसबुक पर इस खबर को पोस्ट किया है। बताया जा रहा है कि सरपंच के चुनाव के समय से लेकर गांव में जातीय तनाव है।
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गांव बिडमड़ा में 24 अप्रैल को दलित परिवार के मूर्ताराम की बेटी की शादी थी। परिवार ने पंडितों से संपर्क किया तो एक पंडित ने शादी कराने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि मैं थका होने के कारण शादी नहीं करा सकता। दूसरे पंडित ने कहा कि मेरे पास काफी काम हैं। तीसरे ने कहा कि मैंने शादी कराई तो समाज के लोग मुझे जीने नहीं देंगे। लड़की की शादी को लेकर परिवार के लोगों के सामने संकट आ गया, जिसके बाद परिवार के लोगों ने फैसला लिया कि बौद्ध धर्म के तरीके से शादी कराएंगे। भीमराव अंबेडकर और गौतम बुद्ध की प्रतिमा रखकर कैंडल जलाई। इसके सामने दूल्हा-दुल्हन को बैठाया गया। दोनों ने एक-दूसरे के प्रति वचन लेकर शादी की रस्म को पूरा किया। गुरु रविवाद सभा के प्रधान जयभगवान चौहान ने बताया कि 400 के करीब परिवार हैं। इनमें चार सेलवाल, सोड, दहिया, चौहान गौत्र के परिवार हैं। गांव के दलित परिवारों ने फैसला लिया कि जहां तक होंगे, बौद्ध धर्म तरीके से कराएंगे शादी। जयभगवान चौहान ने अपने फेसबुक पर इस खबर को पोस्ट किया है। बताया जा रहा है कि सरपंच के चुनाव के समय से लेकर गांव में जातीय तनाव है।
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