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काली देवी रोड के निर्माण में हुई धांधली, शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने ठेकेदार से 1.70 करोड़ रुपये की रिकवरी के दिए आदेश
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हांसी। काली देवी रोड के निर्माण में धांधली हुई है। यही नहीं इस मामले में ठेकेदार से 1.70 करोड़ रुपये की रिकवरी करने के भी आदेश जारी किए गए है। शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने शहरवासी प्रवीन तायल व सीमांत चौधरी की तरफ से हाईकोर्ट में दायर की गई अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस कार्रवाई के बारे में अवगत करवाया। निदेशालय ने कोर्ट को बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है और इस मामले में कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने निदेशालय को एक माह में कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
बता दें कि पूर्व पार्षद प्रतिनिधि सीमांत चौधरी ने यह मामला उठाया। सैंपल लेकर दिल्ली की लैब से जांच कराई। सैंपल फेल आने के बाद उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। जांच के लिए विभाग की तरफ से कमेटी का गठन कर सैंपल लिए गए, जो सरकारी लैब में भी फेल आए। सैंपल फेल होने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और न किसी तरह की कार्रवाई हुई तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
यह है पूरा मामला
शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में प्रवीन तायल व सीमांत चौधरी ने बताया कि काली देवी सड़क मार्ग की परतें उसके निर्माण के चंद दिनों बाद ही उखड़ने लगी थी। उस सड़क की क्वालिटी तीन बार सैंपल जांच के बाद भी सरकारी सिस्टम तय नहीं कर पाया था। चौथी बार सड़क के सैंपल सरकारी लैब में जांच करवाने के लिए पहुंचाए गए थे, जबकि सरकारी लैब पहले ही दो दफा सैंपलों पर क्वालिटी दुरुस्त होने की मुहर लगा चुकी थी। पूर्व पार्षद प्रतिनिधि सीमांत चौधरी ने इस मामले में आवाज उठाई तो इंक्वायरी बैठ गई थी। तीन एक्सईएन व एक एसओ की टीम ने सैंपल लेकर जांच की, लेकिन इस जांच में भी सैंपल पास हो गए थे और एसडीएम ने 13 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट डीसी को भेज दी थी। मगर शिकायतकर्ता ने सैंपल जांच पर ही सवाल उठा दिए और नगर निगम आयुक्त के पास फिर से जांच करने के लिए अर्जी लगा दी। फिर से संयुक्त आयुक्त बेलिना की देखरेख में सैंपल लिए गए और श्रीराम लैब से सड़क के सैंपलों की जांच हुई, जिसमें सैंपल गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
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रोड निर्माण में सीमेंट व क्रशर नहीं डाली गई पूरी मात्रा
सीमांत चौधरी का कहना है कि निर्माण के दौरान सीमेंट व क्रेशर की मात्रा पूरी नहीं डाली गई। उन्होंने दोनों रोड, डिवाइडर, बैंच व एलईडी स्ट्रीट लाइट की शिकायत की। उन्होंने डिवाइडर व बैंच घटिया क्वालिटी के होन व घटिया एलईडी स्ट्रीट लाइट के आरोप भी लगाए थे। तब शिकायत में कहा गया कि काली देवी मंदिर रोड इतने वर्षों के बाद बना है, फिर भी इसमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों को शिकायत की थी। मगर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने शहरी एवं स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज को शिकायत दी। उन्हें निर्माण से संबंधित वीडियो भी पेश करे। इस पर उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच डीसी के पास गई। डीसी ने नगर निगम आयुक्त को जांच सौंप दी।
5 करोड़ में हुआ रोड का निर्माण
काली देवी रोड का एस्टीमेट 2 करोड़ 99 लाख रुपये का था। अब इसका निर्माण 5 करोड़ रुपये में किया गया। बाद में इसका एस्टीमेट बनाया गया। अभी तक इस रोड का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। विश्वकर्मा चौक से क्रांतिमान चौक तक का निर्माण कार्य लंबित है। क्रांति चौक से हाईवे तक के रोड का एस्टीमेट पहले 1 करोड़ 67 लाख रुपये का था। अब 4 करोड़ 60 लाख रुपये का कर दिया गया। परिषद का तर्क है कि इस एस्टीमेट में डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट व अन्य कई कार्य जोड़े गए हैं।
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बता दें कि पूर्व पार्षद प्रतिनिधि सीमांत चौधरी ने यह मामला उठाया। सैंपल लेकर दिल्ली की लैब से जांच कराई। सैंपल फेल आने के बाद उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई। जांच के लिए विभाग की तरफ से कमेटी का गठन कर सैंपल लिए गए, जो सरकारी लैब में भी फेल आए। सैंपल फेल होने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और न किसी तरह की कार्रवाई हुई तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
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यह है पूरा मामला
शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में प्रवीन तायल व सीमांत चौधरी ने बताया कि काली देवी सड़क मार्ग की परतें उसके निर्माण के चंद दिनों बाद ही उखड़ने लगी थी। उस सड़क की क्वालिटी तीन बार सैंपल जांच के बाद भी सरकारी सिस्टम तय नहीं कर पाया था। चौथी बार सड़क के सैंपल सरकारी लैब में जांच करवाने के लिए पहुंचाए गए थे, जबकि सरकारी लैब पहले ही दो दफा सैंपलों पर क्वालिटी दुरुस्त होने की मुहर लगा चुकी थी। पूर्व पार्षद प्रतिनिधि सीमांत चौधरी ने इस मामले में आवाज उठाई तो इंक्वायरी बैठ गई थी। तीन एक्सईएन व एक एसओ की टीम ने सैंपल लेकर जांच की, लेकिन इस जांच में भी सैंपल पास हो गए थे और एसडीएम ने 13 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट डीसी को भेज दी थी। मगर शिकायतकर्ता ने सैंपल जांच पर ही सवाल उठा दिए और नगर निगम आयुक्त के पास फिर से जांच करने के लिए अर्जी लगा दी। फिर से संयुक्त आयुक्त बेलिना की देखरेख में सैंपल लिए गए और श्रीराम लैब से सड़क के सैंपलों की जांच हुई, जिसमें सैंपल गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
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रोड निर्माण में सीमेंट व क्रशर नहीं डाली गई पूरी मात्रा
सीमांत चौधरी का कहना है कि निर्माण के दौरान सीमेंट व क्रेशर की मात्रा पूरी नहीं डाली गई। उन्होंने दोनों रोड, डिवाइडर, बैंच व एलईडी स्ट्रीट लाइट की शिकायत की। उन्होंने डिवाइडर व बैंच घटिया क्वालिटी के होन व घटिया एलईडी स्ट्रीट लाइट के आरोप भी लगाए थे। तब शिकायत में कहा गया कि काली देवी मंदिर रोड इतने वर्षों के बाद बना है, फिर भी इसमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों को शिकायत की थी। मगर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने शहरी एवं स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज को शिकायत दी। उन्हें निर्माण से संबंधित वीडियो भी पेश करे। इस पर उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच डीसी के पास गई। डीसी ने नगर निगम आयुक्त को जांच सौंप दी।
5 करोड़ में हुआ रोड का निर्माण
काली देवी रोड का एस्टीमेट 2 करोड़ 99 लाख रुपये का था। अब इसका निर्माण 5 करोड़ रुपये में किया गया। बाद में इसका एस्टीमेट बनाया गया। अभी तक इस रोड का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। विश्वकर्मा चौक से क्रांतिमान चौक तक का निर्माण कार्य लंबित है। क्रांति चौक से हाईवे तक के रोड का एस्टीमेट पहले 1 करोड़ 67 लाख रुपये का था। अब 4 करोड़ 60 लाख रुपये का कर दिया गया। परिषद का तर्क है कि इस एस्टीमेट में डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट व अन्य कई कार्य जोड़े गए हैं।