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Hisar News: थानों से मिली दुत्कार, अदालत ने सुनी गुहार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:02 AM IST
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Rebuffed by police stations, the court heeded the plea.
हिसार। आम व्यक्ति को सुलभ न्याय दिलाना पुलिस महकमे की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन अधिकतर मामलों में लोगों को पुलिस की बेरुखी का सामना करना पड़ता है। आपराधिक मामलों की संख्या कम दिखाना, जांच के झंझट से पीछा छुड़ाना या आरोपी पक्ष का दबाव। ये कुछ कारण हैं जिनकी वजह से पुलिस पीडि़तों से चक्कर कटवाती है। थक-हारकर पीडि़त कोर्ट का रुख करता है। जिले में हर माह ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जब आम व्यक्ति को न्यायालय में जाकर फरियाद करनी पड़ी और इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।
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केस एक
हिसार के कृष्णा नगर निवासी संदीप जोरावर से जमीन के सौदे में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो पीड़ित ने कोर्ट में याचिका दायर की। आखिर कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। पीड़ित के मुताबिक, आरोपी जतिंदर सिंह ने 8 जुलाई 2024 को उनसे संपर्क किया और दावा किया कि उसने एक समझौते के तहत कृषि भूमि में महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त किए हैं। इस दावे के आधार पर शिकायतकर्ता ने जतिंदर सिंह को दो किस्तों में 90 लाख रुपये नकद दिए। समझौते के अनुसार, बिक्री विलेख निष्पादित करने की अंतिम तिथि 7 नवंबर 2025 थी। इससे पहले ही जतिंदर सिंह ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि प्रेम चंद सौदे से पीछे हट गया है। जतिंदर सिंह ने 3 दिसंबर 2025 को 90 लाख रुपये का एक चेक जारी किया जो बाद में फंड अपर्याप्त होने के कारण दो बार बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने जांच में निष्क्रियता दिखाई और एफआईआर दर्ज नहीं की।
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केस दो

हांसी निवासी दर्शन कुमार खुराना ने आरोप लगाया कि 27 जून 2024 को वह अपनी पत्नी, पुत्रवधू और बच्चों के साथ वाहन से गुरुग्राम जा रहे थे। गीता चौक के पास दो व्यक्तियों ने कथित तौर पर अपनी गाड़ी उनके वाहन के आगे लगाकर रास्ता रोक लिया। एक आरोपी ने उससे जबरन गाड़ी की चाबी ले ली और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद दर्शन ने अगस्त 2024 से लेकर वर्ष 2025 तक एसएचओ, एसपी, आईजी, सीएम विंडो और डीजीपी स्तर तक शिकायतें दीं लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। मामला न्यायालय पहुंचने पर अदालत ने थाना शहर हांसी के एसएचओ को शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
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केस तीन

हांसी निवासी देवीदयाल के साथ हाउसिंग बोर्ड के पास कस्टोडियन कॉलोनी में 160 गज के प्लॉट को लेकर धोखाधड़ी की गई। इसके मालिक शिवकुमार ने 1991 में खुली बोली में प्लॉट खरीदा था। शिवकुमार की वर्ष 2003 में मौत हो गई और परिवार अन्य जगह शिफ्ट हो गया। देवीदयाल ने आरोप लगाया कि मुलतान कॉलोनी निवासी शौकिन ने अधिकारियों की मिलीभगत से प्लॉट हड़प लिया। आरोप था कि शौकिन और साथियों ने 22 दिसंबर 2020 से 22 फरवरी 2021 के बीच एक व्यक्ति डडल पार्क निवासी महावीर को शिवकुमार बताकर धोखाधड़ी से रजिस्ट्री करवाई। पुलिस की तरफ से सुनवाई न करने के बाद पीड़ित कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की ।

केस नंबर 4

बैंक कर्मियों ने सेना के एक जवान से करीब 15.97 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। पीड़ित प्राथमिकी दर्ज करवाने थाने में पहुंचा लेकिन निराशा हाथ लगी। इस पर झज्जर जिले के गांव सासरोली निवासी सैनिक रणजीत ने जेएमआईसी आयुष की अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर सिटी थाना पुलिस ने 20 नवंबर 2025 को झज्जर के जटवाना निवासी परविंद्र और इंडसलैंड बैंक, रेड स्क्वेयर मार्केट हिसार के कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

सिविल केस में पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती

हिसार के पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि एग्रीमेंट, खरीद- फरोखत, पैसों के लेनदेन, पारिवारिक मतभेद, प्रापर्टी विवाद से जुड़े मामलों में अगर धोखाधड़ी नहीं है तो यह क्रिमिनल केस नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश है कि सिविल विवाद को आपराधिक केस बनाना कानून का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों का फैसला केवल सिविल कोर्ट करेगी। मजिस्ट्रेट की अथाॅरिटी है कि वे चाहे तो केस दर्ज करने के आदेश दे सकते हैं। यह भी देखना चाहिए कि मजिस्ट्रेट के निर्देश पर जो एफआईआर दर्ज की गई है उनका निष्कर्ष क्या रहा। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार सिविल केस में जांच की जाती है। सिविल केस हो तो जांच अधिकारी जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए केस फाइल कर देते हैं।
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