{"_id":"5926f0544f1c1b675d5365e4","slug":"real-case-sting-cd-is-original","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकली चोट-असली केस में स्टिंग की सीडी मिली असली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकली चोट-असली केस में स्टिंग की सीडी मिली असली
amarujala/Hisar
Updated Fri, 26 May 2017 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नकली चोट-असली केस प्रकरण के दूसरे मुकदमे में सीएफएसएल रिपोर्ट वीरवार को एडीजे डीआर चालिया की कोर्ट में पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि सीडी में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं की गई है। इस मुकदमे में मेट्रो अस्पताल संचालक डॉ. संजय वर्मा समेत तीन आरोपी हैं।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में 23 मार्च 2010 को केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता वकील हरदीप सिंह ने गुप्त कैमरे से पुलिस की रेड की सीडी बना ली थी। पुलिस ने दो युवक काबू कर उनसे 50 हजार रुपये बरामद किए थे। हरदीप सिंह ने पुलिस को सीडी सौंपी थी। पुलिस ने उसे फोरेंसिक जांच के लिए मधुबन एफएसएल भेजा था, लेकिन वहां से सीडी यह कहते हुए लौटा दी थी कि समय का अभाव है और यहां ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कोर्ट में दरख्वास्त लगाई थी। अदालत ने पुलिस को सीडी की जांच कराने का आदेश दिया था। फिर पुलिस ने 7 नवंबर 2016 को सीडी, पेन ड्राइव, गुप्त कैमरा फोरेंसिक जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेजे थे। सीएफएसएल ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि सीडी में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं की गई है। यह रिपोर्ट वीरवार को कोर्ट में पेश कर दी गई। कोर्ट ने चंडीगढ़ सीएफएसएल डायरेक्टर डीपी गंगवार और तत्कालीन डीएसपी इंद्र सिंह कुंडू को गवाह के तौर पर तलब करते हुए तीन जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
वकील फंसे तो स्टिंग कर पर्दाफाश करने का लिया फैसला
सिवानी थाना पुलिस ने 15 दिसंबर 2009 को वकील हरदीप सिंह, भाई पवन, महिपाल, पिता ओमप्रकाश समेत सात लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास का झूठा केस दर्ज किया था। हत्या प्रयास का केस दर्ज होने का पता चलने पर वकील दंग रह गए थे। वकील का भाई पवन कुमार गुरेरा गांव में बंद पड़ी एक तेल फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात था। वहां कुछ लोग आए थे और कहासुनी के बाद चले गए थे। उन्हीं लोगों ने डॉक्टर से साज-बाज होकर एक आदमी को नकली चोट मरवाकर हरदीप वगैराह पर केस दर्ज कराया था। तब वकील ने स्टिंग कर पर्दाफाश करने की ठानी थी।
विज्ञापन
डेढ़ लाख में सौदा कर 50 हजार लेते फंसे थे दो
धानौठी के वकील हरदीप सिंह 23 मार्च 2010 को अपने भाई पवन के साथ मेट्रो अस्पताल के सामने पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल कर्मचारी बलविंद्र सिंह से संपर्क किया था। आरोप है कि बलविंद्र और एएमसी अस्पताल के कर्मी कुलदीप ने उनसे हत्या प्रयास के केस की नकली चोट मारने का सौदा डेढ़ लाख रुपये में किया था। उन्होंने कहा था हमें तुम्हारे एक आदमी की कनपटी पर नकली चोट मारनी होगी। जख्म कुछ दिन में भर जाएगा और उस आदमी को कोई नुकसान नहीं होगा। दोनों कर्मी हरदीप और उसके भाई को फ्लेमिंगो मार्केट के पास ले गए थे और 50 हजार रुपये गिनने लगे थे। पुलिस की टीम ने इशारा मिलते ही छापा मारकर बलविंद्र और कुलदीप को नकदी समेत गिरफ्तार किया था।
बुढ़ाखेड़ा का बुजुर्ग नहीं पकड़ा गया
हरदीप ने कहा था कि रंगे हाथों पकड़े गए दोनों कर्मियों ने रेड से पहले बताया था कि हमने कल बुढ़ाखेड़ा के एक बुजुर्ग को ऐसी ही नकली चोट मारी थी। आपके भाई को भी उसी तरह चोट मार देंगे। रेड सफल होने के बाद वकील ने पुलिस से बुढ़ाखेड़ा के व्यक्ति को भी गिरफ्तार करने की मांग की थी। उसके पकड़ने से एक और फर्जी केस का खुलासा हो सकता था, लेकिन पुलिस उसे आज तक नहीं पकड़ पाई।
ऐसे केस में एक डॉक्टर समेत दो को हो चुकी सजा
कोर्ट नकली चोट-असली केस प्रकरण के एक अन्य केस में सिविल अस्पताल के डॉ. भूपसिंह खत्री और राजस्थान के गांव दुमकी के जयबीर को 10-10 साल की कैद की सजा सुना चुकी है। दूसरी पार्टी ने दुमकी के जयबीर को सिविल अस्पताल में कनपटी पर नकली चोट मरवाकर वकील हरदीप वगैराह को हत्या प्रयास के झूठे केस में उलझा दिया था, लेकिन स्टिंग कर केस दर्ज कराने के बाद वकील पर दर्ज केस सिवानी थाना पुलिस ने खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में 23 मार्च 2010 को केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता वकील हरदीप सिंह ने गुप्त कैमरे से पुलिस की रेड की सीडी बना ली थी। पुलिस ने दो युवक काबू कर उनसे 50 हजार रुपये बरामद किए थे। हरदीप सिंह ने पुलिस को सीडी सौंपी थी। पुलिस ने उसे फोरेंसिक जांच के लिए मधुबन एफएसएल भेजा था, लेकिन वहां से सीडी यह कहते हुए लौटा दी थी कि समय का अभाव है और यहां ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कोर्ट में दरख्वास्त लगाई थी। अदालत ने पुलिस को सीडी की जांच कराने का आदेश दिया था। फिर पुलिस ने 7 नवंबर 2016 को सीडी, पेन ड्राइव, गुप्त कैमरा फोरेंसिक जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेजे थे। सीएफएसएल ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि सीडी में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं की गई है। यह रिपोर्ट वीरवार को कोर्ट में पेश कर दी गई। कोर्ट ने चंडीगढ़ सीएफएसएल डायरेक्टर डीपी गंगवार और तत्कालीन डीएसपी इंद्र सिंह कुंडू को गवाह के तौर पर तलब करते हुए तीन जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
विज्ञापन
वकील फंसे तो स्टिंग कर पर्दाफाश करने का लिया फैसला
सिवानी थाना पुलिस ने 15 दिसंबर 2009 को वकील हरदीप सिंह, भाई पवन, महिपाल, पिता ओमप्रकाश समेत सात लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास का झूठा केस दर्ज किया था। हत्या प्रयास का केस दर्ज होने का पता चलने पर वकील दंग रह गए थे। वकील का भाई पवन कुमार गुरेरा गांव में बंद पड़ी एक तेल फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात था। वहां कुछ लोग आए थे और कहासुनी के बाद चले गए थे। उन्हीं लोगों ने डॉक्टर से साज-बाज होकर एक आदमी को नकली चोट मरवाकर हरदीप वगैराह पर केस दर्ज कराया था। तब वकील ने स्टिंग कर पर्दाफाश करने की ठानी थी।
विज्ञापन
डेढ़ लाख में सौदा कर 50 हजार लेते फंसे थे दो
धानौठी के वकील हरदीप सिंह 23 मार्च 2010 को अपने भाई पवन के साथ मेट्रो अस्पताल के सामने पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल कर्मचारी बलविंद्र सिंह से संपर्क किया था। आरोप है कि बलविंद्र और एएमसी अस्पताल के कर्मी कुलदीप ने उनसे हत्या प्रयास के केस की नकली चोट मारने का सौदा डेढ़ लाख रुपये में किया था। उन्होंने कहा था हमें तुम्हारे एक आदमी की कनपटी पर नकली चोट मारनी होगी। जख्म कुछ दिन में भर जाएगा और उस आदमी को कोई नुकसान नहीं होगा। दोनों कर्मी हरदीप और उसके भाई को फ्लेमिंगो मार्केट के पास ले गए थे और 50 हजार रुपये गिनने लगे थे। पुलिस की टीम ने इशारा मिलते ही छापा मारकर बलविंद्र और कुलदीप को नकदी समेत गिरफ्तार किया था।
बुढ़ाखेड़ा का बुजुर्ग नहीं पकड़ा गया
हरदीप ने कहा था कि रंगे हाथों पकड़े गए दोनों कर्मियों ने रेड से पहले बताया था कि हमने कल बुढ़ाखेड़ा के एक बुजुर्ग को ऐसी ही नकली चोट मारी थी। आपके भाई को भी उसी तरह चोट मार देंगे। रेड सफल होने के बाद वकील ने पुलिस से बुढ़ाखेड़ा के व्यक्ति को भी गिरफ्तार करने की मांग की थी। उसके पकड़ने से एक और फर्जी केस का खुलासा हो सकता था, लेकिन पुलिस उसे आज तक नहीं पकड़ पाई।
ऐसे केस में एक डॉक्टर समेत दो को हो चुकी सजा
कोर्ट नकली चोट-असली केस प्रकरण के एक अन्य केस में सिविल अस्पताल के डॉ. भूपसिंह खत्री और राजस्थान के गांव दुमकी के जयबीर को 10-10 साल की कैद की सजा सुना चुकी है। दूसरी पार्टी ने दुमकी के जयबीर को सिविल अस्पताल में कनपटी पर नकली चोट मरवाकर वकील हरदीप वगैराह को हत्या प्रयास के झूठे केस में उलझा दिया था, लेकिन स्टिंग कर केस दर्ज कराने के बाद वकील पर दर्ज केस सिवानी थाना पुलिस ने खारिज कर दिया था।