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घोड़ा फार्म के पास प्रस्तावित आरओबी प्रोजेक्ट 22 डिग्री के फेर में उलझा
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घोड़ा फार्म के पास साउथ बाईपास पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) प्रोजेक्ट 22 डिग्री के फेर में उलझकर रह गया है। स्थिति यह है कि पांच माह बाद भी आरओबी की जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) रेलवे को नहीं भेजी जा सकी है। इस कारण प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने की प्रक्रिया रुक गई है। जीएडी को रेलवे की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रोजेक्ट की डीएनआईटी (डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) तैयार हो सकेगी।
बता दें कि इस आरओबी के निर्माण में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की तरफ शिक्षण संस्थानों के लिए छोड़ी गई जमीन व 45 फुट की सड़क आ रही थी, जिस पर एचएसवीपी ने आपत्ति जताई थी। इसे देखते हुए बीएंडआर ने ड्राइंग में कुछ फेरबदल किए थे। इसके बाद एचएसवीपी मुख्यालय ने भी आरओबी निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी थी। इस वर्ष जुलाई में बीएंडआर को यह अनुमति मिली थी। इसके बाद बीएंडआर ने जीएडी बनवाकर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजी, मगर तभी से यह फाइल मुख्यालय में ही अटकी पड़ी है।
यह आ रही अड़चन : आरओबी के निर्माण से एचएसवीपी की जमीन व सड़क प्रभावित न हो, इसके लिए बीएंडआर ने आरओबी में 22 डिग्री का घुमाव दे दिया। अब मुख्यालय इसी बात पर आपत्ति जता रहा है कि क्या यह घुमाव सुरक्षित रहेगा। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह घुमाव पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। बस यहां गति सीमा 45 किलोमीटर प्रति घंटा का बोर्ड लगा दिया जाएगा। अधिकारियों का तर्क है कि इससे पहले ही इतने ही एंगल पर ओवरब्रिज बनाए गए हैं। अधिकारियों ने मुख्यालय की तरफ से लगाई गई आपत्ति का जवाब लिखकर भेज दिया है।
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यह रहेगी आगे की प्रक्रिया : बीएंडआर के मुख्यालय से जीएडी को मंजूरी मिलने के बाद इसे रेलवे को भेजा जाएगा। रेलवे की मंजूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट की डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (डीएनआईटी) तैयार की जाएगी। फिर टेंडर आमंत्रित किए गए जाएंगे। टेंडर अलॉटमेंट के बाद एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही एजेंसी निर्माण कार्य शुरू कर देगी।
साउथ बाईपास को किया जाना है रेलवे फाटक मुक्त
साउथ बाईपास पर वर्तमान में तीन रेलवे फाटक हैं और इसे रेलवे फाटक मुक्त किया जाना प्रस्तावित है ताकि वाहन किसी बाधा के दौड़ सके। इनमें से सेक्टर 16-17 स्थित रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण हो चुका है। वहीं सातरोड़ के पास स्थित रेलवे फाटक पर आरओबी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। साउथ बाईपास से प्रतिदिन करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। इस ओवरब्रिज के बनने के बनने से वाहन चालक बिना रुके गुजर सकेंगे।
मुख्यालय ने जीएडी पर कुछ आपत्ति लगाई है। उसका जवाब बनाकर भेज दिया गया है। - रजनीश कुमार, एक्सईएन, बीएंडआर
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बता दें कि इस आरओबी के निर्माण में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की तरफ शिक्षण संस्थानों के लिए छोड़ी गई जमीन व 45 फुट की सड़क आ रही थी, जिस पर एचएसवीपी ने आपत्ति जताई थी। इसे देखते हुए बीएंडआर ने ड्राइंग में कुछ फेरबदल किए थे। इसके बाद एचएसवीपी मुख्यालय ने भी आरओबी निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी थी। इस वर्ष जुलाई में बीएंडआर को यह अनुमति मिली थी। इसके बाद बीएंडआर ने जीएडी बनवाकर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजी, मगर तभी से यह फाइल मुख्यालय में ही अटकी पड़ी है।
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यह आ रही अड़चन : आरओबी के निर्माण से एचएसवीपी की जमीन व सड़क प्रभावित न हो, इसके लिए बीएंडआर ने आरओबी में 22 डिग्री का घुमाव दे दिया। अब मुख्यालय इसी बात पर आपत्ति जता रहा है कि क्या यह घुमाव सुरक्षित रहेगा। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यह घुमाव पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। बस यहां गति सीमा 45 किलोमीटर प्रति घंटा का बोर्ड लगा दिया जाएगा। अधिकारियों का तर्क है कि इससे पहले ही इतने ही एंगल पर ओवरब्रिज बनाए गए हैं। अधिकारियों ने मुख्यालय की तरफ से लगाई गई आपत्ति का जवाब लिखकर भेज दिया है।
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यह रहेगी आगे की प्रक्रिया : बीएंडआर के मुख्यालय से जीएडी को मंजूरी मिलने के बाद इसे रेलवे को भेजा जाएगा। रेलवे की मंजूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट की डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (डीएनआईटी) तैयार की जाएगी। फिर टेंडर आमंत्रित किए गए जाएंगे। टेंडर अलॉटमेंट के बाद एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही एजेंसी निर्माण कार्य शुरू कर देगी।
साउथ बाईपास को किया जाना है रेलवे फाटक मुक्त
साउथ बाईपास पर वर्तमान में तीन रेलवे फाटक हैं और इसे रेलवे फाटक मुक्त किया जाना प्रस्तावित है ताकि वाहन किसी बाधा के दौड़ सके। इनमें से सेक्टर 16-17 स्थित रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण हो चुका है। वहीं सातरोड़ के पास स्थित रेलवे फाटक पर आरओबी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। साउथ बाईपास से प्रतिदिन करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। इस ओवरब्रिज के बनने के बनने से वाहन चालक बिना रुके गुजर सकेंगे।
मुख्यालय ने जीएडी पर कुछ आपत्ति लगाई है। उसका जवाब बनाकर भेज दिया गया है। - रजनीश कुमार, एक्सईएन, बीएंडआर