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Hisar News: दमदार दीपिका... कोच साहब! मैच जीतेंगे...और हिसार की बिटिया के एकमात्र गोल के दम पर भारतीय टीम बनी चैंपियन
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हिसार। आखिरकार दीपिका सहरावत ने वह कर दिखाया, जिसका वादा उन्होंने अपने कोच आजाद मलिक से किया था। दीपिका ने फोन पर कहा था-कोच साहब! मैच जीतेंगे और जरूर जीतेंगे। फाइनल मुकाबले में हिसार की बिटिया के एकमात्र गोल के दम पर भारतीय हॉकी टीम एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की चैंपियन बनी। दमदार बेटी की सफलता पर माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। परिवार में खुशी का माहौल है। पड़ोसी और रिश्तेदार फोन कर बधाई दे रहे हैं। भावुक मां जगिता रुंधे गले से कहती हैं, बेटी ने दुनिया में नाम रोशन कर दिया। यह बड़े फख्र की बात है। गांव आएगी तो बेटी को चूरमा खिलाऊंगी।
राजगीर (बिहार) में हुई चैंपियनशिप में ड्रैग फ्लिकर दीपिका ने शानदार खेल दिखाया। बुधवार को चीन के साथ खेले गए मैच के 32वें मिनट में उन्होंने पेनल्टी कॉर्नर से 1 गोल दागा, जिसकी बदाैलत भारत चैंपियन बना। चीन की टीम कोई गोल नहीं कर सकी। दीपिका ने चैंपियनशिप में कुल 11 गोल किए। उन्हें बेस्ट स्कोरर और बेस्ट प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट चुना गया है। बीते वीरवार को थाइलैंड के साथ हुए मुकाबले में दीपिका ने पांच गोल दागे थे।
दीपिका सहरावत का पैतृक गांव भैंसरू खुर्द रोहतक जिले में पड़ता है, लेकिन उनका सारा बचपन हिसार में ही बीता है। उनके पिता जगदीश सहरावत ने 38 साल तक एचएयू यानी हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में बताैर लैब असिस्टेंट नाैकरी की थी। यहीं से वे सेवानिवृत्त हुए। सीनियर कोच आजाद मलिक ने बताया कि मंगलवार को उनकी बात दीपिका से हुई थी। दीपिका से मैंने पूछा था-कैसी तैयारी है। दीपिका ने पूरे आत्मविश्वास के साथ जोशीला जवाब दिया, कोच साहब! हम मैच जीतेंगे, पूरी तैयारी है। दीपिका को हॉकी की बारीकियां बताने वाले आजाद मलिक भी होनहार खिलाड़ी की कामयाबी पर बेहद खुश हैं। मलिक कहते हैं, एक कोच के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात क्या होगी कि उसका शागिर्द देश दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करे।
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सात साल की उम्र में दीपिका ने थामी थी हॉकी
जगदीश सहरावत ने फोन पर हुई बातचीत में कहा, बेटी ने हमारा सीना चाैड़ा कर दिया। आज भी याद है जब उसने जिद करके महज सात साल की उम्र में हॉकी थामी थी। ओलंपियन पूनम मलिक और सविता पूनिया को वह मैदान में खेलते देखती थी। उन्हीं से दीपिका को प्रेरणा मिली। मैंने उसे सीनियर कोच आजाद मलिक के हवाले कर दिया। दीपिका की लगन और कोच के कुशल मार्गदर्शन से आज उसने कामयाबी का झंडा गाड़ दिया। जगदीश कहते हैं कि उन्हें जो कुछ भी मिला वह हिसार से ही मिला। यहीं बच्चों की परवरिश हुई और वे सफल हुए। दीपिका का भाई प्रवेश भी कुश्ती का राष्ट्रीय खिलाड़ी है।
बिटिया यूं ही देश का मान बढ़ाती रहे
बेटी ने दुनिया में म्हारे प्रदेश का ही नहीं देश का मान बढ़ाया है। हर माता-पिता को अपने होनहार बच्चों पर नाज होता है। मैं भी आज बेहद भावुक हूं। ईश्वर की कृपा से यह दिन मेरे नसीब में आया है। बस यही प्रार्थना कर सकता हूं कि बिटिया यूं ही पदक दिलाकर देश का नाम रोशन करती रहे। उसे किसी की नजर न लगे। - जगदीश सहरावत, दीपिका के पिता
बेटी पर गर्व, उसे चूरमा पसंद है, आएगी तो खिलाऊंगी
आज बेटियां खेलों में खूब नाम कमा रही हैं। मेरी बेटी ने भी बड़ी कामयाबी हासिल की है। सभी बधाई दे रहे हैं। दीपिका को चूरमा बहुत पसंद है। जब वह गांव आएगी तो उसे चूरमा खिलाकर स्वागत करूंगी। पूरा गांव आज हमारे साथ मानो जश्न मना रहा है। बेटी ने जो खुशी दी है, बयां नहीं कर सकती। भगवान ऐसी बेटी सबको दे। - जगिता देवी, दीपिका की मां
मात्र सात साल की उम्र में दीपिका ने मेरे पास अभ्यास करना शुरू किया था। फाइनल मुकाबले में दीपिका ने एक गोल दागा है। काफी खुशी की बात है कि मंगलवार को दीपिका ने मैच जीतने का वादा किया था। जिसे पूरा कर दिखाया। दीपिका से अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। - आजाद मलिक, सीनियर हॉकी कोच
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राजगीर (बिहार) में हुई चैंपियनशिप में ड्रैग फ्लिकर दीपिका ने शानदार खेल दिखाया। बुधवार को चीन के साथ खेले गए मैच के 32वें मिनट में उन्होंने पेनल्टी कॉर्नर से 1 गोल दागा, जिसकी बदाैलत भारत चैंपियन बना। चीन की टीम कोई गोल नहीं कर सकी। दीपिका ने चैंपियनशिप में कुल 11 गोल किए। उन्हें बेस्ट स्कोरर और बेस्ट प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट चुना गया है। बीते वीरवार को थाइलैंड के साथ हुए मुकाबले में दीपिका ने पांच गोल दागे थे।
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दीपिका सहरावत का पैतृक गांव भैंसरू खुर्द रोहतक जिले में पड़ता है, लेकिन उनका सारा बचपन हिसार में ही बीता है। उनके पिता जगदीश सहरावत ने 38 साल तक एचएयू यानी हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में बताैर लैब असिस्टेंट नाैकरी की थी। यहीं से वे सेवानिवृत्त हुए। सीनियर कोच आजाद मलिक ने बताया कि मंगलवार को उनकी बात दीपिका से हुई थी। दीपिका से मैंने पूछा था-कैसी तैयारी है। दीपिका ने पूरे आत्मविश्वास के साथ जोशीला जवाब दिया, कोच साहब! हम मैच जीतेंगे, पूरी तैयारी है। दीपिका को हॉकी की बारीकियां बताने वाले आजाद मलिक भी होनहार खिलाड़ी की कामयाबी पर बेहद खुश हैं। मलिक कहते हैं, एक कोच के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात क्या होगी कि उसका शागिर्द देश दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करे।
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सात साल की उम्र में दीपिका ने थामी थी हॉकी
जगदीश सहरावत ने फोन पर हुई बातचीत में कहा, बेटी ने हमारा सीना चाैड़ा कर दिया। आज भी याद है जब उसने जिद करके महज सात साल की उम्र में हॉकी थामी थी। ओलंपियन पूनम मलिक और सविता पूनिया को वह मैदान में खेलते देखती थी। उन्हीं से दीपिका को प्रेरणा मिली। मैंने उसे सीनियर कोच आजाद मलिक के हवाले कर दिया। दीपिका की लगन और कोच के कुशल मार्गदर्शन से आज उसने कामयाबी का झंडा गाड़ दिया। जगदीश कहते हैं कि उन्हें जो कुछ भी मिला वह हिसार से ही मिला। यहीं बच्चों की परवरिश हुई और वे सफल हुए। दीपिका का भाई प्रवेश भी कुश्ती का राष्ट्रीय खिलाड़ी है।
बिटिया यूं ही देश का मान बढ़ाती रहे
बेटी ने दुनिया में म्हारे प्रदेश का ही नहीं देश का मान बढ़ाया है। हर माता-पिता को अपने होनहार बच्चों पर नाज होता है। मैं भी आज बेहद भावुक हूं। ईश्वर की कृपा से यह दिन मेरे नसीब में आया है। बस यही प्रार्थना कर सकता हूं कि बिटिया यूं ही पदक दिलाकर देश का नाम रोशन करती रहे। उसे किसी की नजर न लगे। - जगदीश सहरावत, दीपिका के पिता
बेटी पर गर्व, उसे चूरमा पसंद है, आएगी तो खिलाऊंगी
आज बेटियां खेलों में खूब नाम कमा रही हैं। मेरी बेटी ने भी बड़ी कामयाबी हासिल की है। सभी बधाई दे रहे हैं। दीपिका को चूरमा बहुत पसंद है। जब वह गांव आएगी तो उसे चूरमा खिलाकर स्वागत करूंगी। पूरा गांव आज हमारे साथ मानो जश्न मना रहा है। बेटी ने जो खुशी दी है, बयां नहीं कर सकती। भगवान ऐसी बेटी सबको दे। - जगिता देवी, दीपिका की मां
मात्र सात साल की उम्र में दीपिका ने मेरे पास अभ्यास करना शुरू किया था। फाइनल मुकाबले में दीपिका ने एक गोल दागा है। काफी खुशी की बात है कि मंगलवार को दीपिका ने मैच जीतने का वादा किया था। जिसे पूरा कर दिखाया। दीपिका से अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। - आजाद मलिक, सीनियर हॉकी कोच