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Hisar News: पीएचसी कैमरी 55 दिन बाद अस्पताल भवन में शिफ्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 01:15 AM IST
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PHC Camri shifted to hospital building after 55 days
गांव कैमरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बरसात के बाद खराब हालत में बिल्डिंग। 
हिसार। एक सितंबर को हुई भारी बारिश और जलभराव के बाद कैमरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) शनिवार को अपने पुराने भवन में शिफ्ट हो गया है। करीब 55 दिनों तक यह अस्पताल निकटवर्ती पुस्तकालय भवन में अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा था। शनिवार से मरीजों को फिर अस्पताल परिसर में ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। हालांकि, आर्यनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अब भी अपने भवन वापस शिफ्ट नहीं किया गया है। वहां अब भी कीचड़ और फिसलन की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते स्टाफ को गांव की धर्मशाला में ही काम करना पड़ रहा है।
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बारिश से तीन अस्पताल डूबे थे पानी में

पिछले माह एक और दो सितंबर को जिले में लगातार बारिश हुई थी, जिससे कैमरी, आर्यनगर और बरवाला के सरकारी अस्पतालों में पानी भर गया था। इन परिसरों से पानी निकालने के लिए कई दिनों तक मोटरें और ट्रैक्टर चलाए गए। बरवाला का सीएचसी एक सप्ताह के भीतर ही वापस शिफ्ट किया जा चुका है, लेकिन कैमरी और आर्यनगर के अस्पतालों को लगभग दो माह तक अस्थायी जगहों से ही संचालित करना पड़ा।
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कैमरी पीएचसी में फिर से शुरू हुई प्रसव सेवा

कैमरी के अस्पताल भवन में शनिवार से सेवाएं दोबारा शुरू हो गई हैं। छह बेड वाले इस पीएचसी में अब प्रसव सेवा भी बहाल हो गई है। पिछले दो माह से यहां केवल ओपीडी, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार तक ही सेवाएं सीमित थीं। इस अवधि में नर्सिंग स्टाफ को सीएचसी मंगाली और आर्यनगर अस्पताल के आधे कर्मियों को चौधरीवास अस्पताल में तैनात करना पड़ा था।
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शनिवार को पीएचसी कैमरी में आयुष विभाग की डॉ. पिंकी ने 30 से अधिक मरीजों को परामर्श दिया। अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पूजा और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. उमा भी तैनात हैं। औसतन यहां रोजाना 50 मरीज ओपीडी में आते हैं, जबकि हर महीने 10 से अधिक प्रसव होते हैं। अस्पताल में खून जांच, जन्म-मृत्यु पंजीकरण और एंबुलेंस सेवा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

जर्जर भवन में टपकती छत, धंसी फर्श

अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि भवन की हालत बेहद जर्जर है। बारिश में छत टपकने से फर्श धंसने लगा है, जबकि दीवारों और छतों पर कई जगह दरारें आ चुकी हैं। हर कमरे में प्लास्टर उखड़ रहा है और सीलन से बदबू फैल रही है। परिसर में बने तीन कर्मचारियों के आवास भी अब रहने लायक नहीं बचे हैं। कर्मचारियों को किराये के मकानों में रहना पड़ रहा है।
अस्पताल के आधे मैदान में अब भी पानी जमा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। परिसर में लगाए गए पौधे सूखने लगे हैं और पास का सार्वजनिक पार्क भी कीचड़ और गंदगी से भरा पड़ा है। कर्मचारियों ने बताया कि दो साल पहले भी जलभराव की इसी समस्या के कारण पीएचसी कैमरी को अस्थायी रूप से धर्मशाला में स्थानांतरित करना पड़ा था।

नया भवन निर्माण की उठी मांग

अस्पताल कर्मियों ने स्वास्थ्य विभाग से इस पुराने भवन की मरम्मत और नए भवन के निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर बरसात में अस्पताल परिसर जलमग्न हो जाता है, जिससे मरीजों और स्टाफ दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।


कैमरी के पीएचसी का संचालन दो माह तक प्रभावित रहा। इसका कारण वहां जलभराव होना था। वहां के नर्सिंग अधिकारियों समेत आधे स्टाफ को सीएचसी मंगाली में भेजना पड़ा था। अब पानी सूखने पर अस्पताल का संचालन अपने भवन में किया जाने लगा है। इस अस्पताल का नया भवन भी स्वीकृत है। इसे बनाने के लिए मुख्यालय स्तर पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करवाई जा रहीं हैं।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, हिसार।
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