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जुनून, जज्बा, मेहनत और फतह हो गई एवरेस्ट
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हिसार। कहा जाता है कि अगर जीवन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है गांव फरीदपुर की बेटी और पर्वतारोही अनीता कुंडू ने। अपने इसी जुनून, जज्बे और मेहनत से की बदौलत अनीता देश की पहली पर्वतारोही बनी, जिसने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर नेपाल और चीन दोनों ही तरफ से सफलतापूर्वक चढ़ाई की। यही नहीं उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें एडवेंचर के सबसे बड़े अवॉर्ड तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।
पापा का सपना था अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनू
बकौल अनीता कूंडू मेरे पापा एक किसान थे और उनका सपना था कि मैं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनूं। मगर जब मैं 12 साल की थी तो तब मेरे पापा इस दुनिया से चले गए। चूंकि मैं चार बहन-भाइयों में सबसे बड़ी थी तो घर की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। इस कारण मैं खेलों में नही जा सकी। हालांकि मैने हार नहीं मानी और वर्ष 2008 में पुलिस में भर्ती हुई। वर्ष 2009 में मैंने डीजीपी को पत्र लिखा और आग्रह किया कि मुझे आईटीबीपी से जोड़ा जाए ताकि मैं पर्वतरोहण की तैयारी कर सकूं।
लोग देते थे ताना तो रिश्तेदार शादी के बनाने लगे थे दबाव
अनीता ने बताया कि जब मैंने पर्वतारोहण शुरू किया तो लोग ताने मारते थे कि लड़की कहां पहाड़ों पर चढ़ेगी, उधर रिश्तेदार मेरे परिवार वालों से कहते थे कि लड़की की शादी कर दो। मगर मैं जिंदगी में कुछ करना चाहती थी और मेरे परिवार वालों ने भी इसमें पूरा साथ दिया। यही वजह रही कि आज मैं अपने सपनों को पूरा कर सकी हूं।
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ये हैं उपलब्धियां
वर्ष 2013 में नेपाल की तरफ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।
वर्ष 2017 में को चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर झंडा लहराया।
वर्ष 2018 में यूरोप की सबसे सबसे ऊंची चोटी माउंट एलबुर्स को फतेह किया।
वर्ष 2018 में अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर चढ़ाई की।
वर्ष 2019 में अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सन मौसिफ पर देश का झंडा लहराया।
वर्ष 2019 में तीसरी बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई।
वर्ष 2020 में दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकांकागोआ को फतेह किया
एडवेंचर के सबसे बड़े अवॉर्ड तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया।
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पापा का सपना था अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनू
बकौल अनीता कूंडू मेरे पापा एक किसान थे और उनका सपना था कि मैं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनूं। मगर जब मैं 12 साल की थी तो तब मेरे पापा इस दुनिया से चले गए। चूंकि मैं चार बहन-भाइयों में सबसे बड़ी थी तो घर की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। इस कारण मैं खेलों में नही जा सकी। हालांकि मैने हार नहीं मानी और वर्ष 2008 में पुलिस में भर्ती हुई। वर्ष 2009 में मैंने डीजीपी को पत्र लिखा और आग्रह किया कि मुझे आईटीबीपी से जोड़ा जाए ताकि मैं पर्वतरोहण की तैयारी कर सकूं।
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लोग देते थे ताना तो रिश्तेदार शादी के बनाने लगे थे दबाव
अनीता ने बताया कि जब मैंने पर्वतारोहण शुरू किया तो लोग ताने मारते थे कि लड़की कहां पहाड़ों पर चढ़ेगी, उधर रिश्तेदार मेरे परिवार वालों से कहते थे कि लड़की की शादी कर दो। मगर मैं जिंदगी में कुछ करना चाहती थी और मेरे परिवार वालों ने भी इसमें पूरा साथ दिया। यही वजह रही कि आज मैं अपने सपनों को पूरा कर सकी हूं।
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ये हैं उपलब्धियां
वर्ष 2013 में नेपाल की तरफ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की।
वर्ष 2017 में को चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर झंडा लहराया।
वर्ष 2018 में यूरोप की सबसे सबसे ऊंची चोटी माउंट एलबुर्स को फतेह किया।
वर्ष 2018 में अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर चढ़ाई की।
वर्ष 2019 में अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सन मौसिफ पर देश का झंडा लहराया।
वर्ष 2019 में तीसरी बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई।
वर्ष 2020 में दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकांकागोआ को फतेह किया
एडवेंचर के सबसे बड़े अवॉर्ड तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया।