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शोध: पराली से भी बन सकती है कागज की लुगदी, तैयार होगा अच्छी गुणवत्ता का कागज, 66 प्रतिशत तक घटेगा प्रदूषण

Tue, 17 Jan 2023 07:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 17 Jan 2023 07:01 AM IST
सार

एक क्विंटल पराली से 40 किलो लुगदी बनाई जा सकती है। जीजेयू के पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश लोहचब, शोध छात्रा डॉ. दलजीत कौर व अवंता ग्रुप के डॉ. निशिकांत भारद्वाज ने इस पर शोध किया है।

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Paper pulp can also be made from Stubble, GJU Hisar did research
सांकेतिक तस्वीर कागज

विस्तार

पराली का एक और उपयोग सामने आया है। इस फसल से लुगदी बनाई जा सकती है, जिससे अच्छी गुणवत्ता का कागज तैयार होगा। लुगदी को रंगहीन करने के लिए विरंजक के तौर पर क्लोरीन डाई ऑक्साइड का प्रयोग होगा, जिससे जल प्रदूषण भी 66 प्रतिशत तक कम होगा। इस शोध परिणाम को अगर अमल में लाया जाए तो प्रदूषण कम करने व अच्छी गुणवत्ता का कागज मिलने के साथ-साथ पराली का भी बेहतर उपयोग हो सकता है।

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पराली प्रबंधन आज की तारीख में किसानों के साथ-साथ सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती है। इसीलिए इस पर नए-नए प्रयोग भी चल रहे हैं। हरियाणा के हिसार में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) के पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश लोहचब, रिसर्च स्कॉलर डॉ. दलजीत कौर और अवंता ग्रुप के विशेषज्ञ डॉ. निशिकांत भारद्वाज ने मिलकर पराली से कागज बनाने के उपायों पर शोध किया।
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डॉ. राजेश ने बताया कि दुनिया भर में हर साल करीब 731 मिलियन टन पराली निकलती है। इसमें से 126.6 मिलियन टन पराली अकेले भारत में होती है। हमारी शोध में पता लगा कि पराली में पॉलीसैकेराइड्स, लिग्निन और सिलिका होता है। इसमें 33.3 प्रतिशत सेलूलोज, 27.3 प्रतिशत पेंटोसन, 11.7 प्रतिशत सिलिका है जो कागज बनाने के लिए पर्याप्त है।
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हमने पराली को बिना ब्लीच किए लुगदी तैयार किया। इसके बाद क्लोरीन डाई ऑक्साइड के प्रयोग से इसका रंग उतारकर सफेद किया। इससे जल प्रदूषण में 66 प्रतिशत तक कमी आई। इस तरह से एक क्विंटल पराली से करीब 40 किलो लुगदी तैयार होती है।

अच्छी गुणवत्ता का बनेगा कागज 
कागज बनाने के लिए अभी मुख्य रूप से लकड़ी का प्रयोग होता है। कुछ फसल अवशेषों से भी निम्न श्रेणी के कागज बनाए जाते हैं। डॉ. राजेश के अनुसार पराली से बना पेपर लकड़ी से बने पेपर के सापेक्ष अधिक मजबूत होगा। इसमें सफेदी भी अधिक रहेगी।


इसलिए इस पर छपाई भी बेहतर होगी। अगर इस प्रयोग को कंपनियां अपनाएं तो कागज बनाने के लिए लकड़ी का प्रयोग नहीं करना पड़ेेगा। इस प्रकार पराली प्रबंधन के साथ-साथ जल प्रदूषण व वायु प्रदूषण में भी कम लाई जा सकेगी।

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