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रिश्वत के आरोपी डीसीओ चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने की नहीं मिली अनुमति
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हिसार। होलसेल मेडिकल हॉल का लाइसेंस जारी करवाने के लिए आवेदक से 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी हिसार के पूर्व दवा नियंत्रक अधिकारी (डीसीओ) सुरेश चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अभी अनुमति नहीं दी है। अदालत ने इस अनुमति के इंतजार में मामले की आगामी सुनवाई 21 अप्रैल 2022 तक टाल दी है। राज्य चौकसी ब्यूरो ने मामले के दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन सुरेश चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद ही चालान प्रस्तुत किया जाएगा।
यहां बता दें कि राज्य चौकसी ब्यूरो के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने गत 6 अगस्त को रामायण गांव निवासी रामबिलास की शिकायत पर डीसीओ सुरेश चौधरी, सिवानी निवासी चपरासी रामपाल व दादरी के जगराम बास निवासी चालक सुमित के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना वाले दिन शाम को सुरेश चौधरी की निजी कार के चालक व एक चपरासी को टीम ने आधार अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया था जबकि वह स्वयं फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 40 हजार रुपये की नकदी बरामद की थी।
इसी मामले में गत 17 मार्च 2022 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मुकदमा चलाने की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। अनुमति मिलने के बाद सुरेश चौधरी के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया जाएगा।
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जमानत याचिका हुई थी खारिज
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने गत 14 अक्टूबर 2022 को सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। इससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने सुरेश चौधरी को निलंबित कर विभागीय नियमों के नियम 7 के तहत चार्जशीट कर दिया था। इसके तहत सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है।
ढाई माह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा सुरेश चौधरी
इस मामले में घटना वाले दिन ही फरार होने के बाद डीसीओ सुरेश चौधरी करीब ढाई माह तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और फिर हाईकोर्ट से उसको अग्रिम जमानत मिल गई। इस सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुई एएजी डिंपल जैन ने अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर आरोपी डीसीओ को एक सप्ताह के अंदर जांच में शामिल होकर वॉइस सैंपल देने के लिए कहा था जिसके बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी के वॉइस सैंपल लिए और जमानत पर रिहा कर दिया।
डेढ़ माह पूर्व मांगी थी अनुमति
मामले की जांच कर रहे विजिलेंस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि आरोपी डीसीओ सुरेश चौधरी के वॉइस सैंपल लेने के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मुकदमा चलाने के लिए अनुमति देने बारे पत्र लिख दिया था। उम्मीद है कि शीघ्र ही अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वॉइस सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
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यहां बता दें कि राज्य चौकसी ब्यूरो के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने गत 6 अगस्त को रामायण गांव निवासी रामबिलास की शिकायत पर डीसीओ सुरेश चौधरी, सिवानी निवासी चपरासी रामपाल व दादरी के जगराम बास निवासी चालक सुमित के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना वाले दिन शाम को सुरेश चौधरी की निजी कार के चालक व एक चपरासी को टीम ने आधार अस्पताल के समीप से गिरफ्तार किया था जबकि वह स्वयं फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 40 हजार रुपये की नकदी बरामद की थी।
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इसी मामले में गत 17 मार्च 2022 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मुकदमा चलाने की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। अनुमति मिलने के बाद सुरेश चौधरी के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया जाएगा।
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जमानत याचिका हुई थी खारिज
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने गत 14 अक्टूबर 2022 को सुरेश चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी। इससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने सुरेश चौधरी को निलंबित कर विभागीय नियमों के नियम 7 के तहत चार्जशीट कर दिया था। इसके तहत सुरेश चौधरी नौकरी से भी बर्खास्त भी हो सकता है।
ढाई माह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा सुरेश चौधरी
इस मामले में घटना वाले दिन ही फरार होने के बाद डीसीओ सुरेश चौधरी करीब ढाई माह तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और फिर हाईकोर्ट से उसको अग्रिम जमानत मिल गई। इस सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुई एएजी डिंपल जैन ने अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर आरोपी डीसीओ को एक सप्ताह के अंदर जांच में शामिल होकर वॉइस सैंपल देने के लिए कहा था जिसके बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी के वॉइस सैंपल लिए और जमानत पर रिहा कर दिया।
डेढ़ माह पूर्व मांगी थी अनुमति
मामले की जांच कर रहे विजिलेंस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि आरोपी डीसीओ सुरेश चौधरी के वॉइस सैंपल लेने के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मुकदमा चलाने के लिए अनुमति देने बारे पत्र लिख दिया था। उम्मीद है कि शीघ्र ही अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वॉइस सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।