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Hisar News: एनएचएआई ने रिंग रोड का ड्रोन सर्वे करवाकर रिपोर्ट मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 10:18 PM IST
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NHAI conducted a drone survey of the Ring Road and sent the report to the headquarters for approval.
हिसार। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने प्रस्तावित रिंग रोड के लिए ड्रोन सर्वे करवाकर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। वहां से मिलने के बाद प्राधिकरण की तरफ से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। रिंग के निर्माण पर 1900 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है।
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वर्तमान में चंडीगढ़ रोड से सिरसा रोड, सिरसा रोड से राजगढ़ रोड के बीच बाईपास बना हुआ है। मगर राजगढ़ रोड से दिल्ली रोड और दिल्ली रोड से चंडीगढ़ रोड के बीच बाईपास नहीं बना हुआ। करीब 6-7 साल से इस बाईपास के निर्माण की मांग की जा रही है। अगर ये बाईपास बन जाते हैं तो शहर के चारों तरफ से एक रिंग बन जाएगी। इसके बनने से जो वाहन खासकर भारी वाहन शहर के बीच से होकर जाते हैं, उन्हें शहर में दाखिल नहीं होने पड़ेगा। वे इस रिंग रोड के माध्यम से शहर में दाखिले हुए बिना ही जा सकेंगे।
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मुख्यालय ने आपत्ति लगाकर लौटा दी थी सर्वे रिपोर्ट
स्थानीय अधिकारी की तरफ से रिंग रोड की सर्वे रिपोर्ट व एस्टीमेट तैयार कर मंजूरी के लिए मुख्यालय भिजवा दिए गए थे। मगर मुख्यालय ने इस पर कुछ आपत्ति लगा दी थी। मुख्यालय ने रिंग रोड की ड्रोन से सर्वे की रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। इसके बाद स्थानीय अधिकारी ने ड्रोन से इस रोड का सर्वे करवाया।
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40 किलोमीटर लंबा होगा रिंग रोड
रिंग रोड करीब 40 किलोमीटर लंबा होगा। यह रोड एनएच 52 राजगढ़ रोड से शुरू होकर एनएच9 से होते हुए तलवंडी राणा के पास एनएच 52 पर खत्म होगा। यह रोड कैमरी, भगाना, लाडवा, मैय्यड़, खरड़, नियाणा, मिर्जापुर व धांसू गांव से होकर गुजरेगा। इस रोड के निर्माण पर करीब 1900 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें से एक हजार करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण पर खर्च आएगा, जिसमें से 500 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार वहन करेगी। प्रदेश सरकार की तरफ से इस बजट को मंजूरी दी जा चुकी है। वहीं रोड के निर्माण पर 900 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है।
कई बार ठंडे बस्ते में जा चुका प्रोजेक्ट
भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में यह प्रोजेक्ट कई बार ठंडे बस्ते में गया। पिछले कार्यकाल में रणबीर गंगवा डिप्टी स्पीकर के पद पर थे। इस दौरान उन्होंने एनएचएआई से इस रोड को बनाने की मांग की थी। इस पर एनएचएआई ने सर्वे करवाया लेकिन बाद में एनएचएआई ने यह कहते हुए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था कि इस रोड पर वाहनों का बोझ कम है। इसके बाद एक बार फिर रणबीर गंगवा ने इस रोड का मुद्दा उठाया था लेकिन तब भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल सकी थी।

सर्वे रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज दी गई है। अब जैसे ही इसे मुख्यालय से मंजूरी मिलेगी, वैसे ही जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया जाएगा। - विपिन मंगला, प्रोजेक्ट निदेशक, एनएचएआई
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