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कोरोना काल में भी 3 हजार डिलिवरी करवा दी नई जिंदगी

Wed, 30 Jun 2021 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jun 2021 11:48 PM IST
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New life got 3 thousand deliveries even in the Corona period
हिसार। कोरोना संक्रमण काल जितना दुखदाई रहा, उतना ही इस दौर में लोगों को प्रेरणा भी मिली। हताश हो रहे लोगों को उत्साहित करने के लिए समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके प्रेरणादायक कार्य जीवन को इसी तरह चलते रहने का संदेश दे रहे हैं। हमारे चिकित्सकों ने कोरोना काल में 53910 संक्रमितों का जीवन बचाया। साथ ही 3 हजार डिलिवरी करवाकर नई जिंदगी देने में सफल रहे।
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महामारी के दौर में चिकित्सकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दी। इस बीच कई चिकित्सक खुद संक्रमित हुए, लेकिन कोरोना को हराकर फिर से अस्पताल पहुंचे और अपनी ड्यूटी को धर्म मानकर जुट गए। कोरोना की चपेट में आने से 1113 लोग अपने परिजनों से बिछड़ गए। कुछ ऐसे चिकित्सक भी हैं, जिन्होंने कोरोना काल में अपने परिजनों को खोया। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. गोपाल सिंघल और जिला अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड कुलदीप सिंह कोरोना में ड्यूटी देते समय जिंदगी की जंग हार गए। यह स्वास्थ्य कर्मवीर आमजन के लिए सीख हैं कि यह कोरोना किसी को भी हो सकता है, इसलिए सावधानी बरतें।
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हमने अपना फर्ज निभाया है
यह दौर काफी मुश्किल भरा रहा। कुल चार महिला चिकित्सक हैं, जिन्होंने निरंतर काम किया। हमने अपना फर्ज निभाया है और अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर सेवा दी। इस महामारी के दौर में अब तक हमारी गायनी की टीम करीब 3 हजार डिलिवरी करवा चुकी है। इनमें से 15 फीसदी डिलिवरी ऑपरेशन से हुई है, लेकिन उनके बच्चे स्वस्थ हैं। करीब 60 बच्चे ऐसे थे, जिन्हें बचा नहीं पाए। अभी भी हमारी टीम आमजन के सेवा के लिए तत्पर है। - डॉ. अनिता बंसल, प्रभारी, गायनी वार्ड, नागरिक अस्पताल, हिसार
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मां को खोया, लेकिन जल्द काम पर लौटा
मैं शुरू से ही टीकाकरण का काम संभाल रहा हूं। पिछले महीने मेरी मां और भाभी दोनों कोरोना के चलते मौत हो गई। फिर भी मैंने बहुत कम छुट्टियां ली और जल्द काम पर लौटा, ताकि वैक्सीन का काम प्रभावित ना हो और आमजन को टीकाकरण में आसानी हो। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, डिप्टी सीएमओ, हिसार

जान जोखिम में डाल ड्यूटी कर रहे चिकित्सक
महामारी के दौरान प्रत्येक चिकित्सक ने बेहतर काम किया। चाहे वह सरकारी हो या निजी। ऐसे दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर चिकित्सकों ने ड्यूटी दी। हर कोई चिकित्सक अपनी-अपनी कोशिश में लगा था। तभी हम इतने लोगों की जिंदगी बचा पाए। मैं अपनी टीम और बाकी स्वास्थ्य कर्मवीरों से सेवाएं देने के आभार जताता हूं। दूसरी लहर में 20 चिकित्सक और 35 स्टाफ नर्स कोरोना संक्रमित हुए हैं। फिर भी लगातार ड्यूटी दी - डॉ. अजय चुघ, फिजिशियन, आइसोलेशन वार्ड प्रभारी, नागरिक अस्पताल, हिसार
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