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हिसार के कचरे से राष्ट्रीय राजमार्ग 'हाईजैक'
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ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन में लगी कचरा निस्तारण करने वाली मशीन। संवाद
- फोटो : Hisar
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अमित भारद्वाज
हिसार। नगर निगम ने नेशनल हाईवे को ही कचरा घर बना दिया। पिछले तीन-चार दिनों ने निगम चंडीगढ़-सिरसा बाईपास (सर्विस लेन) पर ही कचरा डाल रहा है। इस तरह से निगम एनजीटी के नियमों की अवहेलना कर रहा है। स्थिति यह है कि नेशनल हाईवे पर कचरे के ढेर लग गए हैं। यहीं नहीं इस कचरे पर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
उधर, हाईवे पर कचरा डालने वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ढंढूर के ग्रामीण भी दोबारा से यहां कचरा डाले जाने का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि ढंढूर डंपिंग स्टेशन के एयरपोर्ट के निर्धारित दायरे में आने के कारण निगम ने यहां कचरा डालना बंद कर दिया है। वर्तमान में यहां से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर 32 एकड़ की नई साइट पर कचरा डाला जा रहा है। मगर अभी तक निगम प्रशासन नई साइट से हाईवे तक सड़क का निर्माण नहीं कर सका है। बारिश होते ही कचरे वाली गाड़ी वहां तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में निगम कर्मियों ने नेशनल हाईवे पर कचरा डालना शुरू कर दिया है।
हाईवे पर एकत्रित 700 टन से ज्यादा कचरा
शहर से प्रतिदिन करीब 180 टन कचरा निकलता है। ऐसे में अगर चार दिन से भी कूड़ा हाईवे पर डाला जा रहा है तो वहां 720 टन कचरा एकत्रित हो चुका होगा। एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार खुले में कचरा डाला गैर कानूनी है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कचरे के कारण ढंढूर के ग्रामीण पहले से ही सांस संबंधित बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
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70 लाख की लागत से तैयार की जा रही है सड़क
निगम प्रशासन के अनुसार नए डंपिंग स्टेशन से लेकर नेशनल हाईवे तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिस पर करीब 70 लाख रुपये की लागत आएगी। इस सड़क के बनने से निगम की गाड़ियां आसानी से नए डंपिंग स्टेशन तक पहुंच सकेंगी। निगमायुक्त ने करीब डेढ़ माह पहले इस साइट का निरीक्षण किया था और सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने के आदेश दिए थे।
मशीन लगी पर नहीं शुरू हुआ कचरा निस्तारण का काम
ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन पर कचरा निस्तारण को लेकर एजेंसी की तरफ से मशीन लगा जा चुकी है। मगर अभी तक कचरा निस्तारण का काम शुरू नहीं हुआ है। निगम प्रशासन के मुताबिक बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। कनेक्शन मिलने के साथ ही काम शुरू कर दिया जाएगा। निगम की तरफ से डंपिंग स्टेशन पर पड़े करीब 130 लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए 6.37 करोड़ में रोहतक की एजेंसी को टेंडर दिया गया है।
कबाड़ बन रही 8.30 लाख रुपये की लिगेसी वेस्ट मशीन
नगर निगम की लिगेसी वेस्ट मशीन कबाड़ बन रही है। ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन के कचरा निस्तारण के लिए यह मशीन खरीदी गई थी। निगम प्रशासन भी इस तरफ आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
सरकारी पैसे का दुरुपयोग कैसे करना है, अगर यह यह सीखना है तो नगर निगम से बढ़िया कोई दूसरा उदाहरण नहीं होगा। पिछले वर्ष निगम प्रशासन ने ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन पर पड़े 130 लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत पंजाब के नवां शहर से एक लिगेसी वेस्ट मशीन मंगवाई गई, जिसकी कीमत करीब 8 लाख 30 हजार रुपये थी। इस मशीन की मदद से मिट्टी व कूड़े को अलग-अलग किया जाना था, ताकि डंपिंग स्टेशन पर पड़े कचरे का निस्तारण किया जा सके। 15 जून 2020 को मेयर गौतम सरदाना ने इस मशीन का उद्घाटन भी किया था।
एक माह भी नहीं चलाई मशीन : लापरवाही की स्थिति यह है कि निगम प्रशासन ने इस मशीन को एक माह भी नहीं चलाया और इसे बंद करके कबाड़ बनने से एक तरफ खड़ा कर दिया। हालांकि निगम प्रशासन की उस समय ऐसी दो-तीन मशीन और मंगवाने की भी योजना था।
इस वजह से बनाया था प्रोजेक्ट
एयरपोर्ट के दूसरे फेज का कार्य शुरू हो चुका है और यह डंपिंग स्टेशन उसके एक किलोमीटर के दायरे में आता है। इस देखते हुए यहां लगे कचरे के ढेर को खत्म किया जाना है। इस कचरे के निस्तारण के लिए ही यह पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।
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हिसार। नगर निगम ने नेशनल हाईवे को ही कचरा घर बना दिया। पिछले तीन-चार दिनों ने निगम चंडीगढ़-सिरसा बाईपास (सर्विस लेन) पर ही कचरा डाल रहा है। इस तरह से निगम एनजीटी के नियमों की अवहेलना कर रहा है। स्थिति यह है कि नेशनल हाईवे पर कचरे के ढेर लग गए हैं। यहीं नहीं इस कचरे पर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
उधर, हाईवे पर कचरा डालने वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ढंढूर के ग्रामीण भी दोबारा से यहां कचरा डाले जाने का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि ढंढूर डंपिंग स्टेशन के एयरपोर्ट के निर्धारित दायरे में आने के कारण निगम ने यहां कचरा डालना बंद कर दिया है। वर्तमान में यहां से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर 32 एकड़ की नई साइट पर कचरा डाला जा रहा है। मगर अभी तक निगम प्रशासन नई साइट से हाईवे तक सड़क का निर्माण नहीं कर सका है। बारिश होते ही कचरे वाली गाड़ी वहां तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में निगम कर्मियों ने नेशनल हाईवे पर कचरा डालना शुरू कर दिया है।
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हाईवे पर एकत्रित 700 टन से ज्यादा कचरा
शहर से प्रतिदिन करीब 180 टन कचरा निकलता है। ऐसे में अगर चार दिन से भी कूड़ा हाईवे पर डाला जा रहा है तो वहां 720 टन कचरा एकत्रित हो चुका होगा। एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार खुले में कचरा डाला गैर कानूनी है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कचरे के कारण ढंढूर के ग्रामीण पहले से ही सांस संबंधित बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
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70 लाख की लागत से तैयार की जा रही है सड़क
निगम प्रशासन के अनुसार नए डंपिंग स्टेशन से लेकर नेशनल हाईवे तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिस पर करीब 70 लाख रुपये की लागत आएगी। इस सड़क के बनने से निगम की गाड़ियां आसानी से नए डंपिंग स्टेशन तक पहुंच सकेंगी। निगमायुक्त ने करीब डेढ़ माह पहले इस साइट का निरीक्षण किया था और सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने के आदेश दिए थे।
मशीन लगी पर नहीं शुरू हुआ कचरा निस्तारण का काम
ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन पर कचरा निस्तारण को लेकर एजेंसी की तरफ से मशीन लगा जा चुकी है। मगर अभी तक कचरा निस्तारण का काम शुरू नहीं हुआ है। निगम प्रशासन के मुताबिक बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। कनेक्शन मिलने के साथ ही काम शुरू कर दिया जाएगा। निगम की तरफ से डंपिंग स्टेशन पर पड़े करीब 130 लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए 6.37 करोड़ में रोहतक की एजेंसी को टेंडर दिया गया है।
कबाड़ बन रही 8.30 लाख रुपये की लिगेसी वेस्ट मशीन
नगर निगम की लिगेसी वेस्ट मशीन कबाड़ बन रही है। ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन के कचरा निस्तारण के लिए यह मशीन खरीदी गई थी। निगम प्रशासन भी इस तरफ आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
सरकारी पैसे का दुरुपयोग कैसे करना है, अगर यह यह सीखना है तो नगर निगम से बढ़िया कोई दूसरा उदाहरण नहीं होगा। पिछले वर्ष निगम प्रशासन ने ढंढूर स्थित डंपिंग स्टेशन पर पड़े 130 लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत पंजाब के नवां शहर से एक लिगेसी वेस्ट मशीन मंगवाई गई, जिसकी कीमत करीब 8 लाख 30 हजार रुपये थी। इस मशीन की मदद से मिट्टी व कूड़े को अलग-अलग किया जाना था, ताकि डंपिंग स्टेशन पर पड़े कचरे का निस्तारण किया जा सके। 15 जून 2020 को मेयर गौतम सरदाना ने इस मशीन का उद्घाटन भी किया था।
एक माह भी नहीं चलाई मशीन : लापरवाही की स्थिति यह है कि निगम प्रशासन ने इस मशीन को एक माह भी नहीं चलाया और इसे बंद करके कबाड़ बनने से एक तरफ खड़ा कर दिया। हालांकि निगम प्रशासन की उस समय ऐसी दो-तीन मशीन और मंगवाने की भी योजना था।
इस वजह से बनाया था प्रोजेक्ट
एयरपोर्ट के दूसरे फेज का कार्य शुरू हो चुका है और यह डंपिंग स्टेशन उसके एक किलोमीटर के दायरे में आता है। इस देखते हुए यहां लगे कचरे के ढेर को खत्म किया जाना है। इस कचरे के निस्तारण के लिए ही यह पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया था।

चंडीगढ़-सिरसा बाईपास के किनारे लगे कचरे के ढेर व उसमें मुंह मारते बेसहारा पशु। संवाद- फोटो : Hisar