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नगर परिषद के पूर्व प्रधान मैरिज पैलेस को इंडस्ट्री बताकर भरते रहे प्रॉपर्टी टैक्स
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नगर परिषद के पूर्व प्रधान मैरिज पैलेस को इंडस्ट्री बताकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाते रहे। इसी तरह रेड स्क्वेयर मार्केट में शॉपिंग मॉल बनाकर बैठे मालिक इस जगह को अभी भी प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड में खाली प्लॉट बताए हुए हैं। इस तरह रिकॉर्ड अपडेट नहीं करवाने वालों के खिलाफ अब नगर निगम प्रशासन सख्त रुख अपनाएगा। ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की प्रॉपर्टी की जांच करने के लिए कार्यकारी अधिकारी की ओर से ब्रांच के कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। वहीं नए सर्वे में ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की सच्चाई पूरी तरह निगम प्रशासन के सामने आएगी। निगम प्रशासन ऐसे प्रॉपर्टीधारकों से नियमानुसार पुराना प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूलेगा।
हजारों रुपये का निगम प्रशासन को लगाया गया चूना
निगम अधिकारियों के अनुसार कई प्रॉपर्टी मालिक ऐसे हैं, जो लगातार सही जानकारी नहीं देकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर नप के पूर्व प्रधान हनुमान ऐरन का प्रोफेसर कॉलोनी में मुख्य रोड पर मैरिज पैलेस बना हुआ है। मगर उस प्रॉपर्टी पर अभी तक इंडस्ट्री दिखाई हुई है। इंडस्ट्री को 3.50 रुपये प्रति गज के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाना होता है जबकि मैरिज पैलेस कॉमर्शियल गतिविधि में आता है, इसलिए इसका रेट 11 रुपये से भी ज्यादा बनता है। इस तरह हजारों रुपये का निगम प्रशासन को चूना लगाया जा रहा है।
शहर के कई अस्पताल व अन्य भवनों की भी आई शिकायत
अधिकारियों ने बताया कि मैरिज पैलेस, शॉपिंग मॉल के अलावा शहर के कई अस्पताल और अन्य भवन ऐसे हैं, जहां वास्तविक स्थिति को छुपाकर प्रॉपर्टी टैक्स भरा जा रहा है। ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की उनके पास काफी शिकायतें आई हैं। इसलिए अब प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की एक टीम गठित कर ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की सही प्रॉपर्टी की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की यह टीम जल्द ही इन प्रॉपर्टी की लोकेशन पर जाकर असलियत जानेगी और उसकी रिपोर्ट कार्यकारी अधिकारी को सौंपेगी।
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सर्वे नहीं होने से मिल गया मौका
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारियों की मानें तो ऐसे प्रॉपर्टीधारकों को पिछले पांच सालों में सर्वे नहीं होने के कारण प्रॉपर्टी की जानकारी छुपाने का मौका मिल गया। कई प्रॉपर्टीधारक तो ऐसे हैं, जिन्होंने एक साल से अधिक समय से सही प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा है। इसलिए अब नए सर्वे में ही इनके रिकॉर्ड का अपडेट हो पाएगा।
प्रॉपर्टी टैक्स की सही जानकारी छुपाने संबंधित कुछ शिकायतें हमारे पास बाईनेम आ रही थी। इनमें नप के पूर्व प्रधान से लेकर शॉपिंग मॉल तक की शिकायत शामिल थी। इनके साथ-साथ अन्य प्रॉपर्टीधारकों की जांच के लिए मैंने टीम गठित कर दी है। टीम मौके का निरीक्षण करके रिपोर्ट देगी। उसके बाद रिकॉर्ड अपडेट करवाकर पुराना टैक्स भी भरवाएंगे।
- हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम
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हजारों रुपये का निगम प्रशासन को लगाया गया चूना
निगम अधिकारियों के अनुसार कई प्रॉपर्टी मालिक ऐसे हैं, जो लगातार सही जानकारी नहीं देकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर नप के पूर्व प्रधान हनुमान ऐरन का प्रोफेसर कॉलोनी में मुख्य रोड पर मैरिज पैलेस बना हुआ है। मगर उस प्रॉपर्टी पर अभी तक इंडस्ट्री दिखाई हुई है। इंडस्ट्री को 3.50 रुपये प्रति गज के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाना होता है जबकि मैरिज पैलेस कॉमर्शियल गतिविधि में आता है, इसलिए इसका रेट 11 रुपये से भी ज्यादा बनता है। इस तरह हजारों रुपये का निगम प्रशासन को चूना लगाया जा रहा है।
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शहर के कई अस्पताल व अन्य भवनों की भी आई शिकायत
अधिकारियों ने बताया कि मैरिज पैलेस, शॉपिंग मॉल के अलावा शहर के कई अस्पताल और अन्य भवन ऐसे हैं, जहां वास्तविक स्थिति को छुपाकर प्रॉपर्टी टैक्स भरा जा रहा है। ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की उनके पास काफी शिकायतें आई हैं। इसलिए अब प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की एक टीम गठित कर ऐसे प्रॉपर्टीधारकों की सही प्रॉपर्टी की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की यह टीम जल्द ही इन प्रॉपर्टी की लोकेशन पर जाकर असलियत जानेगी और उसकी रिपोर्ट कार्यकारी अधिकारी को सौंपेगी।
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सर्वे नहीं होने से मिल गया मौका
प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारियों की मानें तो ऐसे प्रॉपर्टीधारकों को पिछले पांच सालों में सर्वे नहीं होने के कारण प्रॉपर्टी की जानकारी छुपाने का मौका मिल गया। कई प्रॉपर्टीधारक तो ऐसे हैं, जिन्होंने एक साल से अधिक समय से सही प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा है। इसलिए अब नए सर्वे में ही इनके रिकॉर्ड का अपडेट हो पाएगा।
प्रॉपर्टी टैक्स की सही जानकारी छुपाने संबंधित कुछ शिकायतें हमारे पास बाईनेम आ रही थी। इनमें नप के पूर्व प्रधान से लेकर शॉपिंग मॉल तक की शिकायत शामिल थी। इनके साथ-साथ अन्य प्रॉपर्टीधारकों की जांच के लिए मैंने टीम गठित कर दी है। टीम मौके का निरीक्षण करके रिपोर्ट देगी। उसके बाद रिकॉर्ड अपडेट करवाकर पुराना टैक्स भी भरवाएंगे।
- हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम