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नगर निगम के ठेकेदारों ने 8 करोड़ के विकास कार्यों पर लगाया ब्रेक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 12:12 AM IST
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Municipal contractors put brake on development works worth 8 crores
हिसार। ईपीएफ की वसूली करने के विरोध में नगर निगम के ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। इससे नगर निगम की तरफ से शहर में करवाए जा रहे विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। विकास कार्यों के बंद होने से शहर वासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उधर, निगम प्रशासन 90 ठेकेदारों को रिकवरी के नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। निगम की तरफ से नोटिस तैयार करवा लिए गए हैं।
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बता दें कि पिछले माह ईपीएफओ की नगर निगम से ईपीएफ की 6.18 करोड़ रुपये की रिकवरी करने के बाद निगम प्रशासन ने यह राशि उन एजेंसियों से वसूलने का फैसला किया, जिन एजेंसियों ने वर्ष 2011 से 16 के बीच निगम के टेंडर लिए थे। यही नहीं, निगम प्रशासन ने वर्तमान में एजेंसियों की करीब 8 करोड़ की पेमेंट भी रोक ली। निगम प्रशासन का कहना है कि जब तक उक्त एजेंसियां निगम प्रशासन को ईपीएफ की 6.18 करोड़ की राशि का भुगतान नहीं करती, तब तक निगम उनकी 8 करोड़ की पेमेंट नहीं करेगा। इसे लेकर ठेकेदारों ने सोमवार को निगमायुक्त के साथ बैठक भी की।
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इस दौरान ठेकेदारों ने कहा कि वर्ष 2011 से 2016 के बीच नगर निगम के पास ईपीएफ व ईएसआई नंबर नहीं था। पहले जो टेंडर लगाए जाते थे, उनमें यह कंडीशन भी नहीं थी। निगम ने वर्ष 2017 में ईपीएफ व ईएसआई नंबर बनवाया है। अब निगम ने यह कंडीशन टेंडर में भी लगा दी है। बैठक में निगमायुक्त ने जवाब दिया कि वे इस मामले में कोर्ट के आदेशानुसार व नियमानुसार ही कार्रवाई करेंगे। निगम की तरफ से कोई राहत न मिलने के बाद ठेकेदारों ने सभी विकास कार्यों को बंद करने की घोषणा की।
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यहां-यहां चल रहे विकास कार्य
शहर के विभिन्न वार्डों में वर्तमान में 8 करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा वार्ड 11 के सातरोड़ में करीब पौने चार करोड़ रुपये, एमसी-डीसी कॉलोनी में 50-50 लाख रुपये और सेक्टर 9-11 में 74 लाख रुपये के विकास कार्य के काम चल रहे हैं। सातरोड़, एमसी-डीसी कॉलोनी व पीएलए में सड़कों व सेक्टर 9-11 में डिवाइडर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। ठेकेदारों ने निगम के सभी विकास कार्य रोक दिए हैं। चूंकि इनमें ज्यादा काम सड़कों के निर्माण से संबंधित हैं और दो माह बाद बारिश का सीजन भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में अगर सड़कें नहीं बनती हैं तो लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना वार्ड 11 स्थित सातरोड़ के लोगों को करना पड़ेगा, क्योंकि सबसे ज्यादा विकास के काम इसी वार्ड में चल रहे हैं।
ठेकेदारों के पास अदालत में जाने का ही बचा विकल्प
चूंकि नगर निगम ने ठेकेदारों से स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वह ईपीएफ के 6.18 करोड़ रुपये जमा करवाए। इसके बाद ही उन्हें उनकी पेमेंट की जाएगी। ऐसे में ठेकेदारों के पास अब अदालत में जाने का ही विकल्प बचा है। फिलहाल ठेकेदार निगम की तरफ से भेजे जाने वाले नोटिस का इंतजार कर रहे हैं। इन नोटिस के आधार पर ही वे अदालत की शरण में जाएंगे। इससे पहले ठेकेदार मिल कर एक बैठक भी करेंगे, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा।

सभी ठेकेदारों ने विकास कार्यों पर काम तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है। अभी हमें निगम की तरफ से रिकवरी के नोटिस नहीं मिले हैं। नोटिस मिलने के साथ ही हम अदालत में जाएंगे। - हरज्ञान सिंह ख्यालिया, प्रधान, गवर्नमेंट कांट्रेक्टर एसोसिएशन, नगर निगम
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