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Hisar News: नवजातों के साथ रहेंगी मां, एनआईसीयू बनेगा एमएनसीयू
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हिसार। बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और मां के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों (एनआईसीयू) को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाई (एमएनसीयू) में बदला जा रहा है। इसके तहत बीमार 20 शिशुओं के साथ उनकी सात माताओं के रहने के लिए भी विशेष बेड की व्यवस्था की जाएगी।
महाराजा अग्रसेन नागरिक जिला अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. प्रभुदयाल ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्देश पर कुरुक्षेत्र में एमएनसीयू बनाया जा चुका है। वहां विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 22 बेड के साथ एमएनसीयू की सुविधा शुरू की गई है। जिलेभर के चिकित्साधिकारियों को बुधवार को वहां व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
अधिकतम दो बच्चों को रखा जा सकता है : जिला अस्पताल में हर महीने करीब 300 प्रसव होते हैं। इनमें लगभग आधे सिजेरियन प्रसव होते हैं। इसके बावजूद नवजातों के लिए झूला/पालना (क्रेडल) की संख्या मात्र एक है जिसमें अधिकतम दो बच्चों को रखा जा सकता है। अब इसी कक्ष में माताओं के लिए सात बेड लगाने की तैयारी की जा रही है।
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महाराजा अग्रसेन नागरिक जिला अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. प्रभुदयाल ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्देश पर कुरुक्षेत्र में एमएनसीयू बनाया जा चुका है। वहां विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 22 बेड के साथ एमएनसीयू की सुविधा शुरू की गई है। जिलेभर के चिकित्साधिकारियों को बुधवार को वहां व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
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अधिकतम दो बच्चों को रखा जा सकता है : जिला अस्पताल में हर महीने करीब 300 प्रसव होते हैं। इनमें लगभग आधे सिजेरियन प्रसव होते हैं। इसके बावजूद नवजातों के लिए झूला/पालना (क्रेडल) की संख्या मात्र एक है जिसमें अधिकतम दो बच्चों को रखा जा सकता है। अब इसी कक्ष में माताओं के लिए सात बेड लगाने की तैयारी की जा रही है।
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