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Haryana Weather: प्रदेश के उत्तरी जिलों पर दिखा मानसून का ज्यादा असर, बाकी में बिखराव वाली हुईं गतिविधियां

Thu, 07 Jul 2022 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 07 Jul 2022 02:03 AM IST
सार

आज से उत्तर भारत में पूर्वी हवाएं फिर रफ्तार पकड़ेंगी। 7 से 10 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियां होंगी।

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Monsoon has more effect on the northern districts of the state, scattered activities in the rest
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विस्तार

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने व टर्फ रेखा मध्य भारत से गुजरने के कारण सुस्त पड़े मानसून ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी है। हालांकि हरियाणा में इसका असर उत्तरी जिलों पर ही दिखा। हरियाणा प्रदेश के बाकी हिस्से या सूखे रहे या फिर बिखराव वाली गतिविधियां दर्ज की गईं।
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बुधवार को पंचकूला में सबसे ज्यादा 78 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा रोहतक में 20 एमएम बारिश हुई। मौसम विशेषज्ञ की मानें तो वीरवार से उत्तर भारत में पूर्वी हवाएं फिर से रफ्तार पकड़ेंगी, जिसके असर से 7 से 10 जुलाई के बीच बारिश संबंधी गतिविधियां दर्ज की जाएंगी।
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मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार फिलहाल मानसून को लगातार सक्रिय बनाए रखने को लेकर प्रभावी मौसमी तंत्र लगातार बन रहे हैं, जिनका प्रभाव राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व गुजरात पर देखने को मिल रहा है, क्योंकि टर्फ रेखा भारत के मध्य से गुजर रही है। मगर इस दौरान पिछले दो तीन दिनों से हरियाणा, एनसीआरव दिल्ली में अभी भी उमस व पसीने वाली गर्मी से लोगों को राहत मिल नहीं मिल रही है।
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बुधवार अलसुबह से शाम 7 बजे तक पंचकूला में 78.0, रोहतक में 20.0, यमुनानगर में 11.5, महेंद्रगढ़ जिले में नांगल चौधरी 10.0, कुरुक्षेत्र में 3.0 व करनाल में 2.0 एमएम बारिश दर्ज हुई है जबकि शेष हरियाणा में सीमित स्थानों पर ही बिखराव वाली बारिश की गतिविधियां देखने को मिलीं। इस दौरान प्रदेश में अधिकतम तापमान 33 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

आगे ऐसा रहेगा मौसम
वर्तमान में एक लो प्रेशर एरिया पश्चिमी मध्य प्रदेश एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के इलाकों पर मौजूद है। साथ ही साथ एक नया चक्रवातीय हवाओं का क्षेत्र इस समय उत्तर बंगाल की खाड़ी पर बना हुआ है। यह जल्द ही अन्य लो प्रेशर एरिया में तब्दील हो जाएगा। साथ ही साथ वर्तमान में मानसून की टर्फ रेखा जैसलमेर, कम दबाव क्षेत्र के मध्य से, दमोह, अम्बिकापुर, बालासोर व नए चक्रवातीय परिसंचरण के मध्य से होते हुए गुजर रही है। इसके अलावा एक अन्य निचले स्तर की टर्फ रेखा पश्चिमी पंजाब, उत्तर राजस्थान व पश्चिमी राजस्थान और सिंध से होकर गुजर रही है।

 

गुरुवार से पूर्वी हवाएं उत्तर भारत में फिर से गति पकड़ेगी, जिससे 7 से 10 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती है। इस दौरान पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद, जिलों में मध्यम से भारी बारिश और महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, झज्जर, रोहतक, सोनीपत व पानीपत, में बिखराव के रूप में हल्की बारिश की संभावना है। वहीं पाकिस्तान के ऊपर भी एक चक्रवातीय परिसंचरण बना हुआ है, जिससे असर से वीरवार को राजस्थान के हनुमानगढ़, व गंगानगर, हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद व हिसार और पंजाब के अबोहर व फाजिल्का में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।

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