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Hisar News: नींद नहीं याददाश्त भी उड़ा रहा मोबाइल, जिले के गांवों में किए सर्वेक्षण में खुलासा
Fri, 17 Apr 2026 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:00 AM IST
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शिवानी सेहरा
हिसार। आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल फोन की बढ़ती निर्भरता अब लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। यह लोगों की नींद उड़ा रहा है और याददाश्त को कम कर रहा है। यह तथ्य राजकीय महिला महाविद्यालय के भूगोल प्रवक्ता डॉ. प्रदीप शर्मा ने बीए तृतीय वर्ष की 104 छात्राओं के साथ हिसार के आसपास के गांवों में किए सर्वेक्षण में सामने आया है। छह माह में किए सर्वे में 563 घरों के 2052 लोगों को शामिल किया गया।
सर्वे के अनुसार 2052 लोगों में से 1689 लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं जबकि केवल 363 लोग ही साधारण कीपैड वाला मोबाइल इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि एक व्यक्ति औसतन प्रतिदिन करीब 5 घंटे मोबाइल पर बिताता है और इसमें से 70 प्रतिशत समय सोशल मीडिया, गेमिंग व वीडियो देखने में खर्च होता है।
आयु वर्ग के अनुसार विश्लेषण में 17 से 27 वर्ष के युवाओं में मोबाइल उपयोग सबसे अधिक पाया गया। वहीं 61 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में मोबाइल उपयोग सबसे कम पाया गया और इनमें भी अधिकतर लोग साधारण मोबाइल का ही उपयोग करते हैं।
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सर्वे में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकेत भी सामने आए हैं। देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का चक्र प्रभावित हो रहा है जिससे याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय क्षमता कमजोर हो रही है। सर्वे में शामिल करीब 1800 मिडल एज व युवा वर्ग मोबाइल के दुष्प्रभाव से प्रभावित पाए गए हैं। इनमें से 72.7 प्रतिशत छात्र-छात्राएं 8 घंटे से कम नींद ले रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
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हिसार। आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल फोन की बढ़ती निर्भरता अब लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। यह लोगों की नींद उड़ा रहा है और याददाश्त को कम कर रहा है। यह तथ्य राजकीय महिला महाविद्यालय के भूगोल प्रवक्ता डॉ. प्रदीप शर्मा ने बीए तृतीय वर्ष की 104 छात्राओं के साथ हिसार के आसपास के गांवों में किए सर्वेक्षण में सामने आया है। छह माह में किए सर्वे में 563 घरों के 2052 लोगों को शामिल किया गया।
सर्वे के अनुसार 2052 लोगों में से 1689 लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं जबकि केवल 363 लोग ही साधारण कीपैड वाला मोबाइल इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट बताती है कि एक व्यक्ति औसतन प्रतिदिन करीब 5 घंटे मोबाइल पर बिताता है और इसमें से 70 प्रतिशत समय सोशल मीडिया, गेमिंग व वीडियो देखने में खर्च होता है।
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आयु वर्ग के अनुसार विश्लेषण में 17 से 27 वर्ष के युवाओं में मोबाइल उपयोग सबसे अधिक पाया गया। वहीं 61 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में मोबाइल उपयोग सबसे कम पाया गया और इनमें भी अधिकतर लोग साधारण मोबाइल का ही उपयोग करते हैं।
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सर्वे में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकेत भी सामने आए हैं। देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का चक्र प्रभावित हो रहा है जिससे याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय क्षमता कमजोर हो रही है। सर्वे में शामिल करीब 1800 मिडल एज व युवा वर्ग मोबाइल के दुष्प्रभाव से प्रभावित पाए गए हैं। इनमें से 72.7 प्रतिशत छात्र-छात्राएं 8 घंटे से कम नींद ले रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।