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दवा के अभाव में मेडिकल कॉलेज में आज से नहीं होंगे ब्लैक फंगस के ऑपरेशन
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कुलदीप जांगड़ा।
हिसार। जिले के कोविड-19 घोषित अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकरमाइकोसिस इलाज में कारगर दवा नहीं होने की वजह से मरीजों के ऑपरेशन का काम बंद हो गया है।
हर रोज अस्पताल में 8 से 10 मरीजों के ऑपरेशन हो रहे थे। अब तक अस्पताल में 30 मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं। चिकित्सकों के मुताबिक दवा न मिलने के कारण अस्पताल में दाखिल मरीजों में भी फंगस संक्रमण फैलने का अधिक खतरा होगा, क्योंकि इन मरीजों को दवा नहीं मिलने से फंगस आगे भी फैलता जाएगा। मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस संक्रमण को रोकने में दी जाने वाली दवा का भंडारण सोमवार शाम तक का था, जो अब खत्म हो गया है। यदि देर रात तक अस्पताल में दवा नहीं पहुंची तो कई मरीजों की जान को खतरा होगा। फिलहाल अस्पताल के म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में ब्लैक फंगस के 92 मरीज दाखिल हैं। सोमवार को मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दोबारा से बेड बढ़ाने पड़े हैं। पहले वार्ड को 20 बेड से शुरू किया था जो अब 100 पर जा पहुंचा है।
दवा की कमी के कारण चिकित्सकों ने भी वार्ड में नए मरीजों को दाखिले करने से मना कर दिया था। मगर अस्पताल में आने वाले मरीज चिकित्सकों से कहते हैं कि पहले आप अस्पताल में दाखिल करो, दवा तो आ जाएगी। हालांकि, चिकित्सक भी अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवा के न होने की बात कहकर अवगत करवा रहे हैं।
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अब खपत बढ़ी
5 दिन पहले अस्पताल में 129 इंजेक्शन आए थे। उस समय वार्ड में 39 मरीज दाखिल थे और हर रोज 470 इंजेक्शन की खपत थी। मगर अभी वार्ड में 92 मरीज दाखिल हैं। यह एम्फोटेरोसीन इंजेक्शन एक मरीज को दिन में छह बार देने पड़ते हैं, जो ग्लूकोज में मिलाकर नियमित समय पर दिए जाते हैं। इसके अलावा मरीज को पोसाकोनाजोल की एक गोली दी जाती है। यही फंगस संक्रमण को रोकने में कारगर है।
दो मरीजों को मिल सकती है छुट्टी
ऑपरेशन के बाद म्यूकरमाइकोसिस 2 मरीजों की हालत में सुधार नजर आया है, जिनको छुट्टी दी जा सकती है। मगर चिकित्सकों द्वारा पहले उनके एमआरआई और सीटी स्कैन सहित अन्य टेस्ट करवाए जाएंगे। फिर उसी आधार पर मरीजों को छुट्टी दे दी जा सकेगी। वैसे दोनों मरीजों को घर पर इलाज के लिए दवा उपलब्ध हो गई है, जो अपनेे किसी रिश्तेदार के सहयोग से दिल्ली और मुंबई से पता की है। इन मरीजों का इलाज लंबा चलेगा।
12 मरीजों की हो चुकी मौत
अब तक मेडिकल कॉलेज में म्यूकरमाइकोसिस के 12 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर चिकित्सक भी चिंतित हैै कि क्योंकि इन मरीजों में दो से तीन में मौजूदा संक्रमण था और बाकी कोरोना से रिकवर होने के बाद मिले थे। इस बारे में अस्पताल प्रशासन में बातें चल रही हैं कि यह मौत म्यूकरमाइकोसिस में गिनी जाएं या कोविड-19 में मानी जाएं। रविवार तक यह मौत का आंकड़ा 9 था।
3 और मरीजों की निकालनी पड़ी आंख
आंख रोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि तीन और मरीजों की आंख निकालनी पड़ी है। इन तीनों मरीजों की आंखों में ब्लैैक फंगस संक्रमण के कारण पहले ही गलन शुरू हो गई थी, जिस कारण तीनों की आंखें गलन के कारण खराब हो चुकी थीं। इससे पहले भी एक मरीज की आंख निकाली जा चुकी है। इनमें से एक महिला और 4 व्यक्ति शामिल हैं। ये सभी मरीज देरी से अस्पताल पहुंचे, जिस कारण आंख निकालने के लिए मजबूरन फैसला लेना पड़ा। खास बात है कि चारों मरीजों की केवल एक ही आंख में संक्रमण फैला था।
आंख रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण रेवड़ी के अनुसार इन बातों का रखें ध्यान
- ब्लैक फंगस नाक से शुरू होकर आंखों और मस्तिष्क तक पहुंचता है।
- नाक बंद होना, नाक में काली पपड़ी बनना, चेहरे पर दर्द, सिर दर्द, आंखों में दर्द या सूजन, आंखों की रोशनी कम होना, दोहरा दिखाई देना, गर्ल जबड़े या दांतों में दर्द, दांतो का ढीला होना।
- यह बीमारी जिन मरीजों में आंखों और दिमाग तक पहुंच चुकी है, उनको अधिक खतरा है।
- इसलिए समय पर नेत्र रोग या ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
दवा नहीं है
म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इनके इलाज के लिए दवा नहीं है। दवा आने वाली थी, लेकिन अभी तक हमारे पास आई नहीं है। इस वजह से हमें म्यूकरमाइकोसिस मरीजों के ऑपरेशन बंद करने पड़ रहे हैं। हमने मरीजों के लिए बेेेड भी बढ़ाए हैं, ताकि मरीजों को उपचार मिल सके।
- डॉ. गीतिका दुग्गल, डायरेक्टर, मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, हिसार।
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संवाद
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हिसार। जिले के कोविड-19 घोषित अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकरमाइकोसिस इलाज में कारगर दवा नहीं होने की वजह से मरीजों के ऑपरेशन का काम बंद हो गया है।
हर रोज अस्पताल में 8 से 10 मरीजों के ऑपरेशन हो रहे थे। अब तक अस्पताल में 30 मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं। चिकित्सकों के मुताबिक दवा न मिलने के कारण अस्पताल में दाखिल मरीजों में भी फंगस संक्रमण फैलने का अधिक खतरा होगा, क्योंकि इन मरीजों को दवा नहीं मिलने से फंगस आगे भी फैलता जाएगा। मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस संक्रमण को रोकने में दी जाने वाली दवा का भंडारण सोमवार शाम तक का था, जो अब खत्म हो गया है। यदि देर रात तक अस्पताल में दवा नहीं पहुंची तो कई मरीजों की जान को खतरा होगा। फिलहाल अस्पताल के म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में ब्लैक फंगस के 92 मरीज दाखिल हैं। सोमवार को मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दोबारा से बेड बढ़ाने पड़े हैं। पहले वार्ड को 20 बेड से शुरू किया था जो अब 100 पर जा पहुंचा है।
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दवा की कमी के कारण चिकित्सकों ने भी वार्ड में नए मरीजों को दाखिले करने से मना कर दिया था। मगर अस्पताल में आने वाले मरीज चिकित्सकों से कहते हैं कि पहले आप अस्पताल में दाखिल करो, दवा तो आ जाएगी। हालांकि, चिकित्सक भी अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवा के न होने की बात कहकर अवगत करवा रहे हैं।
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अब खपत बढ़ी
5 दिन पहले अस्पताल में 129 इंजेक्शन आए थे। उस समय वार्ड में 39 मरीज दाखिल थे और हर रोज 470 इंजेक्शन की खपत थी। मगर अभी वार्ड में 92 मरीज दाखिल हैं। यह एम्फोटेरोसीन इंजेक्शन एक मरीज को दिन में छह बार देने पड़ते हैं, जो ग्लूकोज में मिलाकर नियमित समय पर दिए जाते हैं। इसके अलावा मरीज को पोसाकोनाजोल की एक गोली दी जाती है। यही फंगस संक्रमण को रोकने में कारगर है।
दो मरीजों को मिल सकती है छुट्टी
ऑपरेशन के बाद म्यूकरमाइकोसिस 2 मरीजों की हालत में सुधार नजर आया है, जिनको छुट्टी दी जा सकती है। मगर चिकित्सकों द्वारा पहले उनके एमआरआई और सीटी स्कैन सहित अन्य टेस्ट करवाए जाएंगे। फिर उसी आधार पर मरीजों को छुट्टी दे दी जा सकेगी। वैसे दोनों मरीजों को घर पर इलाज के लिए दवा उपलब्ध हो गई है, जो अपनेे किसी रिश्तेदार के सहयोग से दिल्ली और मुंबई से पता की है। इन मरीजों का इलाज लंबा चलेगा।
12 मरीजों की हो चुकी मौत
अब तक मेडिकल कॉलेज में म्यूकरमाइकोसिस के 12 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर चिकित्सक भी चिंतित हैै कि क्योंकि इन मरीजों में दो से तीन में मौजूदा संक्रमण था और बाकी कोरोना से रिकवर होने के बाद मिले थे। इस बारे में अस्पताल प्रशासन में बातें चल रही हैं कि यह मौत म्यूकरमाइकोसिस में गिनी जाएं या कोविड-19 में मानी जाएं। रविवार तक यह मौत का आंकड़ा 9 था।
3 और मरीजों की निकालनी पड़ी आंख
आंख रोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि तीन और मरीजों की आंख निकालनी पड़ी है। इन तीनों मरीजों की आंखों में ब्लैैक फंगस संक्रमण के कारण पहले ही गलन शुरू हो गई थी, जिस कारण तीनों की आंखें गलन के कारण खराब हो चुकी थीं। इससे पहले भी एक मरीज की आंख निकाली जा चुकी है। इनमें से एक महिला और 4 व्यक्ति शामिल हैं। ये सभी मरीज देरी से अस्पताल पहुंचे, जिस कारण आंख निकालने के लिए मजबूरन फैसला लेना पड़ा। खास बात है कि चारों मरीजों की केवल एक ही आंख में संक्रमण फैला था।
आंख रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण रेवड़ी के अनुसार इन बातों का रखें ध्यान
- ब्लैक फंगस नाक से शुरू होकर आंखों और मस्तिष्क तक पहुंचता है।
- नाक बंद होना, नाक में काली पपड़ी बनना, चेहरे पर दर्द, सिर दर्द, आंखों में दर्द या सूजन, आंखों की रोशनी कम होना, दोहरा दिखाई देना, गर्ल जबड़े या दांतों में दर्द, दांतो का ढीला होना।
- यह बीमारी जिन मरीजों में आंखों और दिमाग तक पहुंच चुकी है, उनको अधिक खतरा है।
- इसलिए समय पर नेत्र रोग या ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
दवा नहीं है
म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इनके इलाज के लिए दवा नहीं है। दवा आने वाली थी, लेकिन अभी तक हमारे पास आई नहीं है। इस वजह से हमें म्यूकरमाइकोसिस मरीजों के ऑपरेशन बंद करने पड़ रहे हैं। हमने मरीजों के लिए बेेेड भी बढ़ाए हैं, ताकि मरीजों को उपचार मिल सके।
- डॉ. गीतिका दुग्गल, डायरेक्टर, मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, हिसार।
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संवाद