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विपरित परिस्थितियों में भी निर्मला ने संघर्ष रखा जारी तो मधुबाला को माता-पिता ने खेलने के लिए प्रेरित किया
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हिसार। मंगाली की बेटियों ने जोश और जज्बे के बल पर मुकाम को हासिल कर देश का नाम रोशन किया। इन बेटियों ने फुटबाल में न केवल अपनी किक के दम से देश के लिए पदक जीते हैं, बल्कि अपनी मेहनत के बल पर सरकारी नौकरी भी हासिल की है। अब मंगाली की दो बेटियां निर्मला और मधुबाला खेल कोटे के तहत जूनियर फुटबाल कोच नियुक्त हुई हैं। इससे पहले इसी गांव की 15 बेटियों ने खेल कोटे के तहत शिक्षा, रेलवे, सीमा शस्त्र बल में नौकरी हासिल कर गांव का गौरव बढ़ाया।
फुटबाल खिलाड़ी निर्मला और मधुबाला के कोच बनने पर खिलाड़ियों ने ग्राउंड पर मिठाई बांटकर खुशियां मनाई। कोच नरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले 15 साल से दोनों बेटियां मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अभ्यास कर रही हैं। फिजिकल लेक्चरार सुखविंद्र कौर, सेवानिवृत्त फुटबाल कोच अश्वनी कुमार और कोच नरेंद्र कुमार ने दोनों बेटियों को बधाई दी।
खेल के मैदान पर निर्मला को कामयाबी हासिल करना आसान नहीं था। हालांकि विपरीत परिस्थितियों में भी निर्मला ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। निर्मला ने बताया कि उनके पिता रमेश कुमार मजदूरी करते हैं। माता दर्शना गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी पिता व माता ने मुझे खेल में आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रेरित किया। मैंने भी माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया। वहीं, मंगाली की रहने वाली मधुबाला बताती हैं कि पिता कृष्ण कुमार कानूनगो और माता संतोष देवी गृहिणी हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया। परिवार में पांच बहनें और एक भाई है। दो बहनें अंजू और अनीता की पहले ही सरकारी नौकरी लग चुकी है। मधुबाला ने बताया कि उसका सपना भी सरकारी नौकरी लगने का था, जिसे पूरा कर लिया।
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फुटबाल खिलाड़ी निर्मला और मधुबाला के कोच बनने पर खिलाड़ियों ने ग्राउंड पर मिठाई बांटकर खुशियां मनाई। कोच नरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले 15 साल से दोनों बेटियां मंगाली के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अभ्यास कर रही हैं। फिजिकल लेक्चरार सुखविंद्र कौर, सेवानिवृत्त फुटबाल कोच अश्वनी कुमार और कोच नरेंद्र कुमार ने दोनों बेटियों को बधाई दी।
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खेल के मैदान पर निर्मला को कामयाबी हासिल करना आसान नहीं था। हालांकि विपरीत परिस्थितियों में भी निर्मला ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। निर्मला ने बताया कि उनके पिता रमेश कुमार मजदूरी करते हैं। माता दर्शना गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी पिता व माता ने मुझे खेल में आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रेरित किया। मैंने भी माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया। वहीं, मंगाली की रहने वाली मधुबाला बताती हैं कि पिता कृष्ण कुमार कानूनगो और माता संतोष देवी गृहिणी हैं। परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया। परिवार में पांच बहनें और एक भाई है। दो बहनें अंजू और अनीता की पहले ही सरकारी नौकरी लग चुकी है। मधुबाला ने बताया कि उसका सपना भी सरकारी नौकरी लगने का था, जिसे पूरा कर लिया।
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