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इंसान अपने जीवन के मर्म को भूल साधनों को एकत्र करने में जुटा : स्वामी संजय
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ओशो ध्यान उपवन में आयोजित ध्यान सत्र में हिस्सा लेेते साधक।
हिसार। धन व संसाधनों की चाहत में मनुष्य निरंतर भागदौड़ कर रहा है, लेकिन उसे सच्चे आनंद की अनुभूति नहीं होती। इसी तथ्य को समझते हुए ओशो ध्यान उपवन में ध्यान व आनंद विषय पर आधारित ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। साधकों ने ध्यान करते हुए वास्तविक शांति व सच्चे आनंद की अनुभूति की। ध्यान सत्र के दौरान स्वामी संजय ने कहा कि इंसान अपने जीवन के मर्म को भूलकर अधिक से अधिक साधनों को एकत्र करने में जुटा हुआ है।
इस प्रयास में बेचैनी इंसान की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। इस बेचैनी, तनाव व अवसाद को दरकिनार करके इंसान को शांति व सच्चे आनंद की अनुभूति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने एवं अपने भीतर डूबते हुए अलग एहसास करने से यह सब कुछ संभव है। उन्होंने कहा कि सतगुरु ओशो ने सच्चे आनंद के बारे में विस्तार से समझाया है। स्वामी संजय ने बताया कि सिरसा रोड पर स्थित ओशो ध्यान उपवन में समय-समय पर ध्यान सत्र व ध्यान शिविरों का आयोजन करके ध्यान की सरल विधियां सिखाई जाती हैं।
इसी कड़ी में ओशो ध्यान उपवन में 11 से 13 अप्रैल तक तीन दिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न सत्र आयोजित करके ध्यान के विविध आयामों पर चर्चा होगी और ध्यान का अभ्यास करवाया जाएगा। 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सतगुरु ओशो के छोटे भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती व मां अमृत प्रिया एक ओंकार सतनाम महासत्संग करेंगे। महासत्संग के बाद दोपहर एक बजे सात्विक लंगर प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।
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इस प्रयास में बेचैनी इंसान की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। इस बेचैनी, तनाव व अवसाद को दरकिनार करके इंसान को शांति व सच्चे आनंद की अनुभूति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने एवं अपने भीतर डूबते हुए अलग एहसास करने से यह सब कुछ संभव है। उन्होंने कहा कि सतगुरु ओशो ने सच्चे आनंद के बारे में विस्तार से समझाया है। स्वामी संजय ने बताया कि सिरसा रोड पर स्थित ओशो ध्यान उपवन में समय-समय पर ध्यान सत्र व ध्यान शिविरों का आयोजन करके ध्यान की सरल विधियां सिखाई जाती हैं।
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इसी कड़ी में ओशो ध्यान उपवन में 11 से 13 अप्रैल तक तीन दिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न सत्र आयोजित करके ध्यान के विविध आयामों पर चर्चा होगी और ध्यान का अभ्यास करवाया जाएगा। 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सतगुरु ओशो के छोटे भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती व मां अमृत प्रिया एक ओंकार सतनाम महासत्संग करेंगे। महासत्संग के बाद दोपहर एक बजे सात्विक लंगर प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।
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