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4.46 लाख रुपये में खरीदीं 2.5 लाख की मशीनें
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:09 AM IST
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लुवास
- फोटो : demo
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एचएयू और लुवास द्वारा लगभग दोगुनी रकम देकर रिसर्च में इस्तेमाल होने वाली पीसीआर मशीनें खरीदने का मामला सामने आया है। पिछले कई वर्षों से यह मशीन करीबन दोगुने दामों में खरीदी जा रही हैं। मामले में छानबीन की गई तो पता लगा कि मशीन की कीमत अधिकतम ढाई लाख रुपये है। लुवास में मार्च 2016 तक यह मशीन 4 लाख 45 हजार 975 रुपये में खरीदी गई है।
लुवास और एचएयू के कई विभागों में पीसीआर यानी पोलिमरेश चेन रिएक्शन मशीन की जरूरत होती है। लुवास में वेटिनरी पैथोलॉजी और वीपीएचई विभागों सहित अन्य विभागों के लिए पिछले पांच वर्षों में खरीदी गईं मशीनों के कागज अमर उजाला के हाथ लगे हैं, जिनमें एचएयू और लुवास द्वारा खरीदी गईं मशीनों की जानकारी है। ये मशीनें मार्च 2016 तक इसी कीमत में खरीदी गई हैं, जिसके बाद दोनों यूनिवर्सिटी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह है पीसीआर मशीन
पीसीआर मशीन विश्वविद्यालय में चल रही रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मशीन का पूरा नाम वेरिटी 96 वेल थर्मासाय्क्लर (पोलिमरेश चेन रिएक्शन) मशीन है। मशीन का कैटलोग नंबर 4375786 है। इस मशीन से जीन से संबंधित रिसर्च के काम किए जाते हैं। पेड़-पौधों सहित जीवों की आनुवांशिकी का पता लगाने के लिए इस मशीन का प्रयोग होता है।
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एनडीआरआई ने यही मशीन खरीदी 7 लाख 29 हजार रुपये में
जो पीसीआर मशीन एचएयू और लुवास में 4 लाख 45 हजार 975 रुपये में खरीदी जाती रही है। यही तीन मशीनें एनडीआरआई करनाल ने 7 लाख 29 हजार 382 रुपये में खरीदी हैं। यानी कि एनडीआरआई ने एक मशीन 2 लाख 43 हजार 260 रुपये में खरीदी है। बड़ी बात यह है कि एक बार तो मशीन उसी कंपनी से खरीदी गई है, जिनसे एनडीआरआई ने तीन मशीनें 2 लाख 43 हजार 260 रुपये के हिसाब से खरीदी हैं। एचएयू ने ये मशीनें 4 लाख 45 हजार 382 रुपये के हिसाब से खरीदी।
हमने मशीन को विश्वविद्यालय के नियमों और उसके द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीदा है। कंपनी ने हमें सर्टिफिकेट भी लिखकर दिया है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।
- डॉ. त्रिलोक नंदा, स्टोर परचेज ऑफिसर, लुवास (जैसा पीआरओ ने उनका वर्जन बताया)
हमने हाल ही में तो ऐसी कोई मशीन नहीं खरीदी है, लेकिन हम इन मशीनों के लिए टेंडर निकालते हैं। सबसे कम दामों में जो भी मशीन देता है, उसी से मशीन खरीदते हैं।
- डॉ. रविंद्र शर्मा, निदेशक सेंट्रल परचेज कमेटी हिसार
मशीनें खरीदने की लंबी प्रक्रिया है। इसमें कम से कम 20 व्यक्ति शामिल होते हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा हुआ होगा, लेकिन फिर भी हम इसकी जांच कराएंगे। - डॉ. महेंद्र सिंह दहिया, रजिस्ट्रार, एचएयू हिसार
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लुवास और एचएयू के कई विभागों में पीसीआर यानी पोलिमरेश चेन रिएक्शन मशीन की जरूरत होती है। लुवास में वेटिनरी पैथोलॉजी और वीपीएचई विभागों सहित अन्य विभागों के लिए पिछले पांच वर्षों में खरीदी गईं मशीनों के कागज अमर उजाला के हाथ लगे हैं, जिनमें एचएयू और लुवास द्वारा खरीदी गईं मशीनों की जानकारी है। ये मशीनें मार्च 2016 तक इसी कीमत में खरीदी गई हैं, जिसके बाद दोनों यूनिवर्सिटी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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यह है पीसीआर मशीन
पीसीआर मशीन विश्वविद्यालय में चल रही रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मशीन का पूरा नाम वेरिटी 96 वेल थर्मासाय्क्लर (पोलिमरेश चेन रिएक्शन) मशीन है। मशीन का कैटलोग नंबर 4375786 है। इस मशीन से जीन से संबंधित रिसर्च के काम किए जाते हैं। पेड़-पौधों सहित जीवों की आनुवांशिकी का पता लगाने के लिए इस मशीन का प्रयोग होता है।
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एनडीआरआई ने यही मशीन खरीदी 7 लाख 29 हजार रुपये में
जो पीसीआर मशीन एचएयू और लुवास में 4 लाख 45 हजार 975 रुपये में खरीदी जाती रही है। यही तीन मशीनें एनडीआरआई करनाल ने 7 लाख 29 हजार 382 रुपये में खरीदी हैं। यानी कि एनडीआरआई ने एक मशीन 2 लाख 43 हजार 260 रुपये में खरीदी है। बड़ी बात यह है कि एक बार तो मशीन उसी कंपनी से खरीदी गई है, जिनसे एनडीआरआई ने तीन मशीनें 2 लाख 43 हजार 260 रुपये के हिसाब से खरीदी हैं। एचएयू ने ये मशीनें 4 लाख 45 हजार 382 रुपये के हिसाब से खरीदी।
हमने मशीन को विश्वविद्यालय के नियमों और उसके द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीदा है। कंपनी ने हमें सर्टिफिकेट भी लिखकर दिया है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।
- डॉ. त्रिलोक नंदा, स्टोर परचेज ऑफिसर, लुवास (जैसा पीआरओ ने उनका वर्जन बताया)
हमने हाल ही में तो ऐसी कोई मशीन नहीं खरीदी है, लेकिन हम इन मशीनों के लिए टेंडर निकालते हैं। सबसे कम दामों में जो भी मशीन देता है, उसी से मशीन खरीदते हैं।
- डॉ. रविंद्र शर्मा, निदेशक सेंट्रल परचेज कमेटी हिसार
मशीनें खरीदने की लंबी प्रक्रिया है। इसमें कम से कम 20 व्यक्ति शामिल होते हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा हुआ होगा, लेकिन फिर भी हम इसकी जांच कराएंगे। - डॉ. महेंद्र सिंह दहिया, रजिस्ट्रार, एचएयू हिसार