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Hisar: हिसार के लुवास में शुरू हो सकती है Lumpy Skin Disease की जांच, अभी तक सिर्फ भोपाल में सुविधा

Thu, 11 Aug 2022 12:33 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Aug 2022 12:33 PM IST
सार

लंपी त्वचा रोग की जांच अभी तक मध्यप्रदेश के भोपाल में हो रही है जहां से जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। सैंपल को भेजना भी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। सैंपल पहले पंजाब के जालंधर स्थित लैब में भेजे जाते हैं।

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Lumpy skin disease investigation may start in Hisar Lala Lajpat Rai University of Veterinary
लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज। - फोटो : फाइल

विस्तार

हिसार की लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज (लुवास) में जल्द ही लंपी त्वचा रोग की जांच शुरू हो सकती है। यूनिवर्सिटी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर लंपी स्किन डिजीज की जांच के लिए अनुमति मांगेगी। 
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फिलहाल एलएसडी की जांच मध्यप्रदेश के भोपाल में हो रही है जहां से जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। सैंपल को भेजना भी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। सैंपल पहले पंजाब के जालंधर स्थित लैब में भेजे जाते हैं। उसके बाद यह केंद्र अपनी रिपोर्ट के अनुसार सैंपल को आगे भेजता है।
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लंपी त्वचा रोग के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खोजा टीका

लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए हिसार के दो वैज्ञानिकों डॉ. नवीन कुमार व डॉ. संजय ने महज एक साल में स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है। हिसार में राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि 2019 में यह बीमारी पहली बार ओडिशा में मिली थी। पहले तीन महीने में इसके विषाणु की पहचान की गई। जिसमें पता लगा कि यह लंपी बीमारी का मुख्य कारण वायरस है, जो पोक्स फैमिली का है।

तीन महीने तक इसका क्लीनिकल ट्रायल हुआ। जिसमें सबसे पहले खरगोश पर परीक्षण किया गया। दूसरा परीक्षण मई 2022 में 15 बछड़ों पर किया गया। जिसमें 15 बछड़े पूरी तरह से सुरक्षित रहे। इसके बाद राजस्थान की गोशालाओं में इसका व्यापक परीक्षण किया गया। टीका लगने के बाद  7 से 14 दिन बाद एंटीबॉडीज बनने लगती है।

चार सप्ताह में पशु पूरी तरह से खतरे से बाहर होने लगता है। डॉ. डीआर गुलाटी ने बताया कि इसके लिए 50 परीक्षण किए गए हैं। एक परीक्षण में एक सप्ताह का समय लगता है। टीके का फार्मूला तैयार करने में एक साल का समय लगा। केंद्र के निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि हमारी टीम ने बेहद कम समय में टीका तैयार कर लिया है। इस टीके के आपातकाल प्रयोग की अनुमति सरकार से मांगी गई है। केंद्र सरकार ने इस टीके को बुधवार को लांच कर दिया है। इससे पहले राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने पशुओं के लिए कोरोना वैक्सीन की खोज की थी। 

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