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जंग-ए-आजादी: कांग्रेस के काउंटरमैन बने थे लाला मुरलीधर, लाला लाजपत राय ने दी थी संगठन को धार

Sun, 14 Aug 2022 07:11 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 14 Aug 2022 07:11 PM IST
सार

अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति का बलपूर्वक दमन तो कर दिया, लेकिन लोगों के मन में आजादी की चिंगारी सुलग रही थी। वर्ष 1885 में कांग्रेस की स्थापना की गई, जिसके 72 काउंटरमैन (सदस्य) में हिसार लाला मुरलीधर भी शामिल थे। बाद में लाला लाजपतराय ने यहां कांग्रेस का विस्तार किया और आजादी की चिंगारी फिर मशाल बन गई। प्रस्तुत है आजादी की लड़ाई में हिसार के योगदान शृंखला की कड़ी.....।

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Lala Muralidhar of Hisar was also included in the 72 countermen of the Congress in 1885
lala lajpat rai - फोटो : file photo

विस्तार

1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने अपनी नीतियों में बदलाव किया। वर्ष 1867 में हांसी, हिसार, सिरसा व भिवानी को नगर पालिका घोषित कर दिया गया। इसके बाद सिरसा को अलग जिला बनाया। हालांकि 1882 में सिरसा को फिर हिसार जिले में शामिल कर दिया। वर्ष 1891 में बरवाला की जगह टोहाना को तहसील बनाया। इतना ही नहीं दादरी को जींद के शासक को भेंट में दे दिया गया। परंतु अंग्रेज इन सबसे संतुष्ट नहीं थे।

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वर्ष 1885 में कांग्रेस की स्थापना में शामिल 72 प्रमुख लोगों में से लाला मुरलीधर हिसार से थे। उन्हीं दिनों पंजाब के रहने वाले नौजवान वकील लाला लाजपतराय अधिवक्ता के तौर पर हिसार आए। वे कांग्रेस के समर्थक थे और हिसार में इकाई स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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इसके अलावा आर्य समाज की स्थापना भी की। जल्दी ही ये हिसार में लोकप्रिय हो गए।कांग्रेस में सक्रियता व समाज में बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए ब्रिटिश प्रशासन ने लाला लाजपतराय को हिसार नगर पालिका का ऑनरेरी सेक्रेटरी नामित कर दिया, जबकि पहले कलेक्टर ही पदेन होते थे।
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(जैसा कि इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया..)

कांग्रेस के चौथे अधिवेशन में बढ़ी भूमिका
वर्ष 1888 में कांग्रेस के चौथे वार्षिक अधिवेशन में लाला लाजपतराय को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया। इनके साथ लाला गौरीशंकर, लाला चूड़ामनि और चंदूलाल तायल भी गए थे। बताते हैं कि वहां कांग्रेस के संस्थापक एओ ह्यूम ने लाला लाजपतराय का विशेष तौर पर स्वागत किया। वहां से लौटकर आने के बाद कांग्रेस के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी। वर्ष 1903 में लाहौर में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में 10 लोग हिसार से शामिल हुए थे।

बंगाल के विभाजन का किया विरोध
हिसार क्षेत्र के संभ्रांत लोग कांग्रेस से जुड़ते जा रहे थे। इसी बीच बंगाल का विभाजन हो गया, जिसका देशभर में विरोध होने लगा। विरोध की लपटें हिसार तक पहुंचीं और यहां भी आंदोलन शुरू हो गया। कटला रामलीला मैदान में विरोध सभा हुई। इसके कुछ दिन बाद ही स्वदेशी व बहिष्कार आंदोलन शुरू हो गया। हिसार में इसके प्रचार की जिम्मेदारी लाला लाजपतराय को मिली। इसके बाद हिसार, हांसी, डबवाली, सिरसा, फतेहाबाद व भिवानी में स्वदेशी स्टोर खोले गए। इसका असर यह रहा कि विदेशी कपड़ों की मांग में तेजी से गिरावट आई। हिसार में पूरे साल जहां 10 हजार गांठ की मांग होती थी, वह घटकर केवल चार हजार गांठ ही रह गई।


लाला लाजपतराय की गिरफ्तारी से भड़क गए लोग
वर्ष 1907 में लाहौर में लाला लाजपतराय को धोखे से गिरफ्तार कर लिया गया। हिसार के जैन गली में लाला लाजपतराय की ससुराल थी, इस नाते भी यहां के लोगों का उनसे लगाव था। गिरफ्तारी के विरोध में लोग सड़क पर आ गए। छह महीने बाद उन्हें रिहा किया गया। इधर कांग्रेस में उग्र राष्ट्रवाद का प्रभाव पड़ा, जिसके तीन प्रमुख कर्णधार लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल थे। हिसार क्षेत्र के कांग्रेसी उग्र राष्ट्रवाद के समर्थक थे। वर्ष 1907 में हिसार व रोहतक में सैनिकों ने भी विद्रोह कर दिया। फलस्वरूप 145 सैनिक बर्खास्त किए गए।

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