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खेदड़ थर्मल पावर प्लांट से ऑक्सीजन उत्पादन शुरू, सैंपल लैब भेजे
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ऑक्सीजन उत्पादन को लेकर खेदड़ थर्मल पावर प्लांट से राहत देने वाली खबर है। उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि प्लांट से ऑक्सीजन तैयार कर इसके सैंपल दिल्ली के श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च सेंटर को भेजे गए हैं, जिसके नतीजे जल्द मिलने की उम्मीद है।
सैंपल के नतीजे आने के बाद संबंधित विभाग से अनुमति मिलते ही यहां से 10 मीटर क्यूब प्रति घंटा ऑक्सीजन का उत्पादन आरंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन से 35 से 40 जंबो टाइप सिलिंडर या 150 से 160 बी टाइप सिलिंडर भरे जा सकेंगे। खेदड़ थर्मल पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर मोहम्मद इकबाल ने बताया कि प्लांट में हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र से पानी में से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग-अलग किया जाता है। हाइड्रोजन का इस्तेमाल प्लांट में किया जाता है, जबकि ऑक्सीजन को वायुमंडल में छोड़ा जाता है। अब ऑक्सीजन के महत्व को देखते हुए इसी ऑक्सीजन को मरीजों के उपचार में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर होगा जब किसी पावर प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। प्लांट के स्तर पर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। अब सिर्फ सैंपल रिपोर्ट और अनुमति मिलने का इंतजार है।
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सैंपल के नतीजे आने के बाद संबंधित विभाग से अनुमति मिलते ही यहां से 10 मीटर क्यूब प्रति घंटा ऑक्सीजन का उत्पादन आरंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन से 35 से 40 जंबो टाइप सिलिंडर या 150 से 160 बी टाइप सिलिंडर भरे जा सकेंगे। खेदड़ थर्मल पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर मोहम्मद इकबाल ने बताया कि प्लांट में हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र से पानी में से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग-अलग किया जाता है। हाइड्रोजन का इस्तेमाल प्लांट में किया जाता है, जबकि ऑक्सीजन को वायुमंडल में छोड़ा जाता है। अब ऑक्सीजन के महत्व को देखते हुए इसी ऑक्सीजन को मरीजों के उपचार में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर होगा जब किसी पावर प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। प्लांट के स्तर पर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। अब सिर्फ सैंपल रिपोर्ट और अनुमति मिलने का इंतजार है।
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