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जाट समुदाय खुशी से झूमा
हिसार
Updated Sun, 02 Mar 2014 10:28 PM IST
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केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण की मांग के लिए पटरियों पर बैठे जाट समुदाय को रविवार देर रात खुशखबरी मिल ही गई। केंद्रीय कैबिनेट ने उनकी आरक्षण की मांग मान ली।
सूचना मिलते ही जाट समुदाय खुशी से झूम उठा और इसका श्रेय समुदाय की एकजुटता को दिया। इससे पूर्व जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण नहीं दिया गया तो सोमवार सुबह 11 बजे रेलवे ट्रैक दोबारा जाम कर दिया जाएगा।
जाट समुदाय रामायण रेलवे ट्रैक के नजदीक रविवार को दूसरे दिन भी धरने पर बैठा रहा। ट्रैक के नजदीक जाटों ने डेरा जमाए रखा। कांग्रेसी नेता धर्मबीर गोयत ने सभास्थल पर पहुंचकर जाट नेताओं को आश्वस्त किया कि जाट समुदाय को रविवार को केंद्र में आरक्षण मिलना तय है।
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत ने धर्मबीर गोयत की कही बात मंच पर दोहराई और ऐलान किया कि अगर रविवार को जाट समुदाय को आरक्षण देने की घोषणा नहीं होती तो समुदाय के लोग सोमवार सुबह 11 बजे के बाद रामायण रेलवे ट्रैक को जाम कर देंगे।
आरक्षण की मांग के लिए मैय्यड़ के रामायण रेलवे ट्रैक के नजदीक बैठे लोगों की संख्या कल की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक रही। मंच के माध्यम से समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र पूनिया ने कहा कि रविवार शाम तक आरक्षण की घोषणा नहीं होने पर हिसार और भिवानी के साथ लगते गांवों के लोग ट्रैक पर एकत्र होना शुरू हो जाएंगे और पहले की तरह जाट आंदोलन शांतिप्रिय तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उनका व उनके समुदाय के लोगों का मकसद आम जनता को परेशान करने का नहीं है, मगर सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही उन्हें हर बार आंदोलन में कड़ा रुख अपनाना पड़ा है। सरकार के टरकाऊ रवैये के चलते ही समुदाय के तीन युवकों की जान जा चुकी है।
आरक्षण की मांग के लिए आंदोलन के दूसरे दिन समुदाय के लोगों ने रविवार सुबह से शाम पांच बजे तक किसी भी रेलगाड़ी को नहीं रोका। सावधानी रखते हुए रेलवे की तरफ से गाड़ियों को बहुत ही धीमी गति से गुजारा गया। वहीं, हिसार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी वाहनों का आवागमन अन्य दिनों की तरह सामान्य ही रहा।
पिछले करीब चार साल से अपनी मांगों के लिए हर साल आंदोलन के दौरान ऐसा पहली बार हो रहा है जब आंदोलन करने वाली अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के साथ शुरुआत से ही विभिन्न खाप प्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है।
बड़े आंदोलन की दी थी धमकी
भिवानी। अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश मान ने चेतावनी दी थी कि यदि आचार संहिता लागू होने से पहले उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो 13 राज्यों में आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा बड़ा आंदोलन करेगी।
रविवार को जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट महासभा ने कहा कि लंबे समय से जाट समुदाय अपनी मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी दे रहा है, लेकिन अब तक सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया, तो दिल्ली के जंतर-मंतर सहित 13 राज्यों में संघर्ष का बिगुल फूंका जाएगा।
इस अवसर पर कटार सिंह सांगवान, तिलक नरवाल, सूबे सिंह, उमेद सिंह, रण सिंह सांगवान, सुरेन्द्र ठेकेदार, वीरेन्द्र सिंह, मंदीप गोदारा, चंद्र सिंह आर्य, सुल्तान सिंह तालु, जसवंत सिंह तालु, पूर्ण मनकावास, धर्मवीर सिसर, मंगल सिंह सुई उपस्थित थे।
जाटों के तेवर देख सरकार थी गंभीर
जींद। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र में आरक्षण के लिए जाटों की ओर से शुरू किए गए आंदोलन से सरकार गंभीर थी। इससे पहले भी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार जाटों से मुंह की खा चुकी थी। चार साल पहले भी 11 दिन तक जींद में दिल्ली-फिरोजपुर रेलवे ट्रैक बंद किया गया था।
केंद्र में जाट आरक्षण की मांग काफी समय से चली आ रही है। हरियाणा समेत कई राज्यों में जाट आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे थे लेकिन उग्र आंदोलन हमेशा हरियाणा में होता रहा था। इस बार भी जाटों ने व्यापक तैयारियां शुरू की थी।
सर्व जाट खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नफे सिंह नैन ने बताया कि रविवार को कहा था कि जाट आंदोलन इस बार सबसे उग्र करने की तैयारी है। इसके तहत रेलवे ट्रैक बंद करने के साथ-साथ सड़क मार्ग भी बंद करने की योजना है। इतना ही नहीं, दिल्ली को जाने वाली दूध व अन्य सामग्री भी बंद कर दी जाएगी। इसके लिए जाट समुदाय ने गुड़गांव, पलवल व बावल में बैठक कर रणनीति बनाई है।
सरकार के पास था कम समय
जाट समुदाय के लोगों ने शनिवार को नरवाना में चार घंटे तक रेलवे ट्रैक बंद कर दिया था। इसके बाद जाटों ने सरकार को चार मार्च तक का समय देते हुए आरक्षण लागू करने की चेतावनी दी थी। जाट नेताओं के लिए यह तीन दिन ही तैयारी के लिए काफी थे और सरकार के लिए बहुत कम समय है।
हरियाणा के नेता कर रहे थे सिफारिश
कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक दल अल्टीमेटम पर गंभीर थे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार सभी बड़े नेता कांग्रेस हाईकमान को आरक्षण पर मुहर लगाने की सिफारिश कर रहे थे।
वहीं, विपक्षी दल आचार संहिता लगने तक मामले को लटकाने के मूड में थे। हर राजनीतिक दल जाट आरक्षण को हरियाणा में चुनाव के दौरान कैश करने के लिए प्रयास कर रहा था।
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सूचना मिलते ही जाट समुदाय खुशी से झूम उठा और इसका श्रेय समुदाय की एकजुटता को दिया। इससे पूर्व जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण नहीं दिया गया तो सोमवार सुबह 11 बजे रेलवे ट्रैक दोबारा जाम कर दिया जाएगा।
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जाट समुदाय रामायण रेलवे ट्रैक के नजदीक रविवार को दूसरे दिन भी धरने पर बैठा रहा। ट्रैक के नजदीक जाटों ने डेरा जमाए रखा। कांग्रेसी नेता धर्मबीर गोयत ने सभास्थल पर पहुंचकर जाट नेताओं को आश्वस्त किया कि जाट समुदाय को रविवार को केंद्र में आरक्षण मिलना तय है।
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल छौत ने धर्मबीर गोयत की कही बात मंच पर दोहराई और ऐलान किया कि अगर रविवार को जाट समुदाय को आरक्षण देने की घोषणा नहीं होती तो समुदाय के लोग सोमवार सुबह 11 बजे के बाद रामायण रेलवे ट्रैक को जाम कर देंगे।
आरक्षण की मांग के लिए मैय्यड़ के रामायण रेलवे ट्रैक के नजदीक बैठे लोगों की संख्या कल की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक रही। मंच के माध्यम से समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र पूनिया ने कहा कि रविवार शाम तक आरक्षण की घोषणा नहीं होने पर हिसार और भिवानी के साथ लगते गांवों के लोग ट्रैक पर एकत्र होना शुरू हो जाएंगे और पहले की तरह जाट आंदोलन शांतिप्रिय तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उनका व उनके समुदाय के लोगों का मकसद आम जनता को परेशान करने का नहीं है, मगर सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही उन्हें हर बार आंदोलन में कड़ा रुख अपनाना पड़ा है। सरकार के टरकाऊ रवैये के चलते ही समुदाय के तीन युवकों की जान जा चुकी है।
आरक्षण की मांग के लिए आंदोलन के दूसरे दिन समुदाय के लोगों ने रविवार सुबह से शाम पांच बजे तक किसी भी रेलगाड़ी को नहीं रोका। सावधानी रखते हुए रेलवे की तरफ से गाड़ियों को बहुत ही धीमी गति से गुजारा गया। वहीं, हिसार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी वाहनों का आवागमन अन्य दिनों की तरह सामान्य ही रहा।
पिछले करीब चार साल से अपनी मांगों के लिए हर साल आंदोलन के दौरान ऐसा पहली बार हो रहा है जब आंदोलन करने वाली अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के साथ शुरुआत से ही विभिन्न खाप प्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है।
बड़े आंदोलन की दी थी धमकी
भिवानी। अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश मान ने चेतावनी दी थी कि यदि आचार संहिता लागू होने से पहले उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो 13 राज्यों में आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा बड़ा आंदोलन करेगी।
रविवार को जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट महासभा ने कहा कि लंबे समय से जाट समुदाय अपनी मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी दे रहा है, लेकिन अब तक सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया, तो दिल्ली के जंतर-मंतर सहित 13 राज्यों में संघर्ष का बिगुल फूंका जाएगा।
इस अवसर पर कटार सिंह सांगवान, तिलक नरवाल, सूबे सिंह, उमेद सिंह, रण सिंह सांगवान, सुरेन्द्र ठेकेदार, वीरेन्द्र सिंह, मंदीप गोदारा, चंद्र सिंह आर्य, सुल्तान सिंह तालु, जसवंत सिंह तालु, पूर्ण मनकावास, धर्मवीर सिसर, मंगल सिंह सुई उपस्थित थे।
जाटों के तेवर देख सरकार थी गंभीर
जींद। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र में आरक्षण के लिए जाटों की ओर से शुरू किए गए आंदोलन से सरकार गंभीर थी। इससे पहले भी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार जाटों से मुंह की खा चुकी थी। चार साल पहले भी 11 दिन तक जींद में दिल्ली-फिरोजपुर रेलवे ट्रैक बंद किया गया था।
केंद्र में जाट आरक्षण की मांग काफी समय से चली आ रही है। हरियाणा समेत कई राज्यों में जाट आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे थे लेकिन उग्र आंदोलन हमेशा हरियाणा में होता रहा था। इस बार भी जाटों ने व्यापक तैयारियां शुरू की थी।
सर्व जाट खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नफे सिंह नैन ने बताया कि रविवार को कहा था कि जाट आंदोलन इस बार सबसे उग्र करने की तैयारी है। इसके तहत रेलवे ट्रैक बंद करने के साथ-साथ सड़क मार्ग भी बंद करने की योजना है। इतना ही नहीं, दिल्ली को जाने वाली दूध व अन्य सामग्री भी बंद कर दी जाएगी। इसके लिए जाट समुदाय ने गुड़गांव, पलवल व बावल में बैठक कर रणनीति बनाई है।
सरकार के पास था कम समय
जाट समुदाय के लोगों ने शनिवार को नरवाना में चार घंटे तक रेलवे ट्रैक बंद कर दिया था। इसके बाद जाटों ने सरकार को चार मार्च तक का समय देते हुए आरक्षण लागू करने की चेतावनी दी थी। जाट नेताओं के लिए यह तीन दिन ही तैयारी के लिए काफी थे और सरकार के लिए बहुत कम समय है।
हरियाणा के नेता कर रहे थे सिफारिश
कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक दल अल्टीमेटम पर गंभीर थे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार सभी बड़े नेता कांग्रेस हाईकमान को आरक्षण पर मुहर लगाने की सिफारिश कर रहे थे।
वहीं, विपक्षी दल आचार संहिता लगने तक मामले को लटकाने के मूड में थे। हर राजनीतिक दल जाट आरक्षण को हरियाणा में चुनाव के दौरान कैश करने के लिए प्रयास कर रहा था।