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मंत्री को ट्रैक पर लाकर दिलवाना था आश्वासन

Mon, 15 Feb 2016 01:33 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो Updated Mon, 15 Feb 2016 01:33 AM IST
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Jat Arakshan

जाट आरक्षण की मांग को लेकर दो दिन से मय्यड़ में हिसार-दिल्ली रेलवे ट्रैक को जाम कर बैठे कुछ आंदोलनकारियों को धरना खत्म करने का फैसला रास नहीं आया।

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उन्होंने इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए नारेबाजी की। इससे पहले रविवार सुबह साढ़े दस बजे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने धरना उठा लिया।

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने खुद धरने पर पहुंचकर कृषि मंत्री से हुई बातचीत सार्वजनिक मंच पर बताई और उनके द्वारा दिया गया आश्वासन भी बताया।
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धरना खत्म करने की बात सुनकर लगभग अधिकतर आंदोलनकारियों ने खुशी जाहिर की और तालियां बजाई। मगर इस फैसले से नाराज 20 से 25 आंदोलनकारियों ने धरना उठाने का विरोध किया, जिनमें कुछ युवा भी थे।
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उन्होंने एतराज जताया कि जब जाट मंत्रियों को ट्रैक पर आकर आश्वासन देने की बात रखी गई थी तो मंत्री यहां क्यों नहीं आए।

वे धरने पर तब तक नहीं उठेंगे, जब तक उन्हें मंत्री आकर आश्वासन नहीं देते। सांगवान ने उन्हें समझाया कि मंत्री को जल्दी जाना था।

इसलिए वे यहां नहीं आए। इसी दौरान समिति के जिलाध्यक्ष दलजीत पंघाल मौके पर पहुंचे और धरना खत्म करने का विरोध जता रहे आंदोलनकारियों से दो मिनट तक बातचीत की।

उन्होंने कहा कि धरना खत्म करने की घोषणा हो चुकी है। यह बात कहकर दलजीत पंघाल चले गए। टेंट उठाने और अन्य सामान पहुंचाने की बात कहकर दोनों नेता प्रदेशाध्यक्ष सांगवान और जिलाध्यक्ष पंघाल पौने 11 बजे वहां से चले गए।

सिर्फ आश्वासन मिलता है, आरक्षण नहीं
हवासिंह सांगवान को धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने कहा कि आश्वासन तो उन्हें हर बार मिलता रहा है, लेकिन आज तक आरक्षण नहीं मिला। हवासिंह सांगवान ने कहा कि अगर सरकार इस बार जाटों के साथ धोखा करेगी तो हम लठों के साथ मैदान में उतरेंगे। फिर हमारा तोड़फोड़ आंदोलन शुरू हो जाएगा।

लोग बोले, बिक गए, अब दूसरे गुट वाले आएंगे ट्रैक पर
रविवार को पौने 11 बजे दोनों जाट नेताओं के जाने के बाद भी भगाणा और अन्य गांवों के जाट ट्रैक पर बैठे रहे। भगाणा के राजू और राजेश ने कुछ लोगों को वहीं जोड़े रखा।


उन्होंने कुछ लोगों के बिकने तक के गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर ठीक होते तो मंत्री को ट्रैक पर बुलाकर सबके सामने सार्वजनिक आश्वासन दिलवाते।

उन्होंने मलिक गुट के सदस्यों के पास फोन कर दिया है, वे आने वाले हैं। ये ट्रैक जाम रहेगा। हालांकि दूसरे गुट के रामभगत मलिक मौके पर पहुंचे।

 मगर उन्होंने कहा कि जब उनके नेता ही यहां से चले गए तो अब वे क्या कर सकते हैं। उनका आंदोलन तो 21 फरवरी से है। काफी देर बातचीत के बाद करीब पौने एक बजे विरोध जता रहे लोगों ने ट्रैक को पूरी तरह खाली कर दिया।

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