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इंस्पेक्टर निर्दोष साबित, डीएसपी समेत अन्य पर केस दर्ज
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हिसार। हांसी में तैनात इंस्पेक्टर उमेद सिंह आखिरकार जांच में रिश्वत के आरोप में निर्दोष पाए गए। इसके बाद अब सिटी थाना पुलिस ने हांसी के तत्कालीन (अब सेवानिवृत्त) डीएसपी मदन लाल, उमरा निवासी कुलदीप, बलवान और सुल्तानपुर निवासी कुलदीप व सतीश के खिलाफ छवि बिगाड़ने, आपराधिक षड्यंत्र रचने, एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
भट्टू निवासी उमेद सिंह ने शिकायत में बताया कि वह हांसी थाने में बतौर इंस्पेक्टर तैनात हैं। 24 अप्रैल 2018 से 24 नवंबर 2018 तक हांसी सदर थाना प्रभारी तैनात रहा। 11 अक्तूबर 2018 को थाने में एक रुक्का प्राप्त हुआ। गांव उमरा के प्राध्यापक सुरेंद्र के साथ उमरा निवासी कुलदीप व तीन-चार अन्य ने मारपीट की। जिस पर मैंने पुलिस कर्मचारी को मौके पर भेजा और सुरेंद्र के ब्यान पर केस दर्ज किया। वहीं कुलदीप की शिकायत पर सुरेंद्र व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जब मैं घटनास्थल पर पहुंचा तो ग्रामीणों ने बताया कि कुलदीप झूठ बोल रहा है। इसके बाद मेरा थाना सदर हांसी से एसएचओ पद से तबादला हो गया। इसके बाद उक्त मुकदमे की जांच तत्कालीन प्रबंधक सदर थाना हांसी प्रहलाद राय द्वारा की गई। उन्होंने भी अपनी जांच में पाया कि कुलदीप के आरोप झूठे हैं। इस पर एक जनवरी 2019 को मुकदमा रद्द कर दिया गया। केस रद्द होने पर कुलदीप रंजिश रखने लगा। उसने तत्कालीन डीएसपी मदनलाल के साथ मिलकर मेरे खिलाफ साजिश रच मुझे 50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। 8 जनवरी को एसपी हांसी को मेरे खिलाफ शिकायत दी।
एसपी ने शिकायत की जांच तत्कालीन डीएसपी मदन लाल के नाम मार्क कर दी। डीएसपी भी मेरे से जातिगत रंजिश रखता था। उसने 14 फरवरी 2019 को मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट तैयार कर एसपी को भेज दी, लेकिन एसपी जांच से संतुष्ट नहीं हुईं। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच डीएसपी मुख्यालय राजबीर सिंह को सौंपी। जांच के दौरान दो आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई। इसके बाद जांच में मुझे निर्दोष पाया गया। यह रिपोर्ट हांसी की एसपी के सामने पेश की गई। अब उमेद सिंह की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने तत्कालीन डीएसपी समेत पांच अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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भट्टू निवासी उमेद सिंह ने शिकायत में बताया कि वह हांसी थाने में बतौर इंस्पेक्टर तैनात हैं। 24 अप्रैल 2018 से 24 नवंबर 2018 तक हांसी सदर थाना प्रभारी तैनात रहा। 11 अक्तूबर 2018 को थाने में एक रुक्का प्राप्त हुआ। गांव उमरा के प्राध्यापक सुरेंद्र के साथ उमरा निवासी कुलदीप व तीन-चार अन्य ने मारपीट की। जिस पर मैंने पुलिस कर्मचारी को मौके पर भेजा और सुरेंद्र के ब्यान पर केस दर्ज किया। वहीं कुलदीप की शिकायत पर सुरेंद्र व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जब मैं घटनास्थल पर पहुंचा तो ग्रामीणों ने बताया कि कुलदीप झूठ बोल रहा है। इसके बाद मेरा थाना सदर हांसी से एसएचओ पद से तबादला हो गया। इसके बाद उक्त मुकदमे की जांच तत्कालीन प्रबंधक सदर थाना हांसी प्रहलाद राय द्वारा की गई। उन्होंने भी अपनी जांच में पाया कि कुलदीप के आरोप झूठे हैं। इस पर एक जनवरी 2019 को मुकदमा रद्द कर दिया गया। केस रद्द होने पर कुलदीप रंजिश रखने लगा। उसने तत्कालीन डीएसपी मदनलाल के साथ मिलकर मेरे खिलाफ साजिश रच मुझे 50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। 8 जनवरी को एसपी हांसी को मेरे खिलाफ शिकायत दी।
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एसपी ने शिकायत की जांच तत्कालीन डीएसपी मदन लाल के नाम मार्क कर दी। डीएसपी भी मेरे से जातिगत रंजिश रखता था। उसने 14 फरवरी 2019 को मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट तैयार कर एसपी को भेज दी, लेकिन एसपी जांच से संतुष्ट नहीं हुईं। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच डीएसपी मुख्यालय राजबीर सिंह को सौंपी। जांच के दौरान दो आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई। इसके बाद जांच में मुझे निर्दोष पाया गया। यह रिपोर्ट हांसी की एसपी के सामने पेश की गई। अब उमेद सिंह की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने तत्कालीन डीएसपी समेत पांच अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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