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कीट साक्षरता मिशन: हरियाणा के चार जिलों में किसानों ने की कीटों से दोस्ती, कर रहे रसायन मुक्त खेती

Mon, 28 Aug 2023 09:21 AM IST
नवीन दलाल सुरेश सहारण, हिसार (हरियाणा)
सुरेश सहारण, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Mon, 28 Aug 2023 09:21 AM IST
सार

हरियाणा के चार जिलों में कीट साक्षरता मिशन के तहत किसान स्कूल क्लास लग रही है। कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र दलाल ने अपने स्तर पर वर्ष 2008 में जींद जिले के गांव निडाना से इसकी शुरुआत की थी। हिसार में 35 गांवों इस अभियान से जुड़े लोग कीटाचार्य बनकर कीटों की पहचान करना सीख चुके हैं।

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Insect Literacy Mission: Farmers befriend insects in four districts of Haryana, doing chemical free farming
किसान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कैंसर से बचाव के लिए प्रारंभ किया गया डॉ. सुरेंद्र दलाल का कीट साक्षरता मिशन अब तीन प्रदेशों तक फैल गया है। हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में किसान इस मिशन से जुड़े हैं। इस बार खरीफ सीजन में किसानों ने इस साल करीब 5 हजार एकड़ में कपास, ग्वार, मूंग ,बाजरा की फसल लगाई है, जिनमें कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया गया है। हरियाणा के चार जिलों में इस अभियान के तहत किसान स्कूल क्लास लग रही है। डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन और हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से प्रदेश के किसानों को कीटनाशक रहित खेती के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया ग्रुप भी बनाए हैं। कई वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हैं।

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जींद जिले के गांव निडाना शुरुआत हुआ मिशन
अभियान के संयोजक डॉ. बलजीत भ्याण ने बताया कि हिसार में मोहब्बतपुर, किरतान गांव , फतेहाबाद में चंद्रावल, जींद में काकड़ोद ,सिरसा में कांशी का बास, खारी सुरेरा में इस अभियान के तहत हर सप्ताह क्लास लगाई जा रही हैं। राजस्थान में कैथाना, गाजूवाला , पंजाब में मानसा, बठिंडा, होशियारपुर में मिशन चलाया जा रहा है। कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र दलाल ने अपने स्तर पर वर्ष 2008 में जींद जिले के गांव निडाना से इसकी शुरुआत की थी।
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वर्ष 2013 में डॉ. सुरेंद्र दलाल की मौत के बाद उनकी टीम के अन्य सहयोगियों ने इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। इस अभियान में किसान को प्रशिक्षण दिया जाता है। वे आगे दूसरे किसानाें को प्रशिक्षण देते हैं। हिसार में 35 गांवों इस अभियान से जुड़े लोग कीटाचार्य बनकर कीटों की पहचान करना सीख चुके हैं। डॉ. बलजीत भ्याण ने बताया कि खेतों में शाकाहारी व मांसाहारी जीव होते हैं। कीटों की गिनती कर पता लगाना सिखाते हैं कि यह कीट आर्थिक नुकसान के कगार पर पहुंच रहे गए हैं या नहीं।

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सबसे पहले कीटों की पहचान जरूरी

खेत में कीटों का सर्वे करने के लिए रेंडम तरीके से दस पौधे चुनें। हर पौधे से तीन पत्तों का चुनाव करें। इन पत्तों पर मौजूद शाकाहारी व मांसाहारी कीट दोनों की गिनती करें। इस प्रकार उस खेत में प्रति पत्ता कीटों की संख्या का पता लग जाएगा। वैज्ञानिकों ने सभी शाकाहारी कीटों का आर्थिक नुकसान का कगार निर्धारित किया हुआ है। जैसे की सफेद मक्खी प्रति पत्ता 6 से 8, हर तैला प्रति पत्ता 2, चूरड़ा प्रति पत्ता 10, माइट प्रति पत्ता 20 हो तो इस स्तर तक फसल को आर्थिक नुकसान से कम की श्रेणी में माना जाएगा। किसान हर सप्ताह जाकर अपने खेतों में इस तरह से सर्वे करते रहें।

स्प्रे करने वाले 16% किसानों को हो जाता है कैंसर

मैनेज संस्था की हैदराबाद व लखनऊ की टीम ने हिमाचल प्रदेश के 22 ब्लाक में सर्वे किया। इसमें पाया कि कीटनाशकों का स्प्रे करने वाले 16 प्रतिशत किसानों को कैंसर हो जाता है। किसानों को एक एकड़ में कीटनाशक का स्प्रे करने पर 3 हजार रुपये खर्च हो जाता है। स्प्रे से इस खेत के उत्पाद उपयोग करने वाले सभी लोगों के अलावा आसपास के लोगाें को भी कैंसर का खतरा बनता है। कीटनाशक हवा, पानी, पशु चारे के जरिए मानव जीवन तक कैंसर पहुंचाते हैं।

जहां कीटनाशक प्रयोग नहीं, वहां कम नुकसान

डॉ. बलजीत भ्याण ने बताया कि किसानों की मदद से किए सर्वे में यह पाया कि जिन किसानों ने कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया वहां पर गुलाबी सुंडी का नुकसान अन्य क्षेत्र की अपेक्षा काफी कम है। वहीं, जिन्होंने ज्यादा कीटनाशक का प्रयोग किया वहां इस साल भी नुकसान ज्यादा है। उन्होंने कहा कि कोई भी कीटनाशक गुलाबी सुंडी को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसे में गुलाबी सुंडी के नाम पर हजारों रुपये स्प्रे पर बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है। इस अभियान का मकसद किसानों का कीटों के प्रति भय व भ्रम हो गया था उसे दूर कर किसानों को कीटों की पहचान कराना है।

पौधों को ताकत देने के लिए यह छिड़काव करें

पूर्व जिला उद्यान अधिकारी डॉ. बलजीत भ्याण ने कहा कि किसानों को फसल में पौधों को मजबूत करने के लिए पांच से छह बार छिड़काव करना चाहिए। जिसमें 2.5 किलो यूरिया, 2.5 किलो डीएपी, आधा किलो जिंक 21 प्रतिशत वाला को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इस छिड़काव से पौधे को मजबूती मिलेगी।

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