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स्वतंत्रता दिवस: अंग्रेज जेल में खाने में चूना मिला कर खिलाते थे, तुलसीराम के बेटे ने सुनाई दर्द भरी दास्तान

Wed, 13 Aug 2025 11:20 AM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 13 Aug 2025 11:20 AM IST
सार

तुलसीराम अपने बच्चों को सुभाष चंद्र बोस का भाषण भी सुनाते थे। ओमप्रकाश ने बताया कि रेडियो पर नेताजी का भाषण सुनने के बाद उनके पिता आजाद हिंद सेना में भर्ती हो गए थे।

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Independence Day: The British used to mix lime in the food and feed it to the prisoners in jail, Tulsiram said
तुलसीराम - फोटो : संवाद

विस्तार

मेरे पिता तुलसीराम का जन्म 30 नवंबर 1922 को गांव डोभी में हुआ। 30 नवंबर 1938 को वह आर्मी में जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। वह बरेली में जाकर भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 7 साल आर्मी में रहकर डयूटी की। इसके बाद व आईएनए में शामिल होने के लिए सिंगापुर पहुंचे।अंग्रेंजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेज उन्हें प्रताड़ित करने के लिए जेल में खाने में चूना मिला कर खिलाते थे। जिससे वह पेचिस होकर कमजोर पड़ जाएं तथा उनकी मौत हो जाए।

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आजाद हिंद फौज में भर्ती रहने के दौरान लंबे समय जंगलों में छिपते रहे। इस दौरान उन्होंने काफी समय तो बांस की गोलियां खाकर बिताया। वहां के जंगलों में खाने के लिए कुछ और नहीं होता था तो मजबूरी में इसे खाते थे। लड़ाई के समय लंबे समय बारिश होती रहती थी। उनके पास बचने के लिए किसी तरह के संसाधन नहीं होते थे। हम चार भाई हैं तथा दो बहन हैं।
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मैं टेलरिंग का काम करता हूं। मेरे दो भाई ड्राइवरी का काम करते हैं। एक भाई खेती बाड़ी का काम करता है। दसवीं पासबा होने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिली। मैंने काफी बार नौकरी के लिए प्रयास किया । हमें किसी तरह की कोई पेंशन या मदद नहीं मिल रही। हमें अंग्रेजी सरकार के समय भी ताम्र पत्र मिला थ। इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय भी ताम्र पत्र दिया गया।
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पेंशन व आरक्षण दे सरकार
स्वतंत्रता सेनानियों की पहली पीढी उतराखंड की तर्ज पर कुटुंब पेंशन चाहती है। जिसमें पहली पीढ़ी को 10 हजार रूपये पेंशन देने का प्रावधान है। इस मांग को लेकर स्वतंत्रता सेनानियों का प्रतिनिधि मंडल सीएम नायब सिंह सैनी से मिलने भी पहुंचा था। इन लोगों ने 2 प्रतिशत होर्टिजेंटल आरक्षण की मांग की है। फिलहाल उनको जो आरक्षण दिया गया है उसमें पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों का कहना है कि लाखों की संख्या में पूर्व सैनिक व उनके बच्चे होने के कारण इस आरक्षण का लाभ उनको कभी मिल ही नहीं पाता।

नेता जी का भाषण सुनाते थे तुलसीराम ...
तुलसीराम अपने बच्चों को सुभाष चंद्र बोस का भाषण भी सुनाते थे। ओमप्रकाश ने बताया कि रेडियो पर नेताजी का भाषण सुनने के बाद उनके पिता आजाद हिंद सेना में भर्ती हो गए थे। नेता जी को उन्होंने वर्ष 1945 में करीब से देखा था जब नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने संबोधित करते हुए कहा था कि हमें बर्मा छोड़कर जाना होगा। हमने लड़ाई के पहले हिस्से में हार गए हैं लेकिन हौंसला नहीं हारे। हम फिर से लड़ेंगे और जीतेंगे।


ओमप्रकाश ने बताया कि1997 में मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए। पिता हमें सच्चाई की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने हमें ईमानदारी के से काम करने के लिए प्रेरित किया। वह कहते थे कि काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। जो काम करो उसी को मन लगा कर करते रहना। जब तक जीवित रहे तब तक किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया।

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