फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   In 90 years, the historic journey of the national flag has been completed from the green lotus flag to the tricolor with the Ashok Chakra.

90 साल में हरे रंग के कमल वाले झंडे से अशोक चक्र वाले तिरंगे तक पूरा हुआ राष्ट्रीय ध्वज का ऐतिहासिक सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 11:15 PM IST
विज्ञापन
In 90 years, the historic journey of the national flag has been completed from the green lotus flag to the tricolor with the Ashok Chakra.
शहर के सर्वोदय भवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य। - फोटो : Hisar
हिसार। करीब 90 साल के ऐतिहासिक सफर के बाद राष्ट्रीय ध्वज का यह स्वरूप तैयार हुआ था। 1857 के विद्रोह के समय पहली बार ध्वज का उपयोग किया गया था। हरे रंग के उस ध्वज में कमल का फूल लगाया गया था। तिरंगे के वर्तमान स्वरूप को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में स्वीकार किया गया था। जिसे पहली बार 15 अगस्त 1947 को फहराया गया था। राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के बारे में एक आचार संहिता है। जिसमें समय व आवश्यकता अनुसार कुछ संशोधन किए जा चुके हैं। यह तथ्य इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किए।
विज्ञापन

अमर उजाला की ओर से रविवार को सर्वोदय भवन में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तिरंगा तब और अब विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम शाम 5 बजे शुरू हुआ। मुख्य वक्ता इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज की विकास यात्रा से अवगत कराया। वरिष्ठ अधिवक्ता पीके संधीर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मंच संचालन सेवानिवृत्त अधीक्षक अभियंता सत्यपाल शर्मा ने किया। डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज के 90 साल के इतिहास में कई बार बदलाव हुए। 3 जून 1947 को राष्ट्रीय ध्वज की अधिक आवश्यकता महसूस हुई। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मंजूर कर लिया था। उस समय फैसला लिया गया था कि 15 अगस्त 1947 को इसे लागू किया जाएगा। 15 अगस्त की रात 12 बजकर 7 मिनट पर आजादी के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए थे। भारत में इलाहाबाद के समय को आधार माना जाता है। पाकिस्तान में जकोवाबाद के समय को आधार माना जाता है। जिसमें 30 मिनट का अंतर है। रात 12.07 पर हस्ताक्षर होने के चलते भारत इसे 15 अगस्त मानता है। उसी दिन आजादी दिवस मनाता है। पाकिस्तान के लोग 11.37 होने के कारण उसे 14 अगस्त की रात मानते हैं। इस कारण वह 14 अगस्त को आजादी दिवस मनाते हैं। अशोक चक्र की 24 कड़ियां समय को इंगित करती हैं। इसका नीला रंग आसमान को प्रतिबिंबित करता है।
विज्ञापन

इस मौके पर हरियाणा साहित्य ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश भारतीय के कथा संग्रह मां और माटी के नेपाली अनुवाद आम्मा रे माटो का विमोचन एडवोकेट पीके संधीर ने किया। दूरदर्शन के पूर्व निदेशक अजीत सिंह ने तिरंगे पर एक गीत सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

-------------
पहले तिरंगे के तीनों रंगों को धर्म से जोड़कर देखा जाता था। जिसमें केसरिया हिंदू, सफेद इसाई तथा हरा रंग मुस्लिम समुदाय का प्रेरक माना जाता था। संविधान सभा ने राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में इसकी व्याख्या इस प्रकार की है। जिसमें केसरिया रंग त्याग, बलिदान का संदेश है। सफेद रंग शांति व हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है।

---------------
राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा
- 1857 हरे रंग के झंडे में कमल का फूल
- 1906 पीले व हरे रंग के झंडे में वंदेमातरम लिखा गया
- 1907 केसरिया, सफेद व हरे रंग के झंडे में 7 फूल
- 1917 पांच लाल, चार पीली पट्टी व कोने में यूनियन जैक
- 1930 रावी नदी के किनारे तिरंगे को लहराया, जिसके मध्य चरखा था
- 1943 आजाद हिंद सेना ने तिरंगे में चरखे के बजाय दौड़ता चीता लगाया
- 1947 तिरंगे में अशोक चक्र वाले ध्वज को देश को समर्पित किया गया
-----------------------
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीके संधीर ने कहा कि संविधान ने हमें यह झंडा दिया है। भारत के लोगों ने इसे चुना है। राष्ट्रीय ध्वज के पीछे की रोचक कहानी से डॉ. महेंद्र सिंह ने रूबरू कराया। हमें युवाओं को भटकाव से रोकना होगा। उन्हें सही दिशा देनी होगी। शहीद भगत सिंह को छोटा साबित करने की कोशिश करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed