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मकान बनाना था तो किसी भरनी थी बच्चों के स्कूल की फीस, बारिश और सूंडी ने तोड़े सपने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 12:21 AM IST
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If the house was to be built, someone had to pay the school fees of the children, rain and snail broke dreams
मकान बनाना था तो किसी को भरनी थी बच्चों के स्कूल की फीस, बारिश और सूंडी ने तोड़े सपने
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हिसार। प्रदेश के कई क्षेत्रों हुई बारिश और गुलाबी सूंडी की मार ने कपास की फसल उगाने वाले किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। इस संकट से कपास उत्पादन में 30 से 80 प्रतिशत तक गिरावट आई है। फसल की उत्पादकता में कमी के कारण किसी के मकान बनाने के सपने ढह गए तो किसी के बच्चों की शादी धूमधाम से करने के अरमान बिखर गए। कई जगहों पर कपास का उत्पादन बिलकुल भी नहीं होनेे के कारण किसानों ने दुखी मन से खेतों को जोत दिया। रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्कूल में बच्चों की फीस भरनी हो या दवाईयों का खर्च, छोटे किसानों पर संकट बढ़ गया है।
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अब स्कूल में क्या कहूंगा...बिना फीस कैसे मानेंगे वो -
मेरे पास 7 एकड़ जमीन है, जिनमें से 3 एकड़ में बाजरा और 4 एकड़ में नरमा था। लेकिन बारिश के बाद खेतों में पानी भर गया। अधिक समय तक पानी खड़ा रहने से बाजरे की फसल गिर गई और उत्पादन 40 प्रतिशत कम हो गया। कपास की फसल बारिश के खड़े पानी के कारण खराब तो हो रही थी, लेकिन फिर भी कुछ उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन जब टिंडे में गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा तो सारे सपने मिट गए। बेटी 10वीं और बेटा 7वीं कक्षा में पढ़ता है। पिछली बार स्कूल में मैंने कहा था कि उनकी फीस कपास बेचकर भर देंगे। अब कहां से भरें...बिना फीस कैसे मानेंगे वो।
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- मनोज कुमार, किसान, गांव कोहली।
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सोचा था मकान बनाने में सहारा लग जाएगा -
कोट -
मेरे पास साढ़े 4 एकड़ में नरमा है। सितंबर की बारिश से पहले तक उम्मीद थी अच्छा नरमा होगा और मकान बनाने में कुछ सहारा लग जाएगा। लेकिन बारिश और फिर लाल कीड़े ने भी कपास का नुकसान कर दिया। अब तो खर्चा निकल जाए, वो ही बहुत बड़ी बात है। खेत में मकान बना रहा था तो सोचा था कि नरमा की फसल से सहारा लग जाएगा। लेकिन मेरी ही बहुत से जमींदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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- राज सिंह, किसान लुदास।
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